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पूर्व प्रधानमंत्री माधव नेपाल पतंजलि जमीन घोटाले में फंसे, अपराधी साबित हुए तो 17 साल की होगी जेल

इस प्रकरण के मुकदमे में माधव नेपाल सहित कुल 93 लोगों के नाम दर्ज कराए गए हैं। इनमें कुछ पूर्व मंत्रियों और पूर्व सरकारी अधिकारियों के नाम भी हैं

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Jun 7, 2025, 12:17 pm IST
in विश्व, विश्लेषण
माधव कुमार नेपाल बाएं का कहना है कि सभी आरोप निराधार हैं। प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने ही उनके विरुद्ध इस प्रकार का षड्यंत्र रचा है

माधव कुमार नेपाल बाएं का कहना है कि सभी आरोप निराधार हैं। प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने ही उनके विरुद्ध इस प्रकार का षड्यंत्र रचा है

नेपाल में एक बड़ा राजनीतिक भूचाल आ खड़ा हुआ है। उस हिमालयी देश के इतिहास में पहली बार किसी प्रधानमंत्री का नाम भ्रष्टाचार के आरोपी के नाते दर्ज हुआ है जिसके विरुद्ध अब मुकदमा चलाने की तैयारी हो रही है। पूर्व हिन्दू राष्ट्र नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में घिर चुके हैं। उनके विरुद्ध नेपाल की भ्रष्टाचार निरोधी आयोग ने विशेष अदालत में आरोप पत्र दायर कर दिया है। जिस अपराध में उन्हें दोषी दर्ज किया गया है वह प्रकरण 2009 से 2011 के बीच घटा था। उस दौरान पतंजलि योगपीठ, नेपाल को कानूनन भूमि खरीदने की इजाजत दी गई थी।

इस मामले के दर्ज होने के बाद, नेपाल के राजनीतिक दलों में चर्चाएं चल रही हैं कि माधव कुमार का अब क्या होगा। नेपाल की राजनीति में पूर्व प्रधानमंत्री माधव एक बड़ा नाम हैं और एक वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता के रूप में जाने जाते हैं। उस देश की बनती—बिगड़ती राजनीतिक परिस्थितियों में वे भी गठबंधन सरकार में प्रधानमंत्री रह चुके हैं। नेपाल की यूनाइटेड सोशलिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता माधव कुमार नेपाल ने नेपाल के सुप्रसिद्ध समाचार पत्र ‘कांतिपुर’ से बात करते हुए अपने पर लगे सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने कहा कि किसी भी सौदे या संधि में कभी कोई भ्रष्टाचार नहीं किया। उनका कहना है कि पतंजलि जमीन सौदे में उन्होंने कोई गैरकानूनी काम नहीं किया, वे किसी भ्रष्टाचार में शामिल नहीं रहे हैं। उनकी ओर से सत्ता अधिष्ठान को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाया गया है।

नेपाल की भ्रष्टाचार निरोधी आयोग का आरोप है कि कावरे जिले में भूमि को आगे किसी अन्य भूमि में अदल-बदल देने अथवा अधिक मूल्य पर बेचने की इजाजत दी गई था। इससे सरकार को खामियाजा उठाना पड़ा। आयोग ने न्यायालय में दर्ज मुकदमे के माध्यम से मांग की है कि वह 18.5 करोड़ नेपाली रुपये यानी लगभग 13.5 लाख डॉलर का दंड जमा करने के आदेश जारी करे। उल्लेखनीय है कि अगर पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल पर दोष सिद्ध होता है तो उन्हें कि 17 साल तक के कारागर की सजा सुनाई जा सकती है।

मामले से खुद को अलग करते हुए माधव कुमार नेपाल का कहना है कि सभी आरोप निराधार हैं और उस जमीन के बेचे जाने में कोई गैरकानूनी काम नहीं किया गया है। इसके साथ ही माधव आरोप लगाते हैं कि प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने ही उनके विरुद्ध इस प्रकार का षड्यंत्र रचा है ताकि उनको राजनीति से बाहर कर सकें।

इस विषय में पतंजलि योगपीठ ने कहा है कि समझौते में किसी भी प्रकार की धांधली नहीं हुई है। योग पीठ की ओर से बोलते हुए एस.के. तिजारावाला ने कहा कि पीट ने सही तरीके से निजी स्तर पर भूमि क्रय की है। पतंजलि ने सरकारी भूमि नहीं खरीदी है इसलिए ऐसी किसी भी कार्रवाई में योग पीठ का नाम जोड़ना गलत है।

इस प्रकरण के मुकदमे में माधव नेपाल सहित कुल 93 लोगों के नाम दर्ज कराए गए हैं। इनमें कुछ पूर्व मंत्रियों और पूर्व सरकारी अधिकारियों के नाम भी हैं। हालांकि कई तो अब इस दुनिया में नहीं रहे हैं। इतना तो तय है कि उस देश में तेजी से सुर्खियों में छाता जा रहा यह प्रकरण वहां के राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में चल रही गड़बड़ियों की ओर ध्यान खींचता है। अगर माधव कुमार नेपाल दोषी साबित हुए तो यह उस देश में अभूतपूर्व घटना होगी, क्योंकि नेपाल में भ्रष्टाचार विरोधी मामलों के अभी तक किसी पूर्व प्रधानमंत्री का नाम नहीं आया था। लेकिन अगर पूर्व प्रधानमंत्री बेकसूर साबित हुए तो बेशक यह प्रकरण राजनीतिक रस्साकशी की मिसाल के तौर पर याद किया जाएगा। न्यायालय इस प्रकरण में सुनवाई कर रहा है। संभव है, जल्दी ही इसमें कोई फैसला सामने आए।

Topics: kathmanduपतंजलि योगपीठcorruption chargesmadhav nepalमाधव नेपालpatanjali yog peethland dealभ्रष्टाचार
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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