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सरकारी विद्यालय का कर दिया गया ‘इस्लामीकरण’ !

झामुमो और कांग्रेस की तुष्टीकरण से अब शिक्षा के मंदिर भी अछूते नहीं : बाबूलाल मरांडी

Written byरितेश कश्यपरितेश कश्यप
Feb 24, 2024, 07:32 pm IST
in झारखण्‍ड
विद्यालय के मुख्य द्वार पर बनी मीनारें

विद्यालय के मुख्य द्वार पर बनी मीनारें

झारखंड में जिहादी तत्व इतने सक्रिय हैं कि वे रातों-रात कहीं मीनार खड़ी कर देते हैं, कहीं बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिमों को बसा दिया जाता है तो कहीं सरकारी जमीन, भवन आदि का ‘इस्लामीकरण’ कर देते हैं। दुर्भाग्य यह देखिये ये चीजें झारखंड की सरकार को नही दिखती हैं। सरकार ये चीजें देखना भी नही चाहती है, उसकी नजर केवल वोट बैंक पर रहती है।

हाल ही में हजारीबाग जिले के इचाक प्रखंड के डुमरौन स्थित राजकीय प्राथमिक उर्दू विद्यालय के मुख्य द्वार पर 35 फिट ऊंची 2 मीनारें खड़ी कर दी गईं। ये मीनारें एक या दो दिनों में नही बनी हैं । 2 महीने से इसके लिए काम चल रहा था, लेकिन यह काम उस प्रशासनिक तंत्र को नही दिखा, जिसकी जिम्मेदारी है इस तरह की हरक़तों पर रोक लगाने की। ग्रामीण 2 महीने से गुहार लगाते रहे कि इस विद्यालय को ‘इस्लामीकरण’ से बचाइए, लेकिन प्रशासन ने किसी की कुछ नही सुनी। अब नतीजा यह हुआ है कि एक सरकारी विद्यालय का ‘इस्लामीकरण’ हो चुका है।

इस मामले में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मंराडी ने ट्वीट कर कहा है कि झामुमो और कांग्रेस की तुष्टीकरण से अब शिक्षा के मंदिर भी अछूते नहीं हैं। आगे कहा कि राज्य सरकार जबरन कभी विद्यालयों का रंग बदलकर, नाम परिवर्तित कर, प्रार्थना पद्धति में बदलाव कर तुष्टिकरण को बढ़ावा दे रही है। वहीं दूसरी ओर मामले को बढ़ता देखकर हज़ारीबाग की उपायुक्त नैंसी सहाय ने जांच के आदेश दिए हैं। इसके अनुसार 26 फरवरी को इचाक अंचलाधिकारी इसकी जांच करेंगे।

क्या है पूरा मामला?

रात के अंधेरे में इन मीनारों का निर्माण किया गया। इस मामले को लेकर दो महीने पहले स्थानीय मुखिया चोहन महतो ने 128 ग्रामीणों के साथ प्रशासन को आवेदन दिया था। चोहन महतो ने बताया कि यह विद्यालय काफी पुराना है और लगभग 50 बच्चे इस विद्यालय में पढ़ाई करते हैं। आज से 2 महीने पहले जब मीनार बनाने की कोशिश की जा रही थी तो पहले ग्रामीणों ने रोका और प्रशासन को आवेदन दिया था। अब प्रशासन का कहना है कि उसे कुछ पता ही नहीं है। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों में काफी आक्रोश है और जल्द से जल्द इस मामले को सुलझा लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि जब से यह मामला तूल पकड़ा है तब से विद्यालय को बंद कर दिया गया है। इसके साथ ही कुछ शिक्षकों का निलंबन भी हुआ है।

आश्चर्य यह देखिये कि इस घटना की जानकारी प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी डोमन मोची को नही है। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच कराई जाएगी और अगर यह घटना सही पाई जाती है तो कार्रवाई भी की जाएगी।

अब सवाल यह उठता है कि जब 2 महीने पहले ही इस मामले पर आवेदन दिया गया था तो भी कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

ग्रामीणों ने इचाक के प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी को आवेदन देते हुए लिखा था कि राजकीय उर्दू प्राथमिक विद्यालय डुमरौन एक सरकारी विद्यालय है। यहां कुछ मुस्लिमों ने विद्यालय को एक मजहब विशेष के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया है । इसके मुख्य द्वार पर मीनार बनाई जा रही है। इसकी जानकारी मिलते ही ग्रामीणों के द्वारा काम को बंद करने का प्रयास किया गया था। इसके बाद उन लोगों द्वारा रात के अंधेरे में इस काम को किया जा रहा है। ग्रामीणों ने आग्रह करते हुए लिखा कि इस आपत्तिजनक मीनार को अतिशीघ्र हटाने का काम किया जाए।

इस पर बरकट्ठा विधायक अमित यादव ने कहा कि राज्य की सरकार तुष्टीकरण में व्यस्त है। इस कारण राज्य में कट्टरपंथियों का मनोबल सातवें आसमान पर है। बच्चों में कट्टरपंथी मानसिकता को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। इस तरह की हरकत वहां पढ़ रहे बच्चों के भविष्य के लिए बिल्कुल अनुचित होगी। सरकार से लेकर प्रशासन तक इस मामले को गंभीरता से ले और इसमें शामिल सभी दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करे।

ऐसा पहली बार नहीं है जब झारखंड में विद्यालयों का इस्लामीकरण करने का प्रयास किया गया हो। पहले भी कई विद्यालयों में रविवार की जगह शुक्रवार को छुट्टी देने की कोशिश की गई थी । कुछ विद्यालय में सुबह होने वाली प्रार्थना में हाथ जोड़ने के बजाय हाथ मोड़कर प्रार्थना करने का प्रयास कराया गया था। यह सब वहां हुआ था जिन क्षेत्रों में मुस्लिम आबादी अधिक है। उदाहरण स्वरूप गोड्डा के बसंतराय और महागामा प्रखंड में वैसे स्कूल थे जहां शुक्रवार को छुट्टी दी जा रही थी। इसी तरह से देवघर जिले के मधुपुर अनुमंडल क्षेत्र के करौं, मधुपुर व मारगोमुंडा प्रखंड के 103 सरकारी विद्यालयों में साप्ताहिक अवकाश का दिन बदल दिया गया था। रविवार की जगह इन विद्यालयों में शुक्रवार को जुम्मे का साप्ताहिक अवकाश दिया जा रहा था। इनमें कई ऐसे विद्यालय भी थे, जहां न तो उर्दू शिक्षक हैं और न ही उर्दू की पढ़ाई होती है, लेकिन आबादी को आधार बनाते हुए गांव के कुछ युवकों ने शिक्षकों व विद्यालय प्रबंधन समिति पर दबाव बनाते हुए शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश घोषित करवा दिया था।

Topics: JharkhandSchool of jharkhandislamic activities
रितेश कश्यप
रितेश कश्यप
डेढ़ दशक से पत्रकारिता में सक्रिय। राजनीति, सामाजिक और सम-सामायिक मुद्दों पर पैनी नजर। कर्मभूमि झारखंड।   [Read more]
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