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होम भारत झारखण्‍ड

नक्सली कब्जे में पश्चिमी सिंहभूम जिले के दो गांव!

Written byरितेश कश्यपरितेश कश्यप
Mar 6, 2023, 11:25 am IST
inझारखण्‍ड
नक्सली, फाइल चित्र

नक्सली, फाइल चित्र

लगभग दो महीने से तुंबा हाका और सरजमबुरू नामक दो गांवों पर नक्सलियों का कब्जा है। नक्सलियों ने गांव के सभी रास्तों पर बारूदी सुरंगें बिछा रखी हैं।  

झारखंड में नक्सलियों का दुस्साहस बढ़ता जा रहा है। एक रपट के अनुसार नक्सलियों ने  पश्चिमी सिंहभूम जिले के दो गांवों पर कब्जा कर लिया है। ये गांव हैं— तुंबा हाका और सरजमबुरू। ये दोनों टोंटो थाना क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। कहा जा रहा है कि लगभग दो महीने से इन दोनों गांवों पर नक्सलियों का कब्जा है। एक रपट के अनुसार नक्सलियों ने इन दोनों गांवों के सभी रास्तों पर बारूदी सुरंगें बिछा दी हैं। इस कारण उन दोनों गांवों में न तो कोई बाहरी व्यक्ति जा पा रहा है और न ही गांव के लोग कहीं निकल पा रहे हैं। इन दोनों गांवों में ‘हो’ जनजाति के लोग रहते हैं। कह सकते हैं कि नक्सलियों ने लगभग 500 की आबादी को उनके घरों में ही कैद कर रखा है। नक्सलियों के कारण तुंबा हाका का प्राथमिक विद्यालय भी बंद है। जिला शिक्षा विभाग के अनुसार विद्यालय के शिक्षकों ने लिखित में बताया है कि गांव में नक्सलियों का कब्जा है। इसलिए वहां जाना और विद्यालय चलाना संभव नहीं है। एक अन्य रपट के अनुसार 16 जनवरी को जिला मुख्यालय से दो शिक्षकों को विद्यालय खोलने के लिए भेजा गया था, लेकिन उन दोनों को नक्सलियों ने डरा—धमका कर वापस भेज दिया। यह भी कहा जा रहा है कि तुंबा हाका गांव से लगभग एक किलोमीटर पहले मुख्य सड़क पर पेट काटकर रखे गए हैं और उनमें भी विस्फोटक पदार्थ लगाए गए हैं। यह भी कहा जा रहा है कि गांव से कुछ ही दूरी पर जंगलों में नक्सली जमे हुए हैं। इसकी पुष्टि ड्रोन कैमरे से ली गई तस्वीरें भी कर रही हैं।
इतना सब होने के बाद भी प्रशासन खुलकर कुछ बोलने से कतरा रहा है। पश्चिमी सिंहभूम के पुलिस अधीक्षक आशुतोष शेखर कहते हैं, ”नक्सलियों द्वारा पूरे गांव को कब्जे में नहीं लिया गया है, बल्कि कुछ जगहों पर उनका बसेरा है।” उन्होंने यह भी बताया कि ग्रामीणों को सुरक्षा मुहैया कराने और रास्ते में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को निष्क्रिय करने का प्रयास किया जा रहा है।”
लेकिन कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि नक्सली इतने सुस्साहसी कैसे हुए! फिर इसका उत्तर भी वहीं लोग बताते हैं। कहते हैं, राज्य सरकार पर नक्सलियों के विरुद्ध कार्रवाई न करने का भारी दबाव है, लेकिन जब नक्सली लोगों की जान लेने लगते हैं, तब आम लोगों के गुस्से को शांत करने के लिए राज्य सरकार को उनके विरुद्ध कार्रवाई करनी पड़ती है।
बता दें कि इस क्षेत्र में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट सेंटर (एमसीसी) के नक्सलियों का दबदबा है। ये लोग आए दिन कुछ ऐसा करते हैं कि उनके विरुद्ध सुरक्षाबलों को अभियान चलाना पड़ता है। एक ऐसा ही अभियान जनवरी में भी चला था। उस दौरान सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई थी। मुठभेड़ के दौरान आईईडी विस्फोट में छह जवान घायल हो गए थे। सूत्रों के अनुसार उस समय नक्सली मिसिर बेसरा के दस्ते की जानकारी सुरक्षाबलों को मिली थी। इसके बाद टोंटो के जंगलों में बड़ा अभियान चलाया गया था। कहा जा रहा है कि उस अभियान के बाद नक्सली और अधिक सक्रिय हो गए और उन्होंने प्रशासन को चुनौती देने के लिए इन दोनों गांवों पर कब्जा कर लिया।

पश्चिमी सिंहभूम जिला मुख्यालय चाईबासा से तुम्बाहाका की दूरी लगभग 35 किलोमीटर है। चाईबासा से नरसंडा मोड़, सोनुवा, बरकेला, जोजोहातु, अंजदबेड़ा, माईपी, स्वयंबा, पालातरुब होते हुए तुंबा हाका जाया जाता है। स्वयंबा के आगे रास्ता नहीं है। तुम्बा हाका जाने के लिए पगडंडी का ही इस्तेमाल गांव वाले करते हैं। गोइलकेरा और टोंटो के बीच के रास्तों पर नक्सलियों ने बम बिछाए हुए हैं।

कोल्हान के पुलिस उप महानिरीक्षक अजय लिंडा के अनुसार लगातार तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। इस कारण मिसिर बेसरा और उसके साथी नक्सली ठिकाने बदल रहे हैं। लेकिन पुलिस चारों तरफ से उन्हें घेर चुकी है। अब नक्सली या तो मारे जाएंगे या फिर जेल के अंदर जाएंगे। उन्होंने भी गांव पर नक्सलियों का कब्जा होने की बात से इनकार किया है।

सूत्रों के अनुसार गोइलकेरा और टोंटो के बीच के रास्तों पर नक्सलियों ने बम बिछाए हुए हैं। पिछले एक महीने में इन क्षेत्रों में 100 से अधिक विस्फोट हो चुके हैं। ऐसे ही एक विस्फोट गोइलकेरा थाना क्षेत्र के इचाहातु में 1 जनवरी को हुआ था, जिसमें 52 वर्षीय कृष्णा पूर्ति की मौत हो गई थी और उनकी पत्नी 45 वर्षीय नंदी पूर्ति घायल हो गई थी। ये दोनों सुबह खेत में लगी अरहर की फसल को देखने जा रहे थे, तभी जमीन के अंदर विस्फोट हुआ।
इस नक्सली हरकत पर झारखंड के पूर्व गृह सचिव और भाजपा नेता जेबी तुबिद कहते हैं, ”नक्सलवाद की वजह से ग्रामीणों का जीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है। लोग नक्सलवाद के पुराने दिनों को याद करने लगे हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि जो सख्ती पूर्ववर्ती भाजपा सरकार में थी, वैसी ही रहती तो आज यह स्थिति नहीं बनती। हालांकि जेबी तुबिद यह भी कहते हैं कि नक्सलियों और पुलिस के बीच हो रही लड़ाई में ग्रामीण बेवजह अपनी जान गंवा रहे हैं।
एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि पुलिस हो या नक्सली, दोनों एक-दूसरे के खिलाफ रणनीतियां बनाते हैं और एक-दूसरे के लिए चुनौती भी समय-समय पर बनते रहते हैं। उन्होंने बताया कि नक्सलियों ने आक्रामक नीति बनाते हुए अब मोटरसाइकिल दस्ता बनाया है। ये कई स्थानों पर मोटरसाइकिल से पहुंचकर घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। झारखंड में नक्सली बच्चों और महिलाओं का भी इस्तेमाल करते रहे हैं।
बता दें कि इस समय झारखंड के कई जिले नक्सलवाद से प्रभावित हैं। एमसीसी, पीएलएफआई, जेजेएमपी सहित कई नक्सली संगठन पूरे राज्य में सक्रिय हैं। रामगढ़, चतरा, हजारीबाग, पलामू आदि क्षेत्रों में ऐसी कई नक्सली घटनाएं हुई हैं, जो सरकार और समाज के लिए किसी बड़े खतरे से कम नहीं हैं।

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रितेश कश्यप
रितेश कश्यप
डेढ़ दशक से पत्रकारिता में सक्रिय। राजनीति, सामाजिक और सम-सामायिक मुद्दों पर पैनी नजर। कर्मभूमि झारखंड।   [Read more]
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