कानपुर के बाद अजमेर में रेल को बेपटरी करने का दुस्साहस!!
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कानपुर के बाद अजमेर में रेल को बेपटरी करने का दुस्साहस!!

Written byPanchjanyaPanchjanya
Sep 10, 2024, 02:52 pm IST
in राजस्थान
पटरी पर रखी लगभग 100 किलो वजन की सीमेंट कंक्रीट की शिला जिससे मालगाड़ी का इंजन टकराया था

पटरी पर रखी लगभग 100 किलो वजन की सीमेंट कंक्रीट की शिला जिससे मालगाड़ी का इंजन टकराया था

आज तड़के अजमेर से अमदाबाद जा रही मालगाड़ी का इंजन पटरी पर रखे लगभग 100 किलो के सीमेंट कंक्रीट की शिला से टकरा गया। चालक द्वारा आपातकालीन ब्रेक का प्रयोग करने से बड़ी दुर्घटना होने से बच गई।

—श्रीरंग वासुदेव पेंढारकर

शेक्सपियर ने अपने कालजयी नाटक ‘हैमलेट’ में एक संवाद के माध्यम से कहा है “though this be madness, there is method in it” (भले ही यह पागलपन दिख रहा हो, इसके पीछे कोई व्यवस्था / विधि है..) जब कोई ऐसी घटना, जो अपने आप में किसी व्यक्ति का पागलपन नजर आती हो, बार—बार घटित होने लगे तब हम यह सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि कहीं इसके पीछे कोई ठोस व्यवस्था तो काम नहीं कर रही है?

विगत दिनों में भारतीय रेल की पटरियों पर दुर्घटना बढ़ाने के प्रयास नजर आ रहे हैं। प्रारम्भ में इसे किसी व्यक्ति की मूर्खता का परिणाम माना गया। परन्तु जब यह घटना अलग—अलग स्थानों पर घटित होने लगी तो यह सोचना लाजमी हो रहा है कि इसे एक सुव्यवस्थित प्रयास के रूप में देखा जाए, जिसके माध्यम से देश में रेल दुर्घटनाओं में वृद्धि हो, आम जनता में खौफ फैले और देश में अराजकता का माहौल बने। इस संदर्भ में हाल में घटी कुछ घटनाओं को जानना जरूरी होगा –

—10 सितंबर को सुबह तड़के अजमेर से अमदाबाद जा रही मालगाड़ी का इंजन पटरी पर रखे लगभग 100 किलो के सीमेंट कंक्रीट की शिला से टकरा गया। चालक द्वारा आपातकालीन ब्रेक का प्रयोग करने से बड़ी दुर्घटना होने से बच गई।
—8 सितंबर को प्रयागराज से हिसार जा रही कालिंदी एक्सप्रेस का इंजन, कानपुर के नजदीक ट्रेन की पटरी पर रखे गैस सिलेंडर से टकरा गया। सौभाग्य से ट्रेन पटरी से नीचे नहीं उतरी और एक बड़ा हादसा होने से बच गया। पटरी के पास पेट्रोल से भरी बोतल और अन्य संदिग्ध सामग्री पाई गई।
—29 अगस्त की रात राजस्थान के बारां जिले में रेलवे पटरी पर एक मोटरसाइकिल के हिस्से डाल कर दुर्घटना की संभावनाएं निर्मित की गईं। एक बार पुनः वहां से गुजरने वाली मालगाड़ी के चालक की सजगता और कुशलता से एक बड़ा हादसा टल गया।
—24 अगस्त को फर्रुखाबाद में लोको चालक की चतुराई की वजह से एक बड़ी दुर्घटना टल गई। किसी अज्ञात व्यक्ति ने पटरी पर लकड़ी का बड़ा सा कुन्दा लाकर रख दिया था। पटरी और आसपास दिख रहे चिन्हों से स्पष्ट हो रहा था कि किसी ने जानबूझ कर यह लगभग 30 किलो वजन का लकड़ी का कुंदा पटरी पर रखा था।
—23 अगस्त को राजस्थान के पाली जिले में जोधपुर की ओर जा रही वन्दे भारत ट्रेन की पटरी पर रखे सीमेंट के बड़े टुकड़े से टक्कर हो गई। ट्रेन में उस समय 375 सवारियां सवार थीं। रेलवे कर्मचारियों की सजगता से बड़ी दुर्घटना तो टल गई पर ट्रेन को कुछ नुकसान जरूर उठाना पड़ा।
—20 अगस्त को नैनपुर-जबलपुर एक्सप्रेस का इंजन, पटरी पर रखे गए लोहे के सरिए से टकरा गया। सौभाग्य से इस टक्कर की वजह से इंजन पटरी से नीचे नहीं उतरा। रेलवे अधिकारियों ने पटरी से 15 फीट लंबाई के लोहे के तीन सरिए बरामद किए हैं। षड्यंत्र की संभावनाओं की जांच प्रारंभ कर दी गई है।
—16-17 अगस्त की रात साबरमती एक्सप्रेस के डिब्बे, कानपुर से मुश्किल से 10 किमी आगे चलने पर, पटरी से उतर गए। घटना के समय ट्रेन में 1700 यात्री सवार थे। चालक की सूझबूझ की वजह से बड़ी दुर्घटना टल गई। किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा पटरी पर करीब तीन फीट लंबा पुराना जंग लगा पटरी का टुकड़ा आड़ा रखकर ट्रेन को पटरी से उतारने का षड्यंत्र रचा प्रतीत हो रहा था। पटरी पर हथौड़े की चोट के ताजा निशान भी नजर आ रहे थे। जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

फेहरिस्त लंबी है। यह सिलसिला एक तरह से गत वर्ष ही शुरू हो गया था जब ओडिशा के बालासोर जिले में तीन ट्रेनों की दुर्घटना में लगभग 300 लोगों की मृत्यु हो गई थी, वहीं हजार से भी अधिक घायल हुए थे। रेलवे ने इस दुर्घटना के पीछे साजिश होने की संभावना जताते हुए मामला सीबीआई को सौंप दिया था। सीबीआई ने मामले में गिरफ्तारियां भी की थीं। हाल की घटनाओं के संदर्भ में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा साजिश के तहत रेल दुर्घटनाओं की परिस्थितियां पैदा किए जाने पर गहरी चिन्ता प्रकट करते हुए कहा कि यह अत्यन्त गम्भीर मसला है। उपद्रव फैलाने के प्रयास नजर आ रहे हैं जिसकी सघन जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

सरकार की जांच अभी जारी है, परन्तु रेलवे एक ऐसी संस्था है जिससे देश की जनता के सारे वर्ग सीधे जुड़े रहते हैं। स्वाभाविक ही है कि ठोस तथ्यों और जानकारियों के अभाव में सोशल मीडिया पर इस सम्बंध में अनेक कयास लगाए जा रहे हैं। शुरुआत में इसे विपक्षी दलों द्वारा की जा रही निम्नस्तरीय राजनीति के रूप में देखा गया। यह एक विडंबना ही है कि विपक्ष ने गत कुछ वर्षों में अपनी छवि को इतना हल्का बना लिया है कि आम जनता अब उसकी ओर से देश विरोधी और समाज विरोधी राजनीति की संभावना से भी इंकार नहीं करती है। जनता यह देख रही है कि मोदी सरकार आर्थिक, विदेश नीति, रक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, आधारभूत संरचना, बैंकिंग व्यवस्था आदि सभी क्षेत्रों में असामान्य गति, सदिच्छा और समर्पण के साथ सतत कार्य कर रही है। और यह कि लगातार तीसरी बार मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने और दस वर्षों में भी सरकार को किसी भी बड़े मुद्दे पर घेर पाने में असफल होने की वजह से विपक्ष में हताशा का माहौल है। इसी हताशा के चलते विपक्ष, संसद और संसद से बाहर, सरकार के साथ शत्रु भाव से पेश आते हुए अनुचित और अस्वीकार्य तरीकों से विरोध करने में जुटा हुआ है।

इसी बीच पाकिस्तान में बसे एक कथित आतंकवादी फरहतुल्लाह गोरी का टेलीग्राम पर एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें वह भारत में स्थित अपने समर्थकों को रेलवे व्यवस्था को छिन्न भिन्न कर माल परिवहन व्यवस्था को ध्वस्त कर देने का आग्रह कर रहा है। गोरी कहता है कि उनकी पेट्रोल पाइपलाइन को निशाना बनाइए, उनकी परिवहन व्यवस्था और रेलों को बाधित कीजिए जिससे की भारत में अव्यवस्था और अराजकता फैल जाए। गोरी को 2020 में गृह मंत्रालय द्वारा आतंकवादी घोषित किया गया था। हाल में भारत में रिजवान नामक एक व्यक्ति पकड़ा गया है जिसके बारे में बताया गया है कि गोरी ही उसे संचालित कर रहा था। गोरी के तार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े होने की जानकारी भी दी गई है। गोरी के रेल परिवहन को निशाना बनाने के बयान ने हाल में हुई घटनाओं को एक अलग ही आयाम प्रदान कर दिया है।

यह सत्य है कि जब तक जांच पूर्ण होकर इन घटनाओं के सम्बंध में कोई स्पष्टता नहीं आती तब तक इस सम्बंध में कयास ही लगते रहेंगे। परन्तु यह भी उतना ही सत्य है कि एक के बाद एक लगातार रेल दुर्घटनाओं के लिए परिस्थितियां निर्मित करने के जो प्रयास हो रहे हैं, वे आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से अत्यन्त गम्भीर मामले हैं। भारत में रेल मार्गों की कुल लम्बाई 130000 किमी से भी अधिक है। ये रेल पटरियां जंगलों, दुर्गम पहाड़ों, भीषण बीहड़ों और घनी बस्तियों में से गुजरती हैं। इस विशाल लंबाई की पटरियों की 24×7 निगरानी रखना अत्यंत दुष्कर कार्य है। यदि इन्हें निशाना बनाया गया तो इसके परिणाम अत्यन्त भीषण और विध्वंसात्मक हो सकते है। दस वर्ष में रेलवे की सेवाओं, खास तौर पर माल ढोने की क्षमताओं और अन्य बुनियादी सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार हुए हैं। ऐसे में यदि दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ती है तो व्यापारिक गतिविधियां तो प्रभावित होंगी ही, बड़ी संख्या में जनहानि भी संभावित रहेगी जिससे अस्थिरता का माहौल बनेगा। उम्मीद है कि सरकार इन घटनाओं को गंभीरता से लेकर जांच की कार्रवाई को शीघ्रता से पूर्ण करने पर जोर देगी और आवश्यक उपाय करने हेतु ठोस कदम भी उठाएगी।

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