अप्रैल में कश्मीर के इस्लामी आतंकवादियों द्वारा पहलगाम में निहत्थे पर्यटकों की मजहब पूछकर हत्या के मामले में जान गंवाने वाले बालेश्वर जिले के ईशानी गांव निवासी प्रशांत कुमार सतपथी की पत्नी प्रियदर्शिनी आचार्य ने सरकार और सेना द्वारा चलाए गए “ऑपरेशन महादेव” की सफलता का स्वागत किया है। इस ऑपरेशन में तीनों आतंकवादियों को मार गिराया गया, जो इस हमले में शामिल थे।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को लोकसभा में यह जानकारी दी और इसे भारत की आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। शाह ने कहा कि ऑपरेशन महादेव के तहत भारतीय सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पहलगाम हमले में शामिल तीनों आतंकियों को ढेर कर दिया।
इस बारे में प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रियदर्शिनी ने कहा, “आज मैं बहुत सुकून और गर्व महसूस कर रही हूं। मेरे पति तो वापस नहीं आएंगे, लेकिन आज उनकी आत्मा को शांति जरूर मिली होगी। उन्होंने कहा कि मेरे पति ने देश के लिए अपने प्राण दिए और अब उन्हें न्याय मिला है। भारतीय सेना और हमारी सरकार ने जो वादा किया था, वह निभाया है।” उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय सेना को धन्यवाद दिया।
प्रियदर्शिनी ने कहा कि पहलगाम आतंकवादी हमले के मास्टरमाइंड के मारे जाने की खबर सुनकर उनके परिवार के लोग भी खुश हैं। पिछले तीन महीनों के मानसिक आघात को याद करते हुए उन्होंने कहा, “हमारा पूरा परिवार इस दर्द से जूझ रहा था। मैं अक्सर सोचती थी कि क्या दोषी कभी पकड़े जाएंगे। अब जब वे मारे गए हैं, तो यह एक कड़ा संदेश है कि भारत न तो भूलता है और न ही माफ करता है।”
उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा के महत्व पर जोर देते हुए सरकार और सुरक्षाबलों के बीच बेहतर तालमेल की सराहना की। मुझे विश्वास है कि आतंकवाद से प्रभावित अन्य परिवार भी अब महसूस करेंगे कि न्याय हुआ है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को समाप्त नहीं होना चाहिए। आतंकवादियों के खात्मे की प्रक्रिया जारी रखी जानी चाहिए ताकि वे खौफ में रहें और भारत के निर्दोष लोगों को आतंकवादी कार्रवाई के जरिए मारने की हिम्मत न कर सकें। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्तमान सरकार जब भी जरूरत पड़े, निर्णायक कार्रवाई करने में पीछे नहीं हटेगी। जब पूछा गया कि क्या उन्होंने आतंकियों को पहचाना था, तो प्रियदर्शिनी ने बताया कि हमले से पहले कुछ संदिग्धों को इलाके में घूमते देखा गया था, लेकिन उन्हें सुरक्षा बलों का हिस्सा समझा गया। हमें बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि वे कौन थे। मास्टरमाइंड तो आम लोगों की तरह घुलमिल गया था, लेकिन अब उसे भी उसका अंजाम मिल चुका है।

















