नागा संतों के द्वारा निकाली शोभायात्रा
वाराणसी। दुनिया के सबसे बड़े आयोजन महाकुंभ के आखिरी दिन महाशिवरात्रि पर हजारों नागा साधु, संन्यासियों ने बाबा विश्वनाथ का दर्शन पूजन किया। हाथी–घोड़े पर सवार, हाथों में गदा और त्रिशूल, शरीर पर भस्म लगाए नागा साधुओं की अलौकिक छटा ने सभी सनातनियों का मन मोह लिया। काशी में सात अखाड़ों के नागा साधुओं, संन्यासियों के दर्शन पूजन का क्रम चल रहा है। सबसे पहले जूना अखाड़े के नागा सन्यासी और महामंडलेश्वर बाबा के दरबार पहुंचे। कई किलोमीटर तक के भव्य दिव्य यात्रा के दौरान हर हर महादेव के उद्घोष ने सभी सनातनियों, दर्शनार्थियों में अदृश्य ऊर्जा का संचार किया।
मंगला आरती के बाद बाबा का दूल्हे की तरह श्रृंगार किया गया। विश्वकल्याण की कामना से बाबा की मध्यरात्रि में महाआरती भी कराई जाएगी। बाबा विश्वनाथ के अर्धनारीश्वर स्वरूप के चार प्रहर की महाआरती देश एवं विश्वकल्याण के लिए ही होगी। काशी में आज सुबह से ही महाकुंभ सा दृश्य देखने को मिल रहा है।
महापर्व महाशिवरात्रि के लिए श्री काशी विश्वनाथ धाम रंग-बिरंगी लाइटों से चमक और विभिन्न प्रकार के सुगंधित पुष्पों से सुगंधित हो रहा है। श्री काशी विश्वनाथ धाम के द्वार से लेकर सभी मंडपों, विग्रहों के मंदिरों की फूलों से आकर्षक सजावट की गई है। धाम का कोना-कोना विद्युत झालरों और रंग-बिरंगी लाइटों से जगमग है। गेट नंबर- 4 से लेकर गंगा द्वार तक की गई मनभावन सजावट को देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो रहे हैं। 25 फरवरी से 27 फरवरी तक श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में सभी तरह के प्रोटोकॉल पर रोक लगाई गई है। धाम में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बैरिकेडिंग, शुद्ध पेयजल और स्वच्छता समेत सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं।
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