केंद्र सरकार ने ऑनलाइन खरीदारी में पारदर्शिता और उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने सभी ई-कॉमर्स कंपनियों को तीन महीने के भीतर अपने प्लेटफॉर्म (वेबसाइट, मोबाइल एप्स) से डार्क पैटर्न हटाने और ग्राहकों को गुमराह करने वाले विज्ञापनों के इस्तेमाल पर रोक लगाने का निर्देश दिया है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में सरकार ने डार्क पैटर्न की रोकथाम और ऑनलाइन खरीदारी में अनुचित व्यवहार पर नियंत्रण के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे, ताकि डिजिटल युग में उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की जा सके। इसके बावजूद ई-कॉमर्स कंपनियां आनलाइन खरीदारी करने वाले ग्राहकों को झांसा देने के लिए नए-नए तरीके अपना रही हैं। डार्क पैटर्न उन डिजिटल तकनीकों और यूजर इंटरफेस डिजाइनों को कहा जाता है, जो उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ होते हैं। इनका इस्तेमाल उपभोक्ताओं को भ्रमित करके खरीदारी, सब्सक्रिप्शन या अतिरिक्त भुगतान के लिए प्रेरित करने में किया जाता है। ऑफर सीमित समय के लिए है, अभी नहीं खरीदा तो चूक जाएंगे, फेक रिव्यू, जल्दी करें छूट खत्म होने वाली है, जैसे संदेशों को दिखाकर कंपनियां ग्राहकों को बिना सोचे-समझे त्वरित निर्णय लेने के लिए मजबूर करती हैं।
ग्राहकों के लिए बिछा रखा है ठगी का जाल
इसके अलावा कई कंपनियां उपभोक्ताओं के सामने झूठी जरूरत का माहौल बनाने, उनकी ऑनलाइन शॉपिंग कार्ट में अतिरिक्त उत्पाद जोड़ देने या डोनेशन करने और कोई उत्पाद व सेवा लेने के लिए दबाव बनाने की कंफर्म शेमिंग जैसी ट्रिक भी अपना रही हैं। इसके चलते ग्राहक न चाहते हुए भी ऐसी चीजें या सेवाएं खरीद लेते हैं, जिनकी उन्हें कोई जरूरत नहीं होती। दरअसल कंफर्म शेमिंग भी एक डार्क पैटर्न है, जिसमें प्लेटफॉर्म ग्राहक को गलत विकल्प चुनने के लिए गुस्सा या शर्मिंदगी महसूस करवाते हैं, जिससे वे दबाव में आकर उस उत्पाद को लेने का निर्णय लेते हैं, जिसे वह नहीं लेना चाहते। यही नहीं कई प्लेटफॉर्म ऑनलाइन खरीदारी करने वालों को बिना पूरी जानकारी दिए सब्सक्रिप्शन ट्रैप में फंसा लेते हैं, जिससे वे अनचाहे खर्चों का शिकार हो जाते हैं। ड्रिप प्राइसिंग तकनीक के जरिए ग्राहकों से अतिरिक्त शुल्क भी वसूला जाता है। ड्रिप प्राइसिंग में शुरुआत में किसी उत्पाद की कुल लागत का केवल एक हिस्सा प्रदर्शित किया जाता है, लेकिन जैसे-जैसे ग्राहक खरीद प्रक्रिया के आखिरी चरण में आता है, उसे अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है। इस रणनीति का उपयोग शुरुआत में कम कीमत पर ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए किया जाता है।
ऑनलाइन शॉपिंग में रहें सतर्क
ऑनलाइन शॉपिंग आम नागरिक की जिंदगी का एक जरूरी हिस्सा बन गया है। खाने के समान से लेकर कपड़ों तक सब कुछ मिनटों में डिलीवर कर दिया जाता है, लेकिन ऑनलाइन बाजार का दायरा बढ़ने के साथ ग्राहकों के सामने धोखाधड़ी और गुणवत्ता को लेकर कई तरह की चुनौतियां सामने आ रही हैं। ऐसे में ऑनलाइन शॉपिंग करते समय ग्राहकों को जागरूक रहना चाहिए, ताकि वे धोखाधड़ी से बच सकें। कोई भी ऑफर या सदस्यता लेने से पहले उसकी पूरी जानकारी ध्यान से पढ़ें। किसी भी ऐप या वेबसाइट पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी या भुगतान करने से पहले उसकी वैधता और सुरक्षा की जांच करें। खरीदारी करते हुए यदि अतिरिक्त शुल्क दिखे तो तुरंत ग्राहक सेवा से संपर्क करें। किसी भी नए प्लेटफॉर्म का उपयोग करने से पहले ग्राहक उसका रिव्यू और रेटिंग जरूर देखें। उपभोक्ता संरक्षण कानून और आनलाइन खरीदारी से जुड़े अधिकारों के बारे में जानकारी रखें। बिना सोचे-समझे त्वरित लाभ को देखकर लिए गए निर्णय सदैव हितकारी नहीं होते। इसलिए लुभाने वाले ऑफर के झांसे में न आएं। सोशल मीडिया पर ऐसे कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म हैं, जहां खरीदारी करने के बाद रुपये गंवाने और ठगे जाने का एहसास होता है। वहीं, ई-कॉमर्स कंपनियों को भी इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि किसी उत्पाद के विज्ञापन के साथ उपभोक्ता बहुत संजीदगी और भरोसे से जुड़ा होता है। जब यह भरोसा टूटता है तो उत्पाद का बाजार भी टूट जाता है। भरोसेमंद विज्ञापन उत्पाद और कंपनी का भविष्य तय करते हैं। दूसरों से आगे बढ़ने की चाहत में कंपनियां ऐसे विज्ञापनों का सहारा न लें, जो उत्पाद को बढ़ावा देने के नाम पर न केवल गलत जानकारी देते हैं, बल्कि ग्राहकों के साथ भी धोखाधड़ी करते हैं।













