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थायरॉयड से बचाए आहार एवं योग

हृदय रोग और मधुमेह के बाद भारत में अगर कोई रोग सबसे ज्यादा होता है तो वह है थायरॉयड। पुरुषों की तुलना में महिलाओं को थायरॉयड का खतरा अधिक होता है, खासकर गर्भावस्था या रजोनिवृत्ति के बाद। इस बीमारी से बचने और राहत पाने के लिए आहार में बदलाव और योग का सहारा भी लिया जा सकता है

Written byअंजू शर्मा`अंजू शर्मा`
Aug 26, 2022, 06:30 am IST
in भारत, स्वास्थ्य

भारत में हृदय रोग और मधुमेह के बाद सबसे ज्यादा होने वाली बीमारियों में पहला नाम थायरॉयड का आता है। यह हमारे गले में उपस्थित होता है जो थायरॉयड हार्मोन का उत्पादन करता है। इस हार्मोन से हमारे शरीर की कई गतिविधियां नियंत्रित होती हैं

थायरॉयड मनुष्य की गर्दन के आधार पर एक तितली के आकार की ग्रंथि होती है, जिसका वजन लगभग 20 ग्राम होता है। थायरॉयड ग्रंथि को हमारे जटिल, एंडोक्राइन सिस्टम की मास्टर ग्रंथि के रूप में भी जाना जाता है। यह ग्रंथि उपापचय (मेटाबॉलिज्म) और ऊर्जा को नियंत्रित करती है।

भारत में हृदय रोग और मधुमेह के बाद सबसे ज्यादा होने वाली बीमारियों में पहला नाम थायरॉयड का आता है। यह हमारे गले में उपस्थित होता है जो थायरॉयड हार्मोन का उत्पादन करता है। इस हार्मोन से हमारे शरीर की कई गतिविधियां नियंत्रित होती हैं। जैसे- आप कितनी तेजी से कैलोरी बर्न करते हैं या आपके दिल की धड़कन कितनी तेज है। थायरॉयड रोग के कारण हमारे शरीर में या तो बहुत अधिक या बहुत कम हार्मोन बनाने लगते हैं।

आपका थायरॉयड कितना ज्यादा या कितना कम हार्मोन बनाता है, इसके कारण आप अक्सर बेचैन या थका हुआ महसूस कर सकते हैं, या आपका वजन कम हो सकता है या बढ़ सकता है। महिलाओं में पुरुषों की तुलना में थायरॉयड रोग का खतरा अधिक रहता है, खासकर गर्भावस्था या रजोनिवृत्ति के बाद।

कारण और प्रभाव
थायरॉयड ग्रंथि तीन तरह के हार्मोन बनाती है- टी-3, टी-4 और कैल्सीटोनिन। टी-3 और टी-4 थायरोक्सिन, ये दोनों मिलकर कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा के चयापचय की देखभाल करते हैं। इनसे बनने वाले ट्राई आयडो थायरोनिन हॉर्मोन शरीर की तकरीबन सभी कोशिकाओं की रासायनिक प्रतिक्रिया को देखते हैं, जिससे शरीर के विभिन्न अंगों के उपापचय की गति को बढ़ावा मिलता है। ये शरीर में गरमाहट का भी ध्यान रखते हैं।

कैल्सीटोनिन का कार्य यह है कि अगर रक्त में कैल्शियम की मात्रा बढ़ जाए तो वह आस्टियोब्लास्ट को उकसाएगा। वह अतिरिक्त कैल्शियम को रक्त से निकालकर हड्डियों में डालता है। शरीर में आक्सीजन सही मात्रा में हो और कार्बन डाइआक्साइड सही परिमाण से बाहर निकले, इसकी देखभाल भी थायरॉयड ग्रंथि ही करती है। थायरॉयड ग्रंथि से आयोडीन निकलता है, जो घाव के जल्दी ठीक होने में मदद करता है। इसीलिए पुराने घाव को ठीक करने के लिए न्यूरोथेरैपी में 4-थायरॉयड (उपचार का नाम) देते हैं।

थायरॉयड ग्रंथि का स्त्री जननांगों से भी संबंध है। अत: महिलाओं की बीमारी में थायरॉयड देना लाभदायक होगा। अगर रक्त में टी-3, टी-4 की मात्रा कम हो तो उसे हाइपोथाइरॉएडिज्म तथा उसकी मात्रा बढ़ जाए तो उसे हाइपर थायरॉयड रीजन कहते हैं। थायरॉयड ग्रंथि यानी बढ़ जाने को गॉयटर कहते हैं। इसके कई कारण हैं-

  •  संक्रमण के कारण थायरॉयड ग्रंथि में जलन (प्रदाह)
  •  थायरॉयड ग्रंथि में ट्यूमर
  •  खाने में या पानी में आयोडीन की कमी

थायरॉयड ग्रंथि से भी ज्यादा मात्रा में निकलता है, लेकिन जरूरत के अनुसार शरीर में टी-4 को टी-3 में बदला जाता है। इस हार्मोन से शरीर का ताप नियंत्रित होता है। ये बीएमआर यानी चयापचय की गति को नियंत्रित करते हैं एवं सारे शरीर की कोशिकाओं को ठीक से काम करने के लिए उकसाते हैं। मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट के चयापचय पर इसका मुख्य प्रभाव है। इसीलिए जब थायरॉयड ग्रंथि हाइपो यानी कम काम करती है, तब मधुमेह का एक कारण बन जाता है, क्योंकि मधुमेह शुगर के चयापचय से जुड़ी बीमारी है। ये ग्रोथ हार्मोन के कार्य को उकसाते हैं एवं सेल्स के अंदर एटीपी बनाने की गति बढ़ाते हैं।

हाइपरथायरॉाडिज्म
हाइपरथायरायडिज्म में थायरॉयड ग्रंथि अति सक्रिय हो जाती है। इस प्रकार के थायरॉयड में हार्मोन का बहुत अधिक उत्पादन होता है। हाइपरथायरायडिज्म लगभग 1 प्रतिशत महिलाओं को प्रभावित करता है। पुरुषों में इसका कम होना आम बात है। हाइपरथायरायडिज्म का सबसे आम कारण ग्रेव्स रोग है, जो एक अतिसक्रिय थायरॉयड वाले लगभग 70 प्रतिशत लोगों को प्रभावित करता है। थायरॉयड पर गांठ भी एक स्थिति है, जिसे विषैली गांठदार गण्डमाला या बहुकोशिकीय गण्डमाला कहा जाता है। यह थायरॉयड ग्रंथि से बहुत अधिक हार्मोन के उत्पादन के कारण बन सकती है।

हाइपोथायरायडिज्म, हाइपरथायरायडिज्म के विपरीत होता है। इसमें थायरॉयड ग्रंथि अंडरएक्टिव हो जाती है और हार्मोन का पर्याप्त उत्पादन नहीं कर पाती। हाइपोथायरायडिज्म अक्सर हाशिमोटो रोग के कारण होता है। हाइपोथायरायडिज्म के ज्यादातर मामले उतने गंभीर नहीं होते। कभी-कभी यह अधिक गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है, जैसे- उच्च कोलेस्ट्रॉल और हृदय के रोग।

महिलाओं में थायरॉयड के लक्षण: थायरॉयड के प्रकार के आधार पर इसके लक्षण भी अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ विशेष लक्षणों के द्वारा महिलाओं में इस रोग का पता लगाया जा सकता है और सही समय पर लक्षणों को पहचान कर इसका इलाज किया जा सकता है। नीचे इस लेख में हमने बताया है कि महिलाओं में हाइपरथायरायडिज्म और हाइपोथायरायडिज्म की समस्या होने पर क्या-क्या लक्षण हो सकते हैं-

हाइपरथायरॉाडिज्म के लक्षण (महिलाओं में)

  • वजन घटना
  • गर्मी सहन न कर पाना
  • बार-बार मल त्याग करना
  •  कंपकंपाहट/झटके
  •  घबराहट और चिड़चिड़ापन
  • थायरॉयड ग्रंथि का बढ़ जाना
  • अनिद्रा
  •  मांसपेशियों में कमजोरी आना
  •  घबराहट या चिंता
  • डायरिया या दस्त
  •  थकान
  •  असहनीय ठंड लगना
  •  रुखे और भंगुर बाल
  •  याददाश्त की समस्या
  •  चिड़चिड़ापन और अवसाद
  •  कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाना
  •  हृदय गति धीमी हो जाना
  • कब्ज की समस्या

थायरॉइड महिलाओं को किस प्रकार प्रभावित करता है? पुरुषों की तुलना में महिलाओं को थायरॉयड रोग होने की अधिक संभावना होती है। आठ में से एक महिला को अपने जीवनकाल में थायराइड की समस्या अवश्य होती है। थायरॉयड के कारण महिलाओं में ये रोग पैदा हो सकते हैं-

मासिक धर्म के साथ समस्याएं : थायरॉयड रोग आपके मेंस्ट्रुअल साइकिल को नियंत्रित कर सकता है। बहुत अधिक या बहुत कम थायरॉयड हार्मोन आपके मासिक चक्र को बहुत हल्का, बहुत ज्यादा या अनियमित बना सकता है। थायरॉयड की बीमारी आपके मासिक चक्र को कई महीनों या उससे अधिक समय तक के लिए रोक सकती है, जिसे एमेनोरिया कहा जाता है। यदि आपका इम्यून सिस्टम थायरॉयड रोग का कारण बनता है, तो इससे आपकी अंडाशय सहित अन्य ग्रंथियां प्रभावित हो सकती हैं। इससे रजोनिवृत्ति (40 वर्ष की आयु से पहले) हो सकती है।

गर्भ धारण करने में समस्या : जब थायरॉयड रोग मासिक धर्म चक्र या मेंस्ट्रुअल साइकिल को प्रभावित करता है, तो यह ओव्यूलेशन को भी प्रभावित करता है। इससे महिलाओं को गर्भवती होने में कठिनाई हो सकती है।

गर्भावस्था के दौरान समस्याएं : गर्भावस्था के दौरान थायरॉयड की समस्या मां और बच्चे, दोनों के लिए स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकती है। कभी-कभी, थायरॉयड की समस्याओं के लक्षणों को रजोनिवृत्ति के लक्षण समझ लिया जाता है। थायरॉयड रोग, विशेष रूप से हाइपोथायरायडिज्म, के रजोनिवृत्ति के बाद विकसित होने की अधिक संभावना होती है।

थायरॉयड का इलाज : थायरॉयड का इलाज इसके लक्षणों के आधार पर और इसके प्रकार के आधार पर किया जाता है।

आहार और पोषण : प्रोटीन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और आयोडीन आपके थायरॉयड को सही से काम करने में मदद करते हैं। यह सुनिश्चित करें कि आप विटामिन बी, विटामिन ए और विटामिन सी से भरपूर आहार ले रहे हैं। यदि आपके खाने में पर्याप्त आयोडीन नहीं है, तो सेलेनियम लेने से हाइपोथायराडिज्म हो सकता है।

एहतियात
थायरॉयड के लिए किसी भी दवा या अन्य इलाज से पहले, आप भोजन को अपनी दवा बनाएं और सभी संसाधित जंक फूड, चीनी (जो आपके हार्मोन स्तर में भारी उतार-चढ़ाव पैदा करते हैं) और ग्लूटेन को बंद करें। इसके अलावा, एल-ग्लूटामाइन एक महत्वपूर्ण एमिनो एसिड है जो उच्च-ग्लाइसेमिक कार्बोहाइड्रेट के लिए क्रेविंग्स को कम करता है और चीनी की आदत को खत्म करने में मदद करता है। थायरॉयड से पीड़ित हों या नहीं हों, भोजन हमेशा आराम से एक जगह बैठकर, अच्छे से चबा कर खाएं। थायरॉयड ठीक करने के लिए कुछ पारंपरिक

उपाय –

  •  धनिये को रात में भिगो कर रख दें और सुबह उबाल लें। फिर छानकर उस पानी का खाली पेट सेवन करें। 21 दिन लगातार ऐसा करने से थायरॉयड रोग जड़ से खत्म होने की बात कही जाती है।
  • सुबह और शाम उज्जयी प्रणाम अवश्य करें। इससे आपके गले की ग्रंथि ठीक होगी।
  •  बाएं हाथ की हथेली में अंगूठे से नीचे अंदर की तरफ जो उभार वाला स्थान होता है, उसे कम से कम 2 मिनट तक दबाएं।

न्यूरोथेरैपी में ऐसे जटिल रोगों को बिना किसी दवा, बिना किसी साइड इफेक्ट्स और बिना किसी दर्द के ठीक करने की परंपरा है। यह थेरैपी नाड़ियों पर दबाव के माध्यम से इस प्रकार के रोगों के मूल कारण को समझकर उसको जड़ से खत्म करने का प्रयास करता है। इस थेरैपी में रोगों के लक्षणों को नहीं, बल्कि प्रणाली को ठीक किया जाता है। हालांकि अभी न्यूरोथेरैपी का परीक्षण आधुनिक विज्ञान ने नहीं किया है।

(लेखिका न्यूरोथेरैपिस्ट हैं)

Topics: आहार एवं योगथायरॉयड का इलाजकोलेस्ट्रॉलधनिये का खाली पेट सेवनथायरॉयड
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