जिन्ना के देश के तथाकथित फील्ड मार्शल और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर एक बार फिर विदेशों में जाकर अपने देश के लिए पैसा और समर्थन जुटाने की कवायद में लगे थे कि अचानक बीजिंग से बुलावा आया और वे जा पहुंचे अपने आका के पास! जैसे जैसे मुनीर की अफरातफरी में की गई इस चीन यात्रा की परतें उघड़ रही हैं, दक्षिण एशिया में कूटनीतिक हलचलें एक बार फिर से उभर आई हैं। वह दौरा न केवल अचानक हुआ, बल्कि मुनीर ने पहले से तय अपना श्रीलंका और इंडोनेशिया के दौरे तक रद्द कर दिए। आखिर ऐसा क्या था कि वाशिंगटन में उप प्रधानमंत्री इशाक डार को अकेला छोड़ वे वहां से सीधे चीन जा पहुंचे थे?
दरअसल गत 25 जुलाई को बीजिंग में मौजूद असीम मुनीर को उसकी बजाय श्रीलंका और फिर इंडोनेशिया में होना था, लेकिन उन्होंने अचानक बीजिंग का रुख किया। उनका वह दौरा भारत-पाकिस्तान के बीच मई में हुए सैन्य संघर्ष के बाद हुआ था, जिसकी वजह से इसे लेकर विशेषज्ञों की नजर और बारीक हुई है। चीन जाकर उन्होंने विदेश मंत्री वांग यी और उपराष्ट्रपति हान झेंग से मुलाकात की थी।
इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि जिन्ना के देश में गत कुछ वर्षों में चीनी नागरिकों पर कई हमले हुए हैं, विशेषकर बलूचिस्तान और सीपीईसी परियोजनाओं से जुड़े क्षेत्रों में। मार्च से जुलाई 2025 के बीच कथित बलूच विद्रोही गुटों ने कम से कम चार बार चीनी नागरिकों को निशाना बनाया गया। उस दौरे में विदेश मंत्री वांग ने असीम मुनीर को स्पष्ट शब्दों में कहा था कि ‘अब सिर्फ भरोसे से काम नहीं चलेगा।’
इतना ही नहीं, चीन ने चेतावनी दी थी कि यदि सुरक्षा नहीं सुधरी, तो सीपीईसी में निवेश रोकने पर विचार किया जा सकता है।

बेशक, वांग यी ने मुलाकात के दौरान मुनीर को चीनी नागरिकों की सुरक्षा में विफलता पर फटकार लगाई थी। चीन के उपराष्ट्रपति से मुलाकात से पहले मुनीर की टोपी उतरवा ली गई थी, जिसे पाकिस्तानी मीडिया ने तो नजरअंदाज किया लेकिन विश्लेषकों ने इसे अपमानजनक संकेत माना था।
पाकिस्तान एक ओर चीन से हथियार और आर्थिक सहायता चाहता है, तो दूसरी ओर अमेरिका से सैन्य समर्थन और निकटता पाने की उम्मीद लगाए बैठा है। असीम मुनीर की वाशिंगटन और बीजिंग के बीच भागमभाग चीन और अमेरिका के बीच संतुलन साधने की कोशिश भी बताई जा रही है। अमेरिका में ट्रंप प्रशासन से मिले सकारात्मक संकेतों के बाद पाकिस्तान वॉशिंगटन को भी लुभाने की कोशिश कर रहा है, जिसका एक उदाहरण जनरल कुरिल्ला को निशाने इम्तियाज दिए जाने से मिलता है।
इसमें दो राय नहीं है कि भारत ने हिन्द प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका, जापान और अन्य देशों के साथ साझेदारी को मजबूत किया है। पाकिस्तान को भय है कि कहीं उसे दक्षिण एशिया में दरकिनार न कर दिया जाए। असीम मुनीर की चीन यात्रा को भारत के क्षेत्रीय नेतृत्व को चुनौती देने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।
भराजनीति की नजर से देखें तो असीम मुनीर की वह चीन यात्रा पाकिस्तान की कूटनीतिक बेचैनी, सुरक्षा विफलताओं और क्षेत्रीय अस्थिरता को उजागर करती है। चीन अब पाकिस्तान से केवल दोस्ती नहीं, बल्कि ठोस सुरक्षा गारंटी चाहता है। वहीं पाकिस्तान अपनी सैन्य कूटनीति के जरिए अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है, जिसमें वह भारत के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है।

















