रूस और यूक्रेन के बीच बीते चार साल से चल रहा युद्ध थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। अमेरिकी हथियारों के दम पर यूक्रेन अभी भी रूस को टक्कर दे रहा है। इस बीच युद्धविराम नहीं करवा पाने में असफल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने यूक्रेन को दी जाने वाली मदद को रोक दिया है। इसमें पैट्रियट एयर डिफेंस मिसाइल और सटीक-निर्देशित तोपों की आपूर्ति शामिल है। इसको लेकर व्हाइट हाउस के प्रवक्ता अन्ना केली ने कहा है कि देश के हथियार भंडार की समीक्षा के बाद ये फैसला लिया गया है।
वहीं दूसरी ओर रूस ने अपने हमलों को और तेज कर दिया है। हाल ही में रूस ने कीव पर 550 ड्रोन और मिसाइलों से पूरे कीव को दहला दिया। इनमें ईरान के शाहिद ड्रोन थे। इसके अलावा 11 मिसाइलों से भी हमले किए गए थे। इसमें 24 से अधिक लोगों के मारे की खबर सामने आई। इसके साथ ही रूस ने पूर्वी यूक्रेन में पोकरोव्स्क और कोस्तियांटिनिव्का जैसे महत्वपूर्ण शहरों के पास सैन्य अड्डों को मजबूत किया है।
अमेरिका के फैसले से यूक्रेन की मुश्किलें बढ़ीं
इस बीच यूक्रेन में हथियारों की कमी सामने आ गई है। यूक्रेनी राष्ट्रपति व्लोडिमीर जेलेंस्की इस फैसले से बहुत नाराज हो गए हैं। अब वो अमेरिका से हथियारों की आपूर्ति रोकने के पीछे का कारण स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं। यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने इस मामले में अमेरिकी राजदूत को तलब कर लिया है।
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रूस हुआ खुश
अमेरिका के द्वारा यूक्रेन की मदद को रोके जाने के बाद रूस खुश हो गया है। रूसी प्रवक्ता दमित्री पेसकोव ने इसका स्वागत करते हुए कहा कि अब “विशेष सैन्य अभियान” जल्द खत्म होगा। रूस ये मानकर चल रहा है कि हथियारों की कमी के कारण यूक्रेन टिक नहीं सकेगा।
सियासी हलकों में खबर ये भी है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यूक्रेन के रवैये से बहुत नाखुश हैं। वो युद्ध को रोकना चाहते हैं और हथियारों की आपूर्ति के एवज में यूक्रेन के खनिजों पर समझौता करना चाहते हैं, लेकिन यूक्रेन का आनाकानी से वो नाराज हो गए हैं। इसलिए अब इस प्रकार से उस पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।
चीनी चुनौती से भी है निपटना
डोनाल्ड ट्रंप इस बात को समझ रहे हैं कि एशिया में दबदबा बनाए रखने और चीन की चुनौती से निपटने के लिए यूक्रेन किसी काम का नहीं है। उसके लिए रूस जैसे महाबली की ताकत चाहिए। इसलिए अब वो रूस के साथ रिश्तों को सुधारना चाहते हैं।
















