सोशल मीडिया पर छाए रहे प्रधानमंत्री मोदी, नया संसद भवन और सेंगोल
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सोशल मीडिया पर छाए रहे प्रधानमंत्री मोदी, नया संसद भवन और सेंगोल

- जब प्रधानमंत्री मोदी विधिवत पूजा-अर्चन एवं वैदिक मंत्रों के उच्चारण के बीच नए संसद भवन का उद्घाटन कर रहे थे तब करोड़ों देशवासी अपनी प्रतिक्रियाएं सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर व्यक्त कर रहे थे।

Written byPanchjanyaPanchjanya
May 28, 2023, 08:10 pm IST
inभारत

भारत के नए संसद भवन में रविवार को पवित्र राजदंड ‘सेंगोल’ को स्थापित किया गया। तमिलनाडु से आए आदिनम संतों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को यह सौंपा। आज जब विधिवत पूजा-अर्चन एवं वैदिक मंत्रों के उच्चारण के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी संसद में स्थापना की, तब करोड़ों देश वासियों ने अपनी प्रतिक्रियाएं सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर व्यक्त करनी शुरू कर दी थीं। सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफार्म पर कुछ देर के लिए प्रधानमंत्री मोदी, नया संसद भवन और सेंगोल ही छाए रहे।

निशांत नाम के एक युवा ने ट्विटर पर लिखा- प्रधानमंत्री जी, आपका बहुत बहुत धन्यवाद, हमें आज का एक और अविस्मरणीय दिन देने का। आपका सेवा का संकल्प, आपका जुनून हमें ना केवल नया और मजबूत भारत दे रहा है बल्कि हमें हमारी संस्कृति के भी करीब ला रहा है। अब मोदी सिर्फ एक नाम नहीं, विकास, विश्वास और आस की पहचान है। देश आपका नेतृत्व पाकर धन्य है। नई संसद में 2024 में फिर देश आपको चुनने के लिए प्रतिबद्ध है।

आशुतोष कुमार सिंह ने लिखा, देश को अपना संसद भवन आज मिला है। यह एक ऐतिहासिक पल है। जरूरत है इस भवन में आने वाले सांसद भी भारतीय मन वाले हों। आज इस ऐतिहासिक पल का विरोध कर के कुछ राजनीतिक दल भारतीयता को शर्मसार कर रहे हैं। पहले सेंगोल का विरोध और अब संसद भवन का विरोध। गुलामी के प्रतीकों से जब देश आज़ाद हो रहा है, इन राजनीतिक शक्तियों को मिर्ची क्यों लग रही है पता नहीं!

अविनाश सनातनी ने लिखा, आशा है कि यह सेंगोल तुष्टीकरण की राजनीति करने वालों को दंडित करेगा। समान नागरिक संहिता जल्द लागू होगा। समाज को बांटने वाले हंसिए पर जाएंगे। जेहादी तबका अपनी श्रेष्ठता के घमंड से विमुख होगा। देश चहुंओर विकास से प्रफुल्लित होगा। निताशा सिहाग ने लिखा- स्वर्णिम इतिहास का साक्षी सेंगोल! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सम्मान और तमिल परंपरा के महान प्रतीक सेंगोल को नए संसद भवन में स्थापित करा कर एक भारत श्रेष्ठ भारत की हमारी भावना को और सशक्त किया है।

एसएम कलारिया ने लिखा, धर्मदंड प्रतीक है कि धर्म राजा एवं शासक से ऊपर है। नए संसद भवन में इसे स्थापित करने का संदेश है कि इस सदन में बैठे सभी लोगों के पद से ऊपर धर्म है, इसलिए धर्म दंड से कोई नहीं बच सकता।

समीर तेंदुलकर यहां यह व्याख्यायित करते दिखे कि सेंगोल धर्मशास्त्र मनुस्मृति 7.4 से राज दंड है: तस्यार्थे सर्वभूतानां गोप्तारं धर्मं आत्मजम्। ब्रह्मतेजोमयं दण्डं असृजत्पूर्वं ईश्वरः। उस राजा के लिए सृष्टि के प्रारम्भ में ही ईश्वर ने सब प्राणियों की सुरक्षा करने वाले ब्रह्मतेजोमय अर्थात् शिक्षाप्रद और अपराधनाशक गुण वाले धर्मस्वरूपात्मक दण्ड को रचा।

यहां नुपुर जे शर्मा ने अपनी टिप्पणी में लिखा, आखिरकार हमने फैसला किया है कि हम अपनी सभ्यता को बचाएंगे। हम कहां से आए हैं, हम क्या थे और हम क्या बनना चाहते हैं, इसकी निशानी। हमारे पूर्वजों ने जिस चीज के लिए संघर्ष किया, उसके लिए मर गए, जिसके लिए संघर्ष किया, उसकी निशानी। उस मिट्टी की निशानी जहां हमारी यादें दबी हैं। फिर से गर्व महसूस करना और एक प्राचीन सभ्यता की महानता को महसूस करना। यह छवि जीवित रहेगी।

श्री हरिहर देसिका स्वामीगल, मदुरै अधीनम के 293वें प्रधान पुजारी यहां यह कहते हुए दिखाई दिए, मुझे नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह में भाग लेकर बहुत गर्व है। पीएम मोदी हमेशा तमिल संस्कृति और तमिल लोगों के साथ गर्व से खड़े रहे हैं। मोदी पहले पीएम हैं जिन्होंने तमिल अधीनम को आमंत्रित किया और संसद में तमिल संस्कृति को गर्व से प्रोत्साहित किया। इसके साथ ही देश के प्रसिद्ध चिंतक आनन्द रंगनाथन ने कहा कि किसी सभ्यता की असली निशानी है, न बुझने वाली प्यास, अपने उन पूर्वजों को न्याय दिलाना जिनके साथ अन्याय हुआ है और जिन्हें उनके अपार ज्ञान भंडार के उपरांत भी उपहासित किया गया, उनका गौरव लौटाना, उनकी याद में खुद को भूल जाना। धर्मचक्र-प्रवर्तनाय। कुछ महानता की ओर बढ़ते हैं, अन्य उसमें लौट आते हैं। हम भारतीय दोनों करते हैं।

कुल मिलाकर 28 मई का दिन जहां एक ओर नए संसद भवन के लिए भारतीय इतिहास में दर्ज हो चुका है, वहीं अब यह संसद भवन में भव्य प्रतिष्ठा के साथ सेंगोल की स्थापना के लिए भी जाना जाएगा। इसका यही संदेश है कि धर्म से ऊपर कुछ भी नहीं है, न राजा, न राजसत्ता, न लोक और न ही लोक की सत्ता। वस्तुत: भारत में इसीलिए ही धर्म के लक्षणों की व्याख्या विषद रूप से की गई मिलती भी है। मनुस्मृति, याज्ञवक्य, श्रीमद्भागवत, विदुर नीति, तुलसीदास द्वारा वर्णित धर्मरथापना, पद्मपुराण, धर्मसर्वस्वम् या वाह्य सूत्र अथवा अन्य किसी भी ग्रंथ में आप धर्म के लक्षण देख सकते हैं।

मनु ने मनुस्मृति में धर्म के दस लक्षण बताए- धृति: क्षमा दमोऽस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रह:। धीर्विद्या सत्यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम्।। धैर्य, क्षमा, संयम, चोरी न करना, शौच (स्वच्छता), इन्द्रियों को वश में रखना, बुद्धि, विद्या, सत्य और क्रोध न करना; ये धर्म के लक्षण हैं। ऋषि याज्ञवल्क्य ने भी यही कहा है और श्रीमद्भागवत में भी यही बात कही गई है। संसद में सेंगोल की स्थापना से निश्चित ही आज यही धर्म पुन: लोक के तंत्र में स्थापित हुआ ऐसा जान पड़ता है। सोशल मीडिया और न्यू मीडिया पर आईं ऐसी लाखों प्रतिक्रियाएं आज यही गवाही दे रही हैं।

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