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गंगा दर्शन के साथ देखने को मिलेगी मां शबरी वनवासी रामलीला

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि समाज में समरसता लाकर समाज को भ्रमित होने से बचाना है

Written byPanchjanyaPanchjanya
Oct 2, 2023, 03:17 pm IST
inदिल्ली

नई दिल्ली। यह वह आलौकिक समय है, जब ऋषिकेश में गंगा स्नान, गंगा आरती के साथ-साथ वनवासी रामलीला का मंचन देखने को मिलेगा। परमार्थ निकेतन में होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय रामलीला में ओडिशा, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की वनवा​सी जनजातियों के कलाकर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यहां पर उत्तराखंड के लोक संगीत और संस्कृति के भी दर्शन होंगे।

गंगा के तट पर होने वाली यह एक अद्भुत रामलीला होगी। ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन में आगामी 20 से 24 अक्टूबर तक इसका आयोजन किया जा रहा है। पांच दिवसीय ‘मां शबरी रामलीला महोत्सव’ का आयोजन सैस फाउंडेशन द्वारा किया जा रहा है। यह जानकारी दिल्ली में परमार्थ निकेतन आश्रम के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज ने दी। इस मौके पर दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा, रामलीला के आयोजक अध्यक्ष शक्ति बक्शी, उपाध्यक्ष डॉ. मुकेश कुमार और महामंत्री विश्व मोहन शर्मा मौजूद रहे।

आयोजक शक्ति बक्शी ने कहा कि यह हम सभी का सौभाग्य है कि गंगा तट पर ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन में मां शबरी रामलीला करने का अवसर मिल रहा है जिसका मार्गदर्शन स्वयं स्वामी चिदानंद सरस्वती करेंगे और रामलीला की मुख्य संरक्षण की भूमिका में वीरेन्द्र सचदेवा हैं। इस अवसर पर स्वामी चिदानंद महाराज ने कहा कि आज समाज में बहुत सी भ्रांतियां फैली हुई हैं और हमें हर प्रकार के संकोच को दूर करना है। इस संकोच से विश्व का शक्तिशाली देश अमेरिका भी अछूता नहीं है। हमारी संस्कृति सभी को साथ लेकर सबका सम्मान करने वाली है। मां शबरी रामलीला के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि देश की संसद में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण पर मोहर लगा दी गई, लेकिन हमें समाज के हर वर्ग पर ध्यान देना है और समाज में शबरी रूपी महिलाओं तक पहुंचकर उनकी दशा को सुधारना है। रामलीला में मां शबरी के चरित्र को इसलिए चुना गया क्योंकि उन्हें पूर्ण आस्था थी कि प्रभु श्रीराम उनकी कुटिया पर आएंगे, लेकिन उनके आने तक वह खाली नहीं बैठीं। साफ-सफाई की, उन्हें मालूम था कि भगवान को प्राप्त करने के लिए भाव महत्वपूर्ण होता है, इसलिए स्वयं एक-एक बेर को चखा और उसके उपरांत भगवान राम को खाने को दिया।

मां शबरी के पात्र पर स्वामी चिदानंद ने कहा कि मां शबरी का रामायण में जो महत्व है, वह ‌भिन्न है, उसे रामायण मंचन के माध्यम से बताया जाएगा। इससे समाज में समरसता लाना है, भ्रमित होने से बचाना है ताकि समाज में समता, समरसता और सद्भाव लाया जा सके। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि मां शबरी रामलीला के माध्यम से संपूर्ण देश में शबरी कथा बहे। भगवान राम का चरित्र यही संदेश देता है कि जड़ मूल्य से जुड़े रहो, परिवार और संस्कार मूल्यों की परिभाषा भगवान राम के आदर्श जीवन से देखने को मिलती है।

वीरेन्द्र सचदेवा ने स्वामी चिदानंद का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शबरी के चरित्र में तप, भक्ति, श्रद्धा और प्रेम का समावेश है। हमारी सनानत संस्कृति आद‌ि से अनंत की है। उन्होंने कहा कि यूं तो देश में अनेक रामलीलाएं होती हैं, लेकिन मां शबरी रामलीला को विशेष तौर पर शबरी के जीवन पर आधारित है जिससे समाज में सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की भावना को बल मिलता है। शक्ति बक्शी ने बताया कि मां शबरी रामलीला में अभिनय करने वाले कलाकार भी मुख्य रूप से वनवासी समाज से हैं। साथ ही छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड और ओडिशा के कलाकार अपना महत्वपूर्ण रोल ‌निभाएंगे।

Topics: ऋषिकेश में वनवासी रामलीलामां शबरीमां शबरी रामलीला महोत्सवShabari Vanvasi RamlilaVanvasi RamlilaVanvasi Ramlila in RishikeshMaa ShabariVanvasiवनवासीMaa Shabari Ramlila Festivalशबरी वनवासी रामलीलावनवासी रामलीला
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