स्वदेशी जागरण मंच (SJM) ने केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) को 2025 के ड्राफ्ट गाइडलाइंस ऑन सिमिलर बायोलॉजिक्स पर सुझाव भेजे हैं। मंच का कहना है कि ये दिशानिर्देश कैंसर, डायबिटीज और ऑटोइम्यून बीमारियों जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज को सस्ता और सुलभ बनाने की दिशा में बड़ा कदम हैं, लेकिन इन्हें और स्पष्ट करने की जरूरत है। SJM के राष्ट्रीय सह-संयोजक डॉ. अश्वनी महाजन ने पत्र में बायोसिमिलर दवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए कई अहम सिफारिशें की हैं।
पशु परीक्षण को पूरी तरह खत्म करने की मांग
SJM ने ड्राफ्ट गाइडलाइंस में पशु परीक्षण को वैकल्पिक बनाने की सराहना की, लेकिन इसे पूरी तरह खत्म करने की मांग की है। मंच का कहना है कि आधुनिक तकनीकें जैसे इन-विट्रो टेस्ट, ऑर्गन-ऑन-चिप और कंप्यूटर सिमुलेशन पशु परीक्षण का बेहतर और नैतिक विकल्प हैं। ये तरीके तेज, सटीक और सस्ते हैं। यूके, यूरोप, कनाडा और अमेरिका जैसे देशों ने पहले ही बायोसिमिलर के लिए पशु परीक्षण खत्म कर दिए हैं। SJM ने सुझाव दिया कि अगर लैब टेस्ट में बायोसिमिलर और मूल दवा में समानता साबित हो जाए, तो पशु परीक्षण की जरूरत नहीं होनी चाहिए।
क्लिनिकल ट्रायल के लिए स्पष्ट नियम बनाएं
ड्राफ्ट गाइडलाइंस में कुछ क्लिनिकल ट्रायल माफ करने का प्रावधान है, जो लागत कम करने और दवाओं को जल्दी बाजार में लाने में मददगार है। लेकिन, SJM का कहना है कि इसके लिए स्पष्ट नियम नहीं होने से भ्रम और देरी हो सकती है। मंच ने CDSCO से यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी (EMA) की तरह साफ और सबूत-आधारित शर्तें तय करने की अपील की है, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और एकसमान हो।
सस्ती और सुलभ दवाओं पर जोर
SJM ने कहा कि भारत ने हमेशा सस्ती दवाएं दुनिया को दी हैं। बायोसिमिलर इस विरासत को आगे बढ़ा सकते हैं, बशर्ते अनावश्यक खर्चे कम हों। मंच ने CDSCO से अपील की कि वह मंजूरी प्रक्रिया को आसान बनाए, स्थानीय निर्माताओं को बढ़ावा दे और विदेशी दबाव से बचकर सस्ती दवाएं सुनिश्चित करे।

















