जल संरक्षण की परंपरागत विधि ‘खेत पर मेड़ और मेड़ पर पेड़’ की गांव से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक पहचान बनाने के लिए सरकार ने मुझे इस सम्मान के लिए चुना, यह मेरी लिए गौरव की बात है। -उमाशंकर पांडे
उमाशंकर पांडे को सामाजिक कार्यों और जल संरक्षण में उनकी उल्लेखनीय भूमिका के लिए इस वर्ष पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुना गया है। श्री उमाशंकर देश भर में ‘जल योद्धा’ के नाम से भी जाने जाते हैं। पाञ्चजन्य ने श्री पांडे के कार्य को सामने लाने का काम किया था और उन्हें सम्मानित भी किया था।
भूजल स्तर के घटते जाने और बारिश के पर्याप्त न होने को लेकर सबसे ज्यादा समस्या किसानों को पेश आ रही है। इस दृष्टि से उमाशंकर जी का काम अत्यंत अहम माना जा रहा है।
पाञ्चजन्य (22 मई,2022) में उमा शंकर पांडे के कार्यों पर छपी रपट
श्री पांडे ने गांवों में जलभागीदारी को लेकर मेढ़ बनाने से खेतों में कई साल तक पानी को संरक्षित किया जा सकता है। इतना ही नहीं, उनकी प्रेरणा से मेढ़ों पर पेड़ लगाने शुरू किए गए, जिनकी जड़ें मिट्टी को जकड़कर रखती हैं।
उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड में जन्मे श्री पांडे गत 30 वर्ष से खेतों में मेढ़ बनाकर जल संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करते आ रहे हैं। इससे बड़ी संख्या में किसान लाभान्वित हुए हैं और अब मई-जून की भीषण गर्मी में भी उनके सामने पानी की समस्या नहीं आ रही है।
श्री पांडे ने गांवों में जलभागीदारी को लेकर अनूठा काम किया है। मेढ़ बनाने से खेतों में कई साल तक पानी को संरक्षित किया जा सकता है। इतना ही नहीं, उनकी प्रेरणा से मेढ़ों पर पेड़ लगाने शुरू किए गए, जिनकी जड़ें मिट्टी को जकड़कर रखती हैं। पेड़ लगाने से पर्यावरण भी संरक्षित हो रहा है।