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देवदूत बनकर आए स्वयंसेवक

बालेश्वर रेल हादसे में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की बचाव टीमों से पहले रा.स्व.संघ के स्वयंसेवक देवदूत बनकर आए। मोबाइल की रोशनी में कुल्हाड़ी, रॉड, हथौड़े की मदद से डिब्बों में फंसे घायलों को निकाला और बाइक, आटो और ट्रैक्टर से अस्पताल पहुंचाया

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद
Jun 12, 2023, 03:26 pm IST
in भारत, संघ @100, ओडिशा

एक स्वयंसेवक ने पाञ्चजन्य को बताया कि घटनास्थल का जो दृश्य था, उसे शब्दों में बताना संभव नहीं है। अंधेरा हो चुका था, बिजली नहीं थी। उस समय तक एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की बचाव टीमें नहीं पहुंची थीं।

बालेश्वर जिले में जिस बाहनगा बाजार रेलवे स्टेशन पर रेल दुर्घटना हुई, उसके पास ही रा.स्व.संघ की शाखा लगती है। चीख-पुकार सुनकर शाम 7:15 बजे तक स्वयंसेवक तक दुर्घटनास्थल पर पहुंच चुके थे। उनके साथ स्थानीय लोग भी थे। एक स्वयंसेवक ने पाञ्चजन्य को बताया कि घटनास्थल का जो दृश्य था, उसे शब्दों में बताना संभव नहीं है। अंधेरा हो चुका था, बिजली नहीं थी। उस समय तक एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की बचाव टीमें नहीं पहुंची थीं।

स्वयंसेवकों ने बिना समय गंवाए मोबाइल फोन की रोशनी में बचाव कार्य शुरू किया और साथियों को पास के गांव से इमर्जेंसी लाइट लाने के लिए भेजा। स्वयंसेवकों के पास कोई उपकरण भी नहीं था, इसलिए लोगों को दुर्घटनाग्रस्त डिब्बों से निकालने में दिक्कतें आ रही थीं। कुछ स्वयंसेवक पास के गांवों से बड़ी कुल्हाड़ी, रॉड और हथौड़े ले आए और घायलों को बाहर निकालना शुरू कर दिया।

शुरुआत में स्वयंसेवकों को समझ में नहीं आया कि घायलों को अस्पताल कैसे पहुंचाया जाए। तब तक पास के खंतापड़ा के अस्पताल से दो ही एंबुलेंस पहुंची थीं। प्रशासन अन्य एंबुलेंस एकत्र कर रहा था। घायलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही थी। लिहाजा, स्वयंसेवक मोटरसाइकिल, ट्रैक्टर ट्रॉली और आटो से ही घायलों को नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाने लगे। जब तक प्रशासनिक अमला वहां नहीं पहुंचा, तब तक स्वयंसेवक ही स्थानीय लोगों की सहायता से डिब्बों में फंसे यात्रियों को निकालने व अस्पताल पहुंचाने में जुटे रहे।

इसी बीच, सूचना पाकर बालेश्वर व भद्रक जिले के स्वयंसेवक भी आ गए। शाम को शुरू में जहां 14-15 स्वयंसेवक घटनास्थल पर थे, रात होते-होते उनकी संख्या बढ़कर लगभग ढाई सौ हो गई। इसके बाद जब प्रशासन और राहतकर्मी आए तब स्वयंसेवकों ने उनकी भी सहायता की। संघ के सह विभाग प्रचारक विष्णु नायक दुर्घटनास्थल पर उपस्थित रहे।

बहादुर स्वयंसेवक रमेश
बालेश्वर जिले के स्वयंसेवक रमेश और प्रभास बहादुरी से बचाव कार्यों में जुटे रहे। हादसे में ट्रेन की तीन बोगियां एक-दूसरे के ऊपर चढ़ी हुई थीं। ऐसे में उनमें फंसे लोगों को निकालना दुष्कर काम था। बचाव दल के कर्मी भी बोगी पर चढ़ने से ठिठक रहे थे, लेकिन रमेश व उसके साथी स्वयंसेवक बेझिझक ऊपर चढ़कर डिब्बों के अंदर फंसे यात्रियों को निकालने लगे। इसके बाद एनडीआरएफ सहित अन्य बचाव टीमें भी आ गईं। रमेश की बहादुरी देखकर आसपास के क्षेत्र के लोग उनकी अभी भी प्रशंसा कर रहे हैं।

अस्पतालों में भी डटे रहे
घायल यात्रियों को अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद उनकी देखभाल करना, उन्हें आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराने, रक्त की आवश्यकता को पूरा करने के साथ पीड़ितों के परिवारों तक सूचना भी स्वयंसेवक पहुंचा रहे थे। बालेश्वर विभाग के प्रचारक चंद्रशेखर महापात्र बालेश्वर स्थित जिला मुख्यालय अस्पताल में उपस्थित रहे और सेवा कार्यों की निगरानी की। भद्रक जिला मुख्यालय अस्पताल व सोरो स्थित मेडिकल अस्पताल में भी स्वयंसेवकों ने मोर्चा संभाला।

हादसे के बाद इस ट्रेन में यात्रा कर रहे यात्रियों के बारे में परिजनों को सूचना व सहयोग देने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से हेल्पलाइन सेवा शुरू की गई। इसके जरिये सैकड़ों लोगों को सहायता दी गई। परिषद के प्रदेश सचिव अरिजीत पटनायक ने बताया कि बालेश्वर ट्रेन हादसे की सूचना मिलने पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने 4 जून से बालेश्वर में होने वाले प्रांत अभ्यास वर्ग को स्थगित कर दिया। परिषद के 300 से अधिक कार्यकर्ता लोगों के बचाव, अस्पताल में उनकी देखभाल, रक्त की व्यवस्था, पीड़ितों तथा उनके परिवारों को भोजन उपलब्ध कराने, अपने लोगों को ढूंढने आ रहे परिजनों की हर प्रकार की सहायता कार्य में जुट गए। 389 कार्यकर्ताओं ने रक्तदान किया।

इसी तरह, कटक के एससीबी मेडिकल कालेज एवं अस्पताल में भी संघ के सेवा विभाग से जुडे स्वयंसेवक सक्रिय रहे। घायल यात्रियों को तीमारदारी के साथ-साथ उनके परिवारों से संपर्क कर उन्हें सूचना देना आदि कार्यों में स्वयंसेवक लगे रहे। संघ के क्षेत्रीय सेवा प्रमुख जगदीश खाडंगा व प्रांत सेवा प्रमुख शांतनु माझी भी दुर्घटनास्थल पर उपस्थित थे और उनकी प्रत्यक्ष देखरेख में यह कार्य किया गया। कटक शहर में हिन्दू जागरण मंच व बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने अस्पताल में घायलों की हरसंभव सहायता की। बजरंग दल ने कटक में घायलों के लिए विशेष रूप से रक्तदान किया।

रक्तदान में भी आगे स्वयंसेवक
संघ के स्वयंसेवकों ने घायल यात्रियों के लिए रक्तदान करने के साथ-साथ दूसरों से भी रक्तदान कराया। जब घायल यात्रियों को रक्त की आवश्यकता पड़ी, तो एक व्हाट्सएप समूह में रात करीब सवा नौ बजे संदेश डाला गया। इसके बाद सैकड़ों स्वयंसेवक समाज के अन्य युवाओं को लेकर बालेश्वर जिला मुख्यालय अस्पताल और दूसरे अस्पतालों में रक्तदान के लिए पहुंचने लगे। रात में अस्पताल में रक्तदान करने वाले उत्साही युवकों की लंबी-लंबी कतारें देखकर चिकित्सक भी हैरान रह गए।

दुर्घटना के अगले दिन सुबह की स्थिति और खराब थी। चारों ओर चीख-पुकार मची हुई थी। मृतकों के परिजन बिलख रहे थे। पार्थिव शरीर नीचे जमीन पर थे। एंबुलेंस भी तैयार थी, लेकिन एंबुलेंस चालक से लेकर पुलिसकर्मी तक पार्थिव शरीरों को उठाकर एंबुलेंस में नहीं रख रहे थे। तब स्वयंसेवकों ने यह बीड़ा उठाया। संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख रविनारायण पंडा ने बताया कि स्वयंसेवकों ने तत्काल पॉलीथिन का प्रबंध किया तथा इन पार्थिव शरीरों को वाहन तक पहुंचाने का कार्य किया।

संघ ने शुरू की हेल्पलाइन सेवा
हादसे के बाद इस ट्रेन में यात्रा कर रहे यात्रियों के बारे में परिजनों को सूचना व सहयोग देने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से हेल्पलाइन सेवा शुरू की गई। इसके जरिये सैकड़ों लोगों को सहायता दी गई। परिषद के प्रदेश सचिव अरिजीत पटनायक ने बताया कि बालेश्वर ट्रेन हादसे की सूचना मिलने पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने 4 जून से बालेश्वर में होने वाले प्रांत अभ्यास वर्ग को स्थगित कर दिया। परिषद के 300 से अधिक कार्यकर्ता लोगों के बचाव, अस्पताल में उनकी देखभाल, रक्त की व्यवस्था, पीड़ितों तथा उनके परिवारों को भोजन उपलब्ध कराने, अपने लोगों को ढूंढने आ रहे परिजनों की हर प्रकार की सहायता कार्य में जुट गए। 389 कार्यकर्ताओं ने रक्तदान किया। हादसे के तत्काल बाद व अगले दिनों में पेयजल के साथ-साथ एक हजार से अधिक सूखा पैकेट भोजन व 25 सौ पैकेट पका भोजन घायलों व उनके परिजनों को उपलब्ध कराए गए। परिषद ने पीड़ितों के परिजनों की सहायता के लिए 24 घंटों का एक हेल्पलाइन नंबर भी शुरू किया।

शिशु विद्या मंदिरों के आचार्य भी जुटे
हादसे के सूचना मिलते ही सरस्वती शिशु विद्या मंदिरों के आचार्य-आचार्या तथा छात्रों ने घायलों के लिए बालेश्वर, भद्रक के साथ कटक जिले के कुल 20 स्थानों पर सहायता कार्य शुरू किया। इन्होंने अस्पतालों में घायलों को पका व सूखा भोजन उपलब्ध कराया और कुल 167 यूनिट रक्त संग्रह किया।

Topics: volunteers came as angelsबालेश्वर जिले में  रेल दुर्घटनासंघ ने शुरू की हेल्पलाइन सेवाशिशु विद्या मंदिरों के आचार्य भी जुटेरक्तदान में भी आगे स्वयंसेवकबहादुर स्वयंसेवक रमेशRail accident in Baleshwar districtSangh started helpline serviceAcharyas of Shishu Vidya Mandirs also joinedVolunteers also came forward in blood donationBrave volunteer Ramesh
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