हरिद्वार : जिले के सुल्तानपुर कस्बे में बन रही मस्जिद को लेकर जिला प्रशासन ने कागजी कार्रवाई शुरू कर दी है। एसडीएम लक्सर ने मस्जिद की ऊंची मीनार को सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील मानते हुए सुल्तानपुर नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी को आख्या देने को कहा है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार यहां पहले पुरानी मस्जिद थी, लेकिन उसे तोड़ कर भी नया बनाया जा रहा है।
250 फीट ऊंची है मस्जिद की मीनार
निजी भूमि पर बनाई जा रही इतनी विशालकाय मस्जिद और उस पर 250 फिट ऊंची मीनारें बनाए जाने के लिए किसी तरह की अनुमति अथवा नक्शा पास नहीं करवाया गया है। जिसे लेकर सोशल मीडिया पर ये प्रकरण चर्चा में आया। सोशल मीडिया में इतनी विशाल मस्जिद को उत्तराखंड की सबसे बड़ी मस्जिद बनाए जाने का दावा मुस्लिम समुदाय द्वारा किया जा रहा है।
बड़ा सवाल ये है कि हरिद्वार जिले को सनातन की दृष्टि से पूरे विश्व में अहम स्थल माना जाता है ऐसे में इसके निर्माण को लेकर अखाड़ों संत समाज में नाराजगी भी है और चिंता भी है।
हरिद्वार की बदलती डेमोग्राफी
हरिद्वार जिले में डेमोग्राफी तेजी से बदल रही है इस विषय पर भी संत समाज ने चिंता जाहिर की हुईं है, संत समाज ने उक्त मस्जिद के निर्माण को लेकर भी ध्यान आकृष्ट किया है जिसके बाद से जिला प्रशासन हरकत में आया है। जानकारी के मुताबिक इस मस्जिद के निर्माण मानकों को लेकर कोई गाइड लाइन की चिंता नहीं की गई क्योंकि जब इसका नक्शा ही पास नहीं करवाया गया तो न तो फायर सेफ्टी न ही लोकनिर्माण और न ही अन्य किसी विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया गया।
आम तौर पर कोई आम व्यक्ति घर भी बनाता है तो उसके लिए मानक तय है, कितनी ऊंचाई होगी,पार्किंग स्पेस कहां है ? परन्तु उक्त मस्जिद निर्माण के दौरान ऐसे किसी भी मानकों का पालन नहीं किया गया। पहाड़ी रिहायशी अथवा व्यवसायिक भवन बनाने के लिए केवल 12 मीटर की अनुमति है। जबकि मैदानी इलाकों में इसमें 30 मीटर यानी करीब 100 फीट लेकिन यहां मस्जिद में 250 फिट ऊंची मीनार किसी भी मानक के अनुसार प्रथम दृष्टि में सही नहीं कही जा रही। जानकारी के अनुसार यदि सौ फीट से ऊंची इमारत है तो उसके लिए शासन से अनुमति के साथ-साथ आईआईटी के संरचनात्मक प्रौद्योगिकी विभाग से अनुमति लेना आवश्यक है।
फंडिंग पर उठ रहे सवाल
उक्त मस्जिद निर्माण के लिए फंडिंग कहां से हुई ? इसको लेकर भी आवाज उठ रही है क्योंकि सुल्तानपुर बहुत छोटा सा कस्बा है यहां की मुस्लिम आबादी इतनी नहीं है कि इतनी बड़ी मस्जिद के लिए इतना बड़ा चंदा कर सके। संभवतः इसमें बाहरी लोगों ने भी सहयोग किया है। जिसे लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा है। उधर डीएम हरिद्वार मयूर दीक्षित का कहना है कि प्रशासनिक जांच पड़ताल गतिमान है,भवन निर्माण के मानकों का पालन कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि फिलहाल निर्माण कार्य रुकवा दिया गया है। दस्तावेजों की पड़ताल की जाएगी।
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि नियम कानून तोड़ने की किसी को इजाजत नहीं दी जाएगी। देवभूमि का एक अपना सांस्कृतिक स्वरूप है उसे बदलने नहीं दिया जाएगा।

















