रूस यूक्रेन के बीच बीते चार साल से चल रहा युद्ध समाप्त होता नहीं दिख रहा है। हर बार कुछ न कुछ ऐसी परिस्थितियां खड़ी हो जाती हैं, जिससे दोनों देशों के बीच युद्धविराम हो ही नहीं पा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता में आने से पहले ही कहा था कि इस युद्ध को एक माह में ही रुकवा देंगे, लेकिन अब उनकी उम्मीदें धरी कि धरी रह गई हैं। इसीलिए अब उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को दोषी ठहराना शुरू कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा लगता है कि रूस इस युद्ध को रोकना ही नहीं चाहता है।
ट्रम्प का पुतिन पर तंज
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने हालिया बयान में कहा कि पुतिन ने युद्ध को लंबा खींच लिया है, जो उनकी अपेक्षाओं से अधिक है। इससे पहले गुरुवार को उन्होंने पुतिन के साथ फोन पर बातचीत की थी। उसी बातचीत के बाद उनकी ये निराशा उभरकर सामने आई है। ट्रंप ने एक बयान में कहा कि अब वो आज (शुक्रवार ) यूक्रेनी राष्ट्रपति व्लोदिमीर जेलेंस्की से भी बातचीत करेंगे।
यूक्रेन के ड्रोन अटैक के बाद बिगड़ी बात
गौरतलब है कि रूस और यूक्रेन के बीच सऊदी अरब में युद्धविराम को लेकर चर्चाएं चल रही थीं, लेकिन बीते माह यूक्रेन के 4000 किमी अंदर तक जाकर ड्रोन से हमला करके रूस के 40 से अधिक फाइटर जेट्स को तबाह करके उसे तगड़ा झटका दिया था। उस घटना के बाद रूस ने पलटवार किया। रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने चेतावनी दी थी कि यूक्रेन ने जो किया है, उसे उसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। उसी के बाद दोनों के बीच चल रही वार्ता का अंत हो गया।
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फरवरी 2022 में शुरू हुआ था युद्ध
गौरतलब है कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध की शुरुआत फरवरी 2022 में हुई थी। उस दौरान दुनिया को लगा था कि रूस जैसे महाबली के सामने यूक्रेन एक सप्ताह भी नहीं टिक पाएगा। लेकिन, पश्चिमी देशों और नाटो की मदद से यूक्रेन न केवल इस युद्ध में टिका है, बल्कि वो रूस को काफी गहरी चोट भी दे चुका है।
क्या है इस युद्ध की पृष्ठभूमि
अगर आप इस युद्ध की पृष्ठभूमि को समझने की कोशिश करेंगे तो पाएंगे कि इस युद्ध का मुख्य केंद्र है नाटो। यूक्रेन नाटो का सदस्य बनना चाहता है, लेकिन रूस नाटो को अपनी सीमा के नजदीक नहीं आने देना चाहता। उसका मानना है कि इससे उसकी संप्रभुता को खतरा है। इसीलिए कई बार रूसी सरकार ने यूक्रेन को समझाया, लेकिन यूक्रेन नहीं माना। इसके बाद अंतत: रूस ने मिलिट्री अभियान छेड़ दिया। अब हालात ये हो गए हैं कि यूक्रेन न तो नाटो का सदस्य बन पाया, न ही वो रूसी हमलों से सुरक्षित है। बल्कि, यूक्रेन नाटो और रूसी हथियारों का टेस्टिंग ग्राउंड बन गया है।

















