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क्वांटम और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में पासवर्ड

क्वांटम कंप्यूटर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में आज के आठ कैरेक्टर के सामान्य पासवर्ड आसानी से हैक किए जा सकते हैं

Written byबालेन्दु शर्मा दाधीचबालेन्दु शर्मा दाधीच
Aug 11, 2023, 10:59 am IST
inविज्ञान और तकनीक

आज भी साइबर अपराधी आम नागरिक से लेकर बड़ी-बड़ी सरकारों तक की नाक में दम किये हुए हैं तो क्वान्टम कंप्यूटिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से वे क्या कुछ नहीं कर बैठेंगे? और हम उन चुनौतियों से कैसे जूझेंगे? क्या आज के पासवर्ड तब टिक पाएंगे?

हाल ही में गूगल ने अकल्पनीय क्षमताओं वाले क्वान्टम कंप्यूटर के विकास की खबर दी है। उधर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तरक्की की छलांगें मार रही है। दोनों के साथ आने से अपरिमित गति से अकल्पनीय किस्म के नवाचार और विकास का रास्ता खुलने वाला है। लेकिन साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में अभूतपूर्व किस्म की चुनौतियां भी सामने आने वाली हैं। आज भी साइबर अपराधी आम नागरिक से लेकर बड़ी-बड़ी सरकारों तक की नाक में दम किये हुए हैं तो क्वान्टम कंप्यूटिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से वे क्या कुछ नहीं कर बैठेंगे? और हम उन चुनौतियों से कैसे जूझेंगे? क्या आज के पासवर्ड तब टिक पाएंगे?

आज के दौर में एक अच्छा और सुरक्षित पासवर्ड क्या है? आम तौर पर कहा जाता है कि आपके पासवर्ड में कम से कम आठ अक्षर हों जिनमें अंग्रेजी का एक कैपिटल कैरेक्टर, एक लोअरकेस कैरेक्टर, शून्य से 9 के बीच कोई अंक, प्रश्नवाचक या डॉलर जैसा कोई निशान (सिंबल) होना जरूरी है। इस सुझाव का कारण यह है कि यदि आप सिर्फ कैरेक्टर आधारित पासवर्ड का प्रयोग करते हैं तो हैकर उन्हें जानने के लिए ऐसे कंप्यूटर प्रोग्राम का प्रयोग कर लेते हैं जो एक-एक करके अनगिनत शब्दों के विकल्पों को आजमाकर देख लेता है कि कहीं आपका पासवर्ड यह तो नहीं।

गूगल तथा अन्य कंपनियों की आसानी से उपलब्ध सेवाएं लेकर उन्हें स्वचालित ढंग से वेबसाइटों में टाइप भी कर सकते हैं। इस तरह के पासवर्डों का पता लगाना हैकरों तथा उनके प्रोग्रामों के लिए कठिन होगा क्योंकि इसकी कोशिश करते-करते बरसों लग जाएंगे। लेकिन क्वान्टम कंप्यूटर के आने पर इन्हें तोड़ना भी मुश्किल नहीं रहेगा क्योंकि यहां वे सामान्य कंप्यूटर द्वारा हजारों वर्षों में किये जाने वाले काम को चंद सेकंडों में कर दिखाएंगे। और ऊपर से अगर उनके पास आर्टिफिशियल इंटेजिलेंस की ताकत भी मौजूद हो तो?

इंसान के लिए सौ-दो सौ से अधिक पासवर्डों की कल्पना करना और आजमाना मुश्किल हो सकता है लेकिन कंप्यूटर प्रोग्राम के लिए ऐसी कोई सीमा नहीं है। वह अक्षरों के करोड़ों-अरबों संयोजनों की रचना कर सकता है और उन्हें आपके पासवर्ड के तौर पर आजमा कर देख सकता है। हालांकि अनधिकृत रूप से पासवर्ड का पता लगाने का एक यही तरीका नहीं है, और भी हैं। लेकिन यह ऐसा तरीका है जो आपकी साइबर सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है, भले ही आपने खुद कोई लापरवाही न की हो।

फिर भी इस तरह के आपराधिक कंप्यूटर प्रोग्रामों की सीमाएं हैं, विशेष रूप में लंबे पासवर्डों के मामले में और काफी जटिल दिखने वाले पासवर्डों की स्थिति में भी, जैसे b9&A%xC@*P($el सामान्य डिजिटल प्रयोक्ता इस तरह के पासवर्डों का प्रयोग नहीं करता क्योंकि उन्हें बनाना, याद रखना और लॉगिन के समय टाइप करना उनके लिए बहुत मुश्किल हो जाता है। यह अलग बात है कि ऐसे सुरक्षित पासवर्ड बनाने के लिए सॉफ्टवेयर (नि:शुल्क भी) मौजूद हैं।

आप चाहें तो गूगल तथा अन्य कंपनियों की आसानी से उपलब्ध सेवाएं लेकर उन्हें स्वचालित ढंग से वेबसाइटों में टाइप भी कर सकते हैं। इस तरह के पासवर्डों का पता लगाना हैकरों तथा उनके प्रोग्रामों के लिए कठिन होगा क्योंकि इसकी कोशिश करते-करते बरसों लग जाएंगे। लेकिन क्वान्टम कंप्यूटर के आने पर इन्हें तोड़ना भी मुश्किल नहीं रहेगा क्योंकि यहां वे सामान्य कंप्यूटर द्वारा हजारों वर्षों में किये जाने वाले काम को चंद सेकंडों में कर दिखाएंगे। और ऊपर से अगर उनके पास आर्टिफिशियल इंटेजिलेंस की ताकत भी मौजूद हो तो?

कुछ दिन पहले गूगल में काम करने वाले मेरे एक मित्र ने लिंक्डइन पर सुझाव दिया था कि क्वान्टम के दौर में आपको कम से कम 40 अक्षरों का पासवर्ड रखना होगा जिसमें न सिर्फ तमाम किस्म की जटिलता और विविधता हो बल्कि कई भाषाओं के अक्षर भी प्रयुक्त किये गये हों और कई इमोजी कैरेक्टर भी हों। यह एक दिलचस्प किंतु विचारोत्तेजक सुझाव है।

रोमन लिपि के अक्षरों, विशेष चिह्नों, निशानों (सिम्बल), अंकों आदि को जोड़ लिया जाए तो हमारे पास लगभग 255 कैरेक्टर मौजूद हैं जिनके संयोजनों का प्रयोग अक्सर हम अपने पासवर्डों में करते हैं। लेकिन अगर हम उपरोक्त सुझाव पर अमल करें तो यही संख्या लगभग डेढ़ लाख कैरेक्टर तक पहुंच जाएगी। तो क्या वैसे पासवर्ड क्वान्टम की चुनौती पार कर सकेंगे?
(लेखक माइक्रोसॉफ्ट में ‘निदेशक- भारतीय भाषाएं
और सुगम्यता’ के पद पर कार्यरत हैं)

Topics: कंप्यूटर प्रोग्रामों की सीमाएं
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