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पत्रकार, तकनीकी विशेषज्ञ बन फ्रांस में घुसना चाहते थे इस्लामिक आतंकी, रोक दिए गए 4 हजार से अधिक आवेदन

जिहादी मानसिकता रखनेवाले, गैर इस्‍लामियों से नफरत करने वाले एवं आतंकी संगठनों के कई लोगों ने नाम बदलकर, विद्यार्थी, तकनीशियन तथा पत्रकार बनकर फ्रांस के भीतर घुसने की कोशिश की

Written byडाॅ. मयंक चतुर्वेदीडाॅ. मयंक चतुर्वेदी
Jul 24, 2024, 04:27 pm IST
in विश्व
पेरिस ओलंपिक में दहशत फैलाने की फिराक में थे आतंकी

पेरिस ओलंपिक में दहशत फैलाने की फिराक में थे आतंकी

यह खबर फ्रांस से आई है और पुख्‍ता जानकारी के साथ कि कैसे इस्‍लामिक आतंकवादी संगठन पेरिस ओलंपिक में गड़बड़‍ी करने, हमला करने की मंशा से पत्रकार एवं तकनीकि विशेषज्ञ के नाम पर इस देश में घुसना चाहते हैं, किंतु फ्रांस की सरकार सचेत है। चार हजार से अधिक आवेदन खारिज कर दिए गए हैं। इनमें से कुछ आवेदन इस्लामिक चरमपंथी कनेक्शन और विदेशी जासूस होने के शक के कारण खारिज किए गए हैं। फ्रांस में पेरिस ओलंपिक खेल 26 जुलाई से आरंभ होकर 11 अगस्त 2024 तक होंगे, जिसकी भव्‍य तैयारियां की गई हैं और सीन नदी के किनारे इसका शानदार उद्घाटन समारोह होना है। इसके कवरेज के लिए विश्‍व की दिग्‍गज मीडिया कंपनियां अपने खेल पत्रकारों, समीक्षकों एवं सम्‍पादकों को यहां भेज रही हैं।

दरअसल, गैर इस्‍लामियों से नफरत करनेवाले एवं आतंकी संगठनों के कई लोगों ने नाम बदलकर, विद्यार्थी, तकनीशियन तथा पत्रकार बनकर फ्रांस के भीतर घुसने की कोशिश की। लेकिन फ्रांस की सरकार ने बहुत ही सफलता के साथ इन्हें अपने देश में घुसने से पहले ही रोक दिया।

फ्रांस के कार्यवाहक गृह मंत्री गेराल्ड डार्मैनिन बताते हैं कि इस तरह के लोग फ्रांस में घुसकर कुछ भी गलत करते, जिसे हमने पहले ही रोक लिया। ऐसा करने के पीछे फ्रांस की जासूसी और साइबर हमला की चिंताएं भी हैं। दुनिया भर से फ्रांस आ रहे खेल प्रेमियों एवं खिलाड़‍ियों से लेकर पेरिस ओलंपिक से जुड़े हर व्‍यक्‍ति के लिए यहां एक विशेष प्रकार के क्यूआर कोड वाले पास भी जारी कर दिए गए हैं, जिसे प्रत्‍येक व्यक्ति को हर समय अपने पास रखना होगा। जिनके पास यह नहीं होगा उसे पेरिस ओलंपिक के लिए बनाए गए विशेष क्षेत्र में प्रवेश नहीं मिलेगा।

इस्‍लामी शरणार्थी बने फ्रांस के लिए मुसीबत

इतिहास में देखें तो फ्रांस और इस्‍लामिक आतंकियों का कनेक्‍शन पुराना है, कट्टर इस्‍लामिक लोगों को और जो शरणार्थी हैं, जिन्‍हें फ्रांस की तत्‍कालीन सरकारें समय-समय पर मानवता के नाम पर अपने यहां शरण देती आई हैं, आज इन्‍हीं शरणार्थ‍ियों में से एक बहुत बड़ी संख्‍या फ्रांस के लिए मुसीबत बन गई है । ये सभी फ्रांस जैसे लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था पर विश्‍वास रखनेवाले देश में शरिया लाना चाहते हैं, और शायद यही कारण भी है कि लगातार इस देश में आतंकी घटनाएं हो रही हैं। ये बाहर से आए कट्टरपंथी, स्थानीय मुस्लिमों के साथ मिलकर सामुदायिक भावना गढ़ रहे हैं। हालांकि 2014 के बाद बड़े हमलों के कारण ऑपरेशन सेंटिनेल, आपरेशन विजिलेंट गार्डियन और ब्रसेल्स लाकडाउन चलाए गए, फिर भी फ्रांस में इस्‍लामिक अतिवादियों का आतंक कम नहीं हुआ। आए दिन यहां कोई चाकू और गोली का शिकार हो जाता है। फ्रांस में महिलाएं यौन हिंसा की शिकार बनाई जा रही हैं।

पिछले साल फ्रांस में अल्‍जीरियाई मूल के 17 वर्षीय किशोर नाहेल एम की पेरिस के पास पुलिस के हाथों मौत के बाद पूरा देश जला दिया गया। कई शहरों में गृहयुद्ध जैसे हालात पैदा हो गए । कई दिनों तक चला ये हिंसक प्रदर्शन फ्रांस से होते हुए संपूर्ण यूरोप तक फैल गया था, जिसके परिणामस्‍वरूप कई और देशों में इस्‍लामिक आतंकवाद देखने को मिला। दंगाइयों ने फ्रांस के पेरिस, मार्सिले और ल्योन सहित अन्य शहरों में जमकर उत्पात मचाया। लूटपाट के अनेक वीडियो सामने आए।

जिहाद के जरिए फ्रांस को इस्लामिक देश बनाने की मंशा

इस बीच, एक मौलवी शेख अबू तकी अल-दीन अलदारी का वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें वह कह रहा था, ‘‘जिहाद के जरिए फ्रांस एक इस्लामिक देश बन जाएगा और पूरी दुनिया इस्लामी शासन के अधीन होगी। फ्रांसीसियों! इस्लाम में कन्वर्ट हो जाओ, नहीं तो जजिया का भुगतान करने के लिए मजबूर किए जाओगे।’’ मेमरी टीवी द्वारा अनुवादित वीडियो में कहा गया है, ‘‘2050 में फ्रांस में मुसलमानों की संख्या फ्रांसीसियों से अधिक हो जाएगी। लेकिन हम फ्रांस को इस्लामिक देश बनाने के लिए इन आंकड़ों पर भरोसा नहीं कर रहे हैं। हम जिस पर भरोसा कर रहे हैं, वह यह है कि मुसलमानों के पास एक ऐसा देश होना चाहिए, जो अल्लाह की खातिर जिहाद के माध्यम से इस्लाम को अपना मार्गदर्शन, अपना प्रकाश, अपना संदेश और अपनी दया (पश्चिम के) लोगों तक पहुंचाए।’’

फ्रांस में इस्‍लामिक आतंक किस तरह से हावी है, वह इससे भी पता चलता है कि पेरिस के करीब रामबौलेट में हमलावर ने पुलिस थाने में घुसकर एक महिला पुलिस अधिकारी स्टेफनी की गर्दन पर धारदार हथियार से वार किए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस दौरान हमलावर अल्ला-हु-अकबर का नारा लगा रहा था। यहां हुए पेरिस हमले में 130 लोगों को मौत के घाट उतार दिया जाता है। फ्रांस के नाइस शहर में ट्रक से 86 लोगों को मार दिया गया। अभिव्यक्ति की आजादी के तहत कक्षा में प्रोफेट मुहम्मद का कार्टून दिखाने पर पेरिस में इतिहास के शिक्षक सैमुअल पैटी का सिर अब्दुल्लाह एंजोरोव ने काट दिया ।

पैगंबर का कार्टून छापने पर शार्ली एब्दो के पेरिस कार्यालयों पर हुए हमलों में 17 लोग मारे गए। एक दूसरी घटना में पत्रिका के मुख्यालय के बाहर दो लोगों को चाकू मार दिया गया। एक आतंकी ने पेरिस के चैंप्स-एलिसीज पर एक पुलिस अधिकारी की गोली मारकर हत्या कर दी। पेरिस के ओर्ली हवाईअड्डे पर सैनिकों पर हमला किया गया, फिर अल्लाह के नाम कुर्बान होने की बात कही गई । दक्षिणी फ्रांस के तालोसे शहर में अल-कायदा के आतंकी ने तीन यहूदी बच्चों, एक रबाई और तीन पैराट्रूपर्स की हत्या कर दी। इस प्रकार की अनेक आतंकी घटनाएं फ्रांस में कभी भी होती हुई दिखती हैं।

खारि‍ज किए गए 4 हजार 340 आवेदन, अब नहीं घुस पाएंगे फ्रांस में

फ्रांसीसी अधिकारियों ने ओलंपिक खेलों के लिए अब तक करीब दस लाख एक्रेडटेशन आवेदनों की जांच की और 4 हजार 340 लोगों के आवेदन खारिज कर दिये। इनमें से कुछ आवेदन इस्लामिक चरमपंथी कनेक्शन और विदेशी जासूस होने के शक के कारण खारिज किए गए हैं। गेराल्ड डार्मेनिन का कहना है, ‘करीब सौ लोगों के आवेदन जासूसी या इस वजह से खारिज किए गए, क्योंकि वे खुद को किसी दूसरे पेशे का बताकर एक्रेडटेशन पाना चाह रहे थे। वे शायद आंतकी हमला करने के लिए पेरिस में नहीं घुसना चाह रहे थे, लेकिन ये लोग जासूसी करने के अलावा साइबर हमला करने के लिए कंप्यूटर नेटवर्क का एंट्री पॉइंट एक्सेस कर सकते थे।’

गेराल्ड डार्मेनिन के कहे अनुसार ऐसे लोगों ने पत्रकार या तकनीकी कर्मचारी के रूप में आवेदन किया था। ये सभी मूल रूप से रूस और बेलारूस के थे, लेकिन आवेदन में इन्होंने अपने देश का नाम नहीं बताया था। उदाहरण के लिए, ‘हमने बड़ी संख्या में ‘पत्रकारों’ को आने से मना कर दिया, जिन्होंने खेलों को कवर करने का दावा किया था। दूसरी ओर, हमने उन रूसी प्रतिनिधियों की उपस्थिति को स्वीकार किया और फ्रांस में सहज रूप से आने दिया है जो अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के लिए काम करते हैं। इस तरह से हमने एहतियाती सिद्धांत के तहत काम किया है ।’

फिलहाल, फ्रांस सरकार अपने स्‍तर पर इस्‍लामिक आतंकवाद को रोकने के लिए जो कर सकती है, वह कर रही है, लेकिन एक सच यह भी है कि हमले और हिंसक घटनाओं की संख्या बढ़ने के बाद फ्रांस की सरकार चेती है, अब उसके लिए कुछ भी करना आसान नहीं है। अभी कुछ दिन पहले ही विश्‍व ने देखा कि कैसे चुनावों के पश्‍चात पहले चरण में दूसरे नंबर पर रहा वामपंथी दल ‘ला फ्रांस इंसॉमाइस’ की अगुआई वाला न्यू पॉपुलर फ्रंट गठबंधन जैसे ही पहले नंबर पर आया। वामपंथियों की जबरदस्त जीत के जश्न में फ्रांस के उपद्रवी यहां ओलंपिक खेलों के आयोजन के लिए सजे हुए फ्रांस की सूरत बिगाड़ने के लिए उतारू हो गए थे । कई शहरों से हिंसक झड़पें और आगजनी की खबरें आईं । लेकिन इसके बाद भी वहां की सत्‍ता यह तो मानती ही है कि इस्‍लामिक आतंकवाद को अब अधिक नहीं सहन किया जा सकता। इससे जुड़े लोगों को फ्रांस से जितना दूर रखा जा सकेगा उतना ही देश के लिए हितकर है। अभी का फ्रांस सरकार का पेरिस ओलंपिक के संदर्भ में लिया गया निर्णय तो यही बता रहा है।

Topics: पेरिस ओलंपिक आतंकीफ्रांस में आतंकी घटनाएंफ्रांस में आतंकी हमलाआतंकी हमलापेरिस ओलंपिक
डाॅ. मयंक चतुर्वेदी
डाॅ. मयंक चतुर्वेदी
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और हिंदुस्थान समाचार से संबद्ध हैं। [Read more]
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