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मध्य प्रदेश के रतलाम में अवैध मदरसे का तीन दिन में बदल गया रूप, चार और मदरसों को बंद करने की दी गई थी रिपोर्ट

31 जुलाई को 'दारुल उलूम आयशा सिद्धीका लिलबिनात' बच्‍च‍ियों के मदरसा में राज्‍य बाल संरक्षण आयोग ने छापा मारा था।

Written byडाॅ. मयंक चतुर्वेदीडाॅ. मयंक चतुर्वेदी
Aug 4, 2024, 12:08 pm IST
in मध्य प्रदेश
Madhya Pradesh Ratlam Illegal madarsa

मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में अवैध रूप से संचालित हो रहे बालिकाओं के मदरसा पर जब ‘राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग’ ने छापा मारा तो अनेक गड़बड़ियां सामने आईं। इसे संज्ञान में लेकर जहां आयोग ने तल्‍ख टिप्पणियां की वहीं अब शासन को अपना प्रतिवेदन भेजकर इस मदरसे पर कठोर कार्रवाई करवाने की अनुशंसा भेजने की तैयारी कर रहा है। बताया जा रहा है कि मदरसा संचालक स्थानीय स्तर पर मामले को खुदबुर्द करने में जुटा है। प्रशासन को भी भ्रमित करने का कार्य किया जा रहा है।  31 जुलाई को ‘दारुल उलूम आयशा सिद्धीका लिलबिनात’ बच्‍च‍ियों के मदरसा में राज्‍य बाल संरक्षण आयोग ने छापा मारा था।

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दरअसल, अवैध रूप से संचालित इस मदरसा संचालक द्वारा अब यह बताने का प्रयास किया जा रहा है कि उनकी कोई गलती नहीं है। संचालन कर्ता ने मप्र बाल संरक्षण आयोग की कार्रवाई को ही गलत ठहराने का प्रयास किया। मदरसा संचालक ने जिस कमरे को बालिकाओं का विश्राम कक्ष बनाया था और जहां आयोग को जांच के दौरान अनेक खामियां मिली थीं, अब वहां शानदार कालीन बिछा दी गई है, जिसे देखकर प्रशासन को लगे कि यहां सभी कुछ बेहतर है। आयोग ने यहां पर अन्‍य कई कमियां पकड़ी थीं, भोजनालय से लेकर शौचालय, बच्‍च‍ियों के रुकने के कक्ष सभी बहुत खराब हालत में पाए गए थे।

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शासन के सामने छह माह पूर्व ही इस मदरसा की कमियां आ गईं थीं सामने

मदरसा संचालन समिति के अध्यक्ष मोहम्मद आसिफ का कहना है कि मदरसा बोर्ड का पोर्टल बंद है, इसलिए वे मान्‍यता के लिए आवेदन नहीं कर पाए। उसकी नई कमेटी छह माह पूर्व बनी है। जो कमियां सामने आती जाएंगी उन्‍हें सुधारते जाएंगे। जबकि दारुल उलूम आयशा सीद्दीका तिलबिनात मदरसा संचालन समिति को लेकर यहां बड़ा सवाल यह है कि रतलाम शहर में कई सालों से मदरसा संचालित कर रही ये समिति अब तक ‘मप्र मदरसा बोर्ड’ मान्‍यता लेने के लिए क्‍यों नहीं गई?

वहीं, दस्‍तावेज बता रहे हैं कि आज से छह माह पूर्व ही जिम्‍मेदार अधिकारियों की बनाई गई एक जांच समिति ने इस मदरसे को लेकर की गई अपनी कठोर टिप्‍पणी में साफ तौर पर लिख दिया था कि ‘‘मदरसा में 150 बालिकाएं हैं जिन्हें सामान्य शिक्षा नहीं मिल पा रही है। मदरसे में कोई रिकार्ड या दस्तावेज उपलब्ध नहीं था।’’ शासन के सामने छह माह पूर्व ही इस मदरसा की कमियां सामने आई थीं।

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साशन की जांच रिपोर्ट में लिखा है कि ‘उक्त मदरसा का निरीक्षण के दौरान समिति द्वारा यह पाया गया कि एज्यूकेशन सोसायटी का पंजीयन वर्ष 2012 के बाद से आज दिनांक तक नहीं है। मदरसा में कुल 230 बालिकाए हैं जो कक्षा 01 से 08 तक की शिक्षा ले रही हैं। मदरसा में बाउण्ड्रीवाल है जो काफी बड़ा है, लेकिन बालिकाओं को मैदान में खेल गतिविधियों जैसे संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। अन्य संसाधन जिससे पढ़ाई के साथ-साथ बालिकाओं को खेल का ज्ञान भी प्राप्त हो सकें। मदरसा किशोर न्याय अधिनियम के तहत आवश्‍यक नियमों को पूरा नहीं करता है।

बताया गया था समाज और देश हित के विरोध में

इसमें आगे लिखा गया, ‘‘बालिकाओं को पढ़ाने वाली कोई महिला शिक्षका एवं केअर टेकर भी यहां नहीं है। उक्त मदरसा में रतलाम के साथ-साथ अन्य क्षेत्र-गांव की भी बालिकाएं हैं, जैसे राजस्थान, झाबुआ, मंदसौर, उज्जैन आदि। बाहर से आनेवाली बालिकाओं के दस्तावेज उपलब्ध नही हैं। संस्था में कार्यरत कर्मचारियों का कोई दस्तावेज अथवा पुलिस वेरिफिकेशन उपलब्ध नहीं करवायें गये। यह मदरसा बिना किसी मान्यता के निजी तौर पर संचालित किया जा रहा है. जो समाज एवं देशहित में नहीं है। अतः उक्त मदरसे को तत्काल बंद कर देना चाहिए।’’

यह जांच किशोर न्याय अधिनियम के तहत अपंजीकृत कुल 05 संस्थाओं की जोकि रतलाम शहर में हैं। इनका सर्वे दिनांक 23 जनवरी 2024 को गठित समिति जिसमें कि प्रमुख तौर पर पांच अधिकारी रखे गए थे ने किया था। (सभी की सुरक्षा एवं गोपनीयता की दृष्‍टि से उनके नाम यहां नहीं दिए जा रहे हैं) और इस समिति ने अपनी रिपोर्ट दिनांक 01 फरवरी 2024 को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्‍व) रतलाम शहर, जिला रतलाम को सौंपी थी। यहां जिला रतलाम से जुड़ी बड़ी बात यह भी है कि इस समिति ने तो अपना काम पूरी ईमारदारी से किया और सिर्फ इस ‘दारुल उलूम आयशा सीद्दीका तिलबिनात मदरसा’ को ही बंद करने के लिए नहीं लिखा था बल्‍कि इसके अलावा रतलाम के अन्‍य चार मदरसों को भी बंद करने के लिए इस समिति ने अपना निर्णय दिया था।  ये मदरसे हैं –

1. ‘दारूल उलूम एहले सुन्नत रसाएमुस्तफा, मदरसा, शैरानीपुरा कब्रिस्तान के सामने’

इसके लिए तत्‍कालीन जांच समिति की रिपोर्ट में लिखा गया कि ‘‘उक्त मदरसा की म०प्र० मदरसा बोर्ड से 05-07-2023 से 04-07-2026 तक मान्यता का प्रमाण पत्र है। मदसरे का पंजीयन किशोर न्याय अधिनियम के तहत पंजीकरण नहीं है। किशोर न्याय अधिनियम के तहत मदरसे की अधोसंरचना नहीं है। मदरसे के शिक्षक और कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन नहीं है। मदरसे में बच्चों को मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं है। मदरसें में 65 बच्चे आवासरत् हैं, केवल 4 कक्षों में वहीं पर सोना, खाना, रहना और मदरसें की शिक्षा प्राप्त करना सभी कार्य इन 4 कक्षों में संपन्न कराये जा रहे हैं।

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बच्चों के खेलने का मैदान और खेल उपकरण उपलब्ध नहीं हैं। स्नान और शौचालयों की भी समुचित व्यवस्था नहीं हैं। सभी बच्चों को स्वच्छ वातावरण नहीं मिल पा रहा है। पूरा भवन अस्त-व्यस्त और अव्यवस्थाओं से भरा पड़ा है, बच्चों का मदरसे में रिकार्ड भी नहीं है, बच्चे सामान्य एवं व्यवहारिक शिक्षा से वंचित हैं।  मदरसे के बच्चे भविष्य में स्वस्थ्य समाज और देश के प्रति समर्पित हों ऐसा एक भी कारण मदरसे के निरीक्षण में नहीं मिला। सभी कर्मचारी और मदरसा स्थानीय तो ठीक प्रदेश के बाहर अन्य प्रदेशों से भी कार्य कर रहे हैं। अतः मदरसा बंद करना समाज, शहर और देश के हित में होगा।’’

2. ‘दारूल उलूम अरबिया शैरानीया, कृषि मंडी के आगे रतलाम’

‘‘उक्त मदरसा का निरीक्षण के दौरान मदरसा संचालन समिति के सदस्य द्वारा बताया गया कि मदरसे में 165 के लगभग बालक दीनी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, और मदरसा वर्ष 2007-08 से संचालित है। म०प्र० मदरसा बोर्ड का पंजीयन नहीं है, केवल वर्तमान में जिला पंचायत कार्यालय का एक प्रमाण-पत्र दारूल उलूम अरबिया शैरानीया मेमोरियम सामाजिक कल्याण समिति सोसायटी का है, जो 39 पटेल बावडी काजीपुरा के नाम से 26 जून 2023 को पंजीयन पहली बार करवाया और उसी नाम से मदरसा संचालित कर रहे हैं। इसका किशोर न्याय अधिनियम की धारा 41 में पंजीयन नहीं है।

किशोर न्याय अधिनियम के अन्तर्गत संस्था की अधोसंरचना नहीं है। संस्था के किसी भी कर्मचारी या शिक्षक का पुलिस सत्यापन नहीं है । यहां कार्यरत कर्मचारी/शिक्षक एवं निवासरत बालकों की जानकारी संबंधी कोई रिकार्ड संधारित नहीं था। मदरसा के बालक को स्कूल शिक्षा, सामान्य शिक्षा, व्यवहारिक शिक्षा का ज्ञान नहीं मिल पा रहा है, जो आगे चलकर स्वस्थ्य समाज और देश में अपना योजदान दे सकें। मदरसे में 165 बालक के लिये 8 कमरों की व्यवस्था है। इन्ही में इनका आवास एवं दीनी शिक्षा का संचालन हो रहा है।

स्नान, शौचालय एवं भोजन के लिये बहुत कम जगह में सभी बालक अपना नियत कार्य करते हैं। मदरसे में जगह तो बहुत घेर रखी है पर मैदान रिक्त पड़ा है, बच्चों के खेलने की सुविधा नहीं है। मदरसे के सभी कर्मचारी एवं शिक्षक सभी अन्य प्रदेशों के हैं, स्थानीय केवल संचालन समिति है । मदरसे में बच्चे भी प्रदेश के अन्य जिलों के साथ-साथ अन्य प्रदेश से भी हैं, जो 05-06 वर्ष से 20-22 वर्ष तक के हैं। इनको मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ शिक्षा भी उपलब्ध नहीं हो रही है और यह मदरसा बिना किसी मान्यता के बरसों से निजी तौर पर संचालित किया जा रहा है, जो समाज एवं देशहित में नहीं है। अतः उक्त मदरसे को तत्काल बंद कर देना चाहिए।’’

3. ‘दारूल उलूम गुल्शने – ए – फातिमा’

‘‘उक्त मदरसा का किसी भी सोसायटी या शासकीय संस्था से पंजीयन नहीं है, किशोर न्याय अधिनियम की धारा 41 में भी पंजीयन नहीं है। किशोर अधिनियम के तहत अधोसंरचना नहीं हैं। मदसरे के कर्मचारी एवं दैनिक शिक्षकों का पुलिस सत्यापन नहीं है। मदसरे मे कुल 54 बालिका बताई गईं, मदरसे में इन बालिकाओं की जानकारी संबंधित रिकार्ड उपलब्ध नहीं था। जिससे बालिकाओं की संख्या की पुष्टि की जा सके एवं यह किस स्थान से हैं, कहां से, परिवार से आकर यहाँ निवास कर रही हैं, यह जाना जा सके।

इसी तरह संस्था में कार्यरत कर्मचारी / शिक्षक की जानकारी संबंधी भी कोई रिकार्ड संस्था द्वारा संधारित नहीं किया गया है। मदसरे में बालिकाओं को मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं है। खेल का मैदान एवं अन्य कोई खेल संबंधी सुविधा उपलब्ध नहीं है। बालिकाओं से मिलने पर बालिका डरी सहमी हुईं थीं एवं बालिकाओं के कमरों का निरीक्षण करने पर जिस कमरे में बालिकाएं थीं, वह एकदम साधारण सुविधा वाला था, किन्तु उसके पास ही एक कक्ष सर्व सुविधा युक्त जिससे मदरसे में गलत एवं अन्य संदिग्ध गतिविधियों का संचालन होना प्रतीत होता है। मदरसा संचालक का परिवार भी वहीं निवास करता है एवं उनके परिवार, उनकी व्यक्तिगत जानकारी चाही गई, किन्तु उनके द्वारा संतोषपूर्वक जवाब नहीं दिया गया। मदरसा पूर्णतः अवैध रूप से संचालित किया जा रहा है। अतः इसे बंद किया जाना उचित होगा।’’

4. ‘गोसे आरूल गरीब नवाज मदरसा बिरीयाखेडी, रतलाम’

‘‘उक्त मदरसा का निरीक्षण के दौरान समिति द्वारा यह पाया गया, मदरसा का किसी भी सोसायटी या शासकीय संस्था से पंजीयन नहीं है। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 41 में भी पंजीयन नहीं है। किशोर अधिनियम के तहत अधोसंरचना नहीं है। मदसरे के कर्मचारी एवं दीनी शिक्षकों का पुलिस सत्यापन नहीं है। मदसरे में उपस्थित कर्मचारी द्वारा 30 – 35 बच्चे अन्य प्रदेश के बताये गये, जो अभी किसी इस्लामी आयोजन में बाहर गये हुये हैं।

निरीक्षण के दौरान मदरसा में एक भी बच्चा उपस्थित नहीं था। सीसीटीवी केमरा भी नहीं है, मदरसे में बच्चो की मूलभूत सुविधाए नहीं है। मदरसा दो कमरों एवं एक हॉल में संचालित हो रहा है, किसी भी बच्चे का रिकार्ड उपलब्ध नहीं है। मदसरे में गलत व अन्य संदिग्ध गतिविधियों का संचालन होना प्रतीत होता है। अतः मदरसा बंद किया जाना अतिआवश्यक है।’’

प्रशासन ने नए सिरे से शुरू की जांच

फिलहाल इस संबंध में प्रशासन ने इस मामले में नए सिरे से जांच शुरू कर दी है। एडीएम डॉ. शालीनी श्रीवास्तव ने भी माना है कि समिति के पास मध्‍यप्रदेश से संबंधि‍त कोई पंजीयन नहीं, जो है वह महाराष्ट्र की संस्था का पंजीयन है। मध्य प्रदेश मदरसा बोर्ड की मान्यता इस मदरसा के पास नहीं मिली है। एडीएम को मप्र बाल संरक्षण आयोग की पूरी रिपोर्ट मिलने का इंतजार है। अभी इस मदरसा में बच्‍च‍ियों के कक्षों से कैमरे हटा लिए गए हैं।

इस पूरे प्रकरण में वहीं, एक बार फिर मप्र बाल संरक्षण आयोग (एससीपीसीआर) सदस्‍य डॉ. निवेदिता शर्मा से बातचीत की गई है, उनका कहना है कि – ‘‘द‍ेखिए; हमने इस मदरसा में पहुंचने पर जो स्‍थ‍िति पाई उसके बारे में पहले ही वहां साथ में मौजूद स्‍थानीय प्रशासनिक अधिकारियों को पता है।  यदि मदरसा संचालक ने वर्षों से इसे चलाने के लिए मान्‍यता ही नहीं ली है और इसके बारे में शासन को किसी भी प्रकार की सूचना देना भी उचित नहीं समझा तो यह कृत्‍य नियमविरुद्ध है। हम अपनी अनुशंसा शीघ्र  ही जिला कलेक्‍टर रतलाम को भेजेंगे। प्रदेश का प्रत्‍येक बच्‍चा जिसकी उम्र 18 साल से एक दिन भी कम है, वे सभी बाल संरक्षण आयोग के संरक्षण के हकदार हैं एवं उसका हित आयोग की जिम्‍मेदारी है।’’

उन्‍होंने कहा, ‘‘ रतलाम में जिस तरह से बालिकाएं इस मदरसा में रहती पाई गईं, कम से कम हम उसे सुविधापूर्ण वातावरण तो नहीं मान सकते हैं। अब यदि जांच के तीन दिन बाद तक के समय में मदरसा संचालकों ने वहां कुछ भी सुधार के दावे किए हैं, तो भी वह एकदम से मान्‍य नहीं किए जा सकते, क्‍योंकि कोई भी व्‍यवस्‍था नियमों से चलती है। नियमानुसार उन्‍हें पहले मदरसा संचालन करने की मान्‍यता शासन से लेनी चाहिए। शासन के तय नियमों का पालन करते हुए वह यदि आगे मदरसा चलाएंगे तो हमें कोई आपत्‍त‍ि नहीं है, लेकिन अभी बिना अनुमति के इस तरह से बच्‍च‍ियों को रखना अवैध है, जिसकी अनुमति कोई भी नहीं दे सकता है।’’

अब देखना यह है कि जिन अवैध मदरसा को लेकर पूर्व में शासन के अधिकारियों की जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट दी थी, उन पर क्या कार्रवाई होगी।

Topics: मध्य प्रदेशमदरसाMadrasaरतलाम न्यूजमध्य प्रदेश एससीपीसीआरMadhya Pradesh SCPCRRatlam NewsMadhya Pradesh
डाॅ. मयंक चतुर्वेदी
डाॅ. मयंक चतुर्वेदी
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और हिंदुस्थान समाचार से संबद्ध हैं। [Read more]
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