ढोल-नगाड़े-गायन-वादन,
वेद मंत्र उच्चार हुआ।
रामलला घर अपने आए,
त्रेता युग साकार हुआ॥
जन्म-भूमि उद्धार हुआ॥

कहा कभी था हमने देखो,
‘रामलला हम आएंगे।
मूल्य चुकाकर प्राणों से भी,
मंदिर भव्य बनाएंगे॥’
जैसा कहा किया वैसा ही,
वचन सत्य साकार हुआ॥1॥

रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा,
झूम उठा है सारा देश।
हृदय-हृदय में गहरे बैठे,
मानो गद्दी पर अवधेश॥
एक नई दीवाली आई,
पूजा का त्योहार हुआ॥2॥
समावेश में पूज्य संत-जन,
मत-पंथों का भी सत्कार।
भरत भूमि के सभी हितैषी,
उन्नायक-उन्नति आधार॥
सभी उपस्थित बड़े गर्व से,
समारोह व्यवहार हुआ॥ 3॥




एक पुण्य संकल्प लिया था, 













