अटलांटिस से ड्रैगन तक: सुनीता की अंतरिक्ष विजय
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अटलांटिस से ड्रैगन तक: सुनीता की अंतरिक्ष विजय

अंतरिक्ष में कुल 286 दिन बिताने के बाद आखिरकार भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर धरती पर वापस लौट आए हैं

Written byयोगेश कुमार गोयलयोगेश कुमार गोयल
Mar 19, 2025, 09:06 am IST
in विज्ञान और तकनीक

अंतरिक्ष में कुल 286 दिन बिताने के बाद आखिरकार भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर धरती पर वापस लौट आए हैं। हालांकि सुनीता और बुच की वापसी 16 मार्च को होनी थी लेकिन उड़ान से चंद मिनट पहले ही 12 मार्च को ड्रैगन यान के रॉकेट में खराबी आ जाने के कारण नासा को ऐन वक्त पर उड़ान टालनी पड़ी थी। उस समय नासा ने बताया था कि अंतरिक्ष यान में लगे रॉकेट के ग्राउंड सपोर्ट क्लैम्प आर्म के हाइड्रोलिक सिस्टम में खराबी आ गई थी।

आखिरकार नासा ने 14 मार्च को ड्रैगन को लांच किया, जो सफलतापूर्वक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) के साथ डॉक कराया गया और उसके बाद 18 मार्च को सुबह 10ः35 बजे स्पेसएक्स ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट को आईएसएस से सफलतापूर्वक अनडॉक करते हुए सुनीता और बुच की धरती की तरफ 17 घंटे की यात्रा शुरू हुई। आखिरकार बेहद लंबे इंतजार के बाद दोनों अंतरिक्ष यात्री सुनीता और बुच भारतीय समयानुसार 19 मार्च की सुबह पृथ्वी पर लौट आए। इसी के साथ ही सुनीता विलियम्स अंतरिक्ष की किसी एक यात्रा में सबसे ज्यादा दिन आईएसएस पर बिताने वाली तीसरी महिला वैज्ञानिक बन गई हैं। उनसे पहले क्रिस्टीना कोच 328 दिन और पिग्गी वीटस्न 289 दिन आईएसएस पर बिता चुकी हैं। वैसे पुरूष अंतरिक्ष यात्री फ्रैंक रूबियो ने आईएसएस में एक बार में सबसे ज्यादा 371 दिन बिताए हैं।

सुनीता विलियम्स अपने सहयोगी अंतरिक्ष यात्री बुच विल्मोर के साथ 5 जून 2024 को फ्लोरिडा के केप कैनावेरल स्पेस फोर्स स्टेशन से बोइंग द्वारा निर्मित ‘स्टारलाइनर’ स्पेस क्रॉफ्ट के जरिये आईएसएस की ओर रवाना हुई थी, जो लांचिंग के करीब 26 घंटे बाद 6 जून को आईएसएस के साथ जुड़ा था। उसी के साथ वह एक नए चालक दल वाले अंतरिक्ष यान का संचालन और परीक्षण करने वाली पहली महिला बन गई थीं। नासा द्वारा उनका मिशन केवल आठ दिनों का निर्धारित किया गया था यानी आईएसएस पर 8 दिन रूककर दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को धरती पर वापस लौटना था लेकिन स्टारलाइनर में खराबी आने के कारण उनकी वापसी ऐसी अटकी कि वह अटकते-अटकते 9 महीने से भी ज्यादा लंबी हो गई। 5 जून को पृथ्वी से रवाना हुआ स्टारलाइनर उड़ान के दौरान जब आईएसएस के करीब पहुंचा था, तभी उसमें समस्याएं पैदा हो गई थी। चूंकि अंतरिक्ष में वैक्यूम होता है, ऐसे में थ्रस्टर्स अंतरिक्ष यान को दिशा देने का काम करते हैं और स्टारलाइनर के पांच थ्रस्टर्स बंद हो गए थे।

इसके अलावा यान का हीलियम भी लगातार लीक हो रहा था। स्टारलाइनर में खराबी का सिलसिला लगातार बढ़ता गया और अगले कुछ महीनों में उसमें तकनीकी खामियां इतनी बढ़ गई थी कि उन गड़बड़ियों के चलते अंतरिक्ष यात्रियों को उसके जरिये वापस लाना असंभव हो गया था। दरअसल स्टारलाइनर से लगातार लीक हो रही हीलियम के अलावा उसमें ऐसी तकनीकी समस्याएं भी उत्पन्न हो गई थी, जिनके चलते उसका वायुमंडल में प्रवेश करना बेहद खतरनाक हो सकता था। यही कारण रहा कि उस दौरान दोनों अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी की योजना अटक गई थी और काफी समय बीत जाने के बाद नासा ने सुनीता और बुच की वापसी के लिए स्टाइरलाइनर के विकल्प पर काम शुरू किया। आखिरकार नासा द्वारा यह अंतिम निर्णय लिया गया कि नासा सुनीता और बुच को वापस लाने के लिए एलन मस्क की कंपनी स्पेस एक्स का इस्तेमाल करेगी।

वैसे सुनीता के लिए यह पहला ऐसा अवसर नहीं है, जब वह इस प्रकार लंबी अवधि के लिए आईएसएस पर अटकी हों बल्कि उनकी निर्धारित की गई वापसी पहली अंतरिक्ष यात्रा के दौरान भी अटक गई थी, तब भी वह छह महीने से भी ज्यादा समय तक आईएसएस पर रही थी। उल्लेखनीय है कि तब नासा आईएसएस की यात्रा के लिए ‘अटलांटिस’ नामक अंतरिक्ष यान का इस्तेमाल कर रहा था और कैनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरने के बाद ‘अटलांटिस’ के बाहरी सुरक्षा कवच में दरार आ गई थी। यही नहीं, उसके बाद अंतरिक्ष केंद्र के कंप्यूटरों में भी खराबी आ गई थी। उस दौरान आईएसएस पर सोलर पैनलों की चार बार मरम्मत करने की कोशिश हुई। उन सभी तकनीकी खामियों को ठीक करने के बाद ही नासा सुनीता विलियम्स को अटलांटिस के ही जरिये वापस लाने में सफल हुआ था और अब एक बार फिर 9 महीने से ज्यादा लंबी अवधि के बाद ही सही, सुनीता की धरती पर वापसी के साथ ही पूरी दुनिया में जश्न का माहौल है।
अंतरिक्ष में रहते हुए सुनीता कई महत्वपूर्ण रिकार्ड भी बना चुकी हैं।

सुनीता की इस बार आईएसएस की यह तीसरी यात्रा थी और इस यात्रा के दौरान उन्होंने कुल 11 घंटे 26 मिनट का स्पेस वॉक भी किया, 16 जनवरी 2025 को 6 घंटे और 30 जनवरी 2025 को 5 घंटे 26 मिनट। इससे पहले उन्होंने 2006-2007 और 2012 में आईएसएस पर अपने मिशन के दौरान एक महिला द्वारा सबसे अधिक सात स्पेस वॉक और 50 घंटे 40 मिनट स्पेस वॉक टाइम का रिकॉर्ड बनाया था। 2006-07 में 4 बार में सुनीता ने कुल 29 घंटे 17 मिनट और 2012 में तीन बार में कुल 21 घंटे 23 मिनट स्पेस वॉक की थी। उन्होंने 16 दिसंबर 2006 को 7 घंटे 31 मिनट, 31 जनवरी 2007 को 7 घंटे 55 मिनट, 4 फरवरी 2007 को 7 घंटे 11 मिनट, 8 फरवरी 2007 को 6 घंटे 40 मिनट, 30 अगस्त 2012 को 8 घंटे 17 मिनट, 5 सितंबर 2012 को 6 घंटे 28 मिनट और 1 नवंबर 2012 को 6 घंटे 38 मिनट स्पेस वॉक की थी। 2012 में वह आईएसएस की दूसरी यात्रा के दौरान अंतरिक्ष में ट्रायथलॉन पूरा करने वाली पहली महिला बनी थी। उस दौरान उन्होंने भारोत्तोलन मशीन का उपयोग करके वहां तैराकी का अनुकरण किया था और हार्नेस से बंधे हुए ट्रेडमिल पर भी दौड़ी थी। अपने पिछले मिशन के दौरान वह भगवान गणेश की मूर्ति और भगवद् गीता को भी अंतरिक्ष में ले गई थी।

सुनीता का पहला अंतरिक्ष मिशन 9 दिसम्बर 2006 को शुरू हुआ था, जब नासा ने एसटीएस-116 के चालक दल के साथ अपना अंतरिक्ष यान छोड़ा था, जो 11 दिसंबर 2006 को आईएसएस से जुड़ा था। सुनीता ने उस मिशन में चालक दल के सदस्य के रूप में फ्लाइट इंजीनियर के रूप में कार्य किया था। अंतरिक्ष यान में सवार होने के दौरान उन्होंने 29 घंटे और 17 मिनट की अतिरिक्त सक्रियता के साथ चार अंतरिक्ष चहलकदमी करके महिलाओं के लिए विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया था, जिसे 2008 में अंतरिक्ष यात्री पैगी व्हिटसन ने कुल पांच अंतरिक्ष चहलकदमी करके तोड़ा था। अपने पहले अंतरिक्ष मिशन में चालक दल के सदस्य के रूप में अपना कर्त्तव्य पूरा कर वह 22 जून 2007 को कैलिफोर्निया के एडवर्ड्स एयरफोर्स बेस पर उतरने के लिए एसटीएस-117 चालक दल के साथ पृथ्वी पर लौट आई थी।

सुनीता का दूसरा अंतरिक्ष मिशन 14 जुलाई 2012 को शुरू हुआ था और उनका यान 17 जुलाई 2012 को अईएसएस से जुड़ा था। दूसरे अंतरिक्ष मिशन के दौरान उन्होंने परिक्रमा करने वाली प्रयोगशाला में अनुसंधान और अन्वेषण में करीब चार महीने बिताए थे और अंतरिक्ष में कुल 127 दिन बिताने के बाद वह 18 नवंबर 2012 को कजाकिस्तान में वापस उतरी थी। अपनी दूसरी पारी में वह आईएसएस में 195 दिनों तक रही थी और उसी के साथ उन्होंने इतने लंबे समय तक आईएसएस पर रहने का रिकॉर्ड बनाया था। उनसे पहले वह रिकॉर्ड शैनौन ल्यूसिड के नाम दर्ज था, जिन्होंने आईएसएस में 188 दिन 4 घंटे बिताए थे। अपने पहले और दूसरे अंतरिक्ष मिशन में सुनीता कुल 321 दिन 17 घंटे और 15 मिनट तक अंतरिक्ष में रही थी। उन्होंने न केवल अंतरिक्ष में सबसे लंबे समय तक रूकने का रिकॉर्ड बनाया था बल्कि 50 घंटे से भी ज्यादा समय तक स्पेस वॉक करने का भी रिकॉर्ड बनाया था। बहरहाल, अपने तीसरे अंतरिक्ष मिशन के दौरान भले ही सुनीता की पृथ्वी पर वापसी को लेकर निरंतर अनिश्चितताएं बनी रही हों, इस यात्रा के दौरान भी उनके नाम कई नई उपलब्धियां दर्ज हुई हैं।

Topics: ड्रैगननासाअंतरिक्ष यात्रीभारतीय मूलअंतरिक्ष मिशनसुनीता विलियम्मसअटलांटिस
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