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उदारीकरण के बिना कैसे आती दूरसंचार क्रांति

देश में डिजिटल मानस और परिवेश का विकास सुखद भविष्य की गारंटी

Written byबालेन्दु शर्मा दाधीचबालेन्दु शर्मा दाधीच
May 24, 2022, 06:45 pm IST
inभारत, विज्ञान और तकनीक

देश में डिजिटल मानस और परिवेश का विकास सुखद भविष्य की गारंटी है क्योंकि अभी कम से कम दो दशकों तक आर्थिक विकास में दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी का दबदबा बना रहेगा

दूरसंचार क्रांति की शुरुआत में निजी क्षेत्र को प्रवेश देने का सिलसिला 1984 में सबस्क्राइबर टर्मिनल उपकरणों के विनिर्माण की इजाजत के साथ शुरू हुआ था। लगभग सात साल बाद, पीवी नरसिंह राव के प्रधानमंत्रित्व काल में बहुत सारे क्षेत्रों से सरकारी अंकुश हटाए जाने लगे और निजी क्षेत्र के लिए दरवाजे खुलने लगे। 1991 में दूरसंचार उपकरणों के निर्माण का क्षेत्र देशी-विदेशी कंपनियों के लिए खोल दिया गया जब एल्काटेल, एटी एंड टी, एरिक्सन, फुजित्सु और सीमेन्स जैसी कंपनियां भारत आर्इं। उदारीकरण और वैश्वीकरण के इस शुरूआती दौर में नई दूरसंचार नीति आई, 27 शहरों में रेडियो पेजिंग के लाइसेंस दिए गए और मूलभूत टेलीफोन सुविधाओं के क्षेत्र में भी निजी क्षेत्र को आमंत्रित कर दिया गया। नवंबर 1994 में चार महानगरों में सेल्युलर मोबाइल सेवाओं के लाइसेंस दिए गए।

विकास और उदारीकरण का यह सिलसिला अटल बिहारी वाजपेयी के दूसरे प्रधानमंत्रित्व काल में और आगे बढ़ा जब 1999 में राष्ट्रीय दूरसंचार नीति आई और दूरसंचार क्षेत्र के सुधारों ने मजबूती हासिल की। तब से 2जी, 3जी और 4जी से होते हुए जमाना 5जी तक आ पहुंचा है और हम लैंडलाइनों से होते हुए मोबाइल फीचर फोन और स्मार्ट फोन के दौर में आ पहुंचे हैं।

अतीत की जिन अन्य उपलब्धियों का जिक्र किया जाना आवश्यक है, उनमें 1960 के दशक की उपग्रह और संचार क्रांति प्रमुख है जब भारत ने अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत की और अपनी सभी सीमाओं के बावजूद आखिरकार खुद को इस क्षेत्र की सबसे अग्रणी शक्तियों के रूप में स्थापित किया। जब 2017 में इसरो ने एक ही अंतरिक्षयान से 104 उपग्रहों को अंतरिक्ष में स्थापित करने का कारनामा कर दिखाया और उससे पहले अपने पहले ही मंगल अभियान को सफलता से संपन्न कर लिया तो इस क्षेत्र में भारत की दक्षता तमाम प्रश्नचिह्नों से मुक्त हो गई। अंतरिक्ष कार्यक्रम से दूरसंचार का उतना ही गहरा संबंध है जितना कि रक्षा क्षेत्र का।

मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौर में दूरसंचार क्रांति घर-घर तक पहुंची है। डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियान और संदेश अपना असर दिखा रहे हैं और दूरसंचार क्षेत्र गति पकड़ चुका है। उसने सरकारी सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने से लेकर सूचना क्रांति तक में अहम भूमिका निभाई है। कोविड काल की संपर्क शून्यता में मोबाइल फोनों और डेटा सेवाओं ने तमाम व्यवस्थाओं को चलाए रखने में योगदान दिया।

आनलाइन कारोबार, शिक्षा, प्रशासन, संचार, संवाद, मनोरंजन, रचनात्मकता और यहां तक कि रोजमर्रा की उत्पादकता में भी दूरसंचार उपकरणों, संचार सेवाओं और इंटरनेट कनेक्टिविटी की प्रधान भूमिका हो चली है। भारत आज दुनिया में डेटा के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक है जहां ट्राई के आंकड़ों के अनुसार हर सबस्क्राइबर 11 जीबी डेटा की मासिक खपत कर रहा है। रिलायंस जियो ने तो बेहद सस्ती दरों पर घर-घर मोबाइल सेवा पहुंचाकर अपना, जनता और देश का भला किया है। प्रतिद्वंद्विता में दूसरी दूरसंचार कंपनियां भी सस्ती और अच्छी सेवाएं दे रही हैं।

उपकरणों के विनिर्माण की बात करें तो भारत चीन का विकल्प बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। एप्पल का आइफोन 13 श्रीपेरुम्बुदूर में विनिर्मित हो रहा है तो एरिक्सन भारत में 5जी उपकरण बनाने जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) की सफलता आशातीत है। लगभग 41 हजार करोड़ रुपये की इस प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 22 कंपनियों ने भारत में मोबाइल फोनों के विनिर्माण में रुचि दिखाई है। इनमें लावा और माइक्रोमैक्स जैसी भारतीय कंपनियों के साथ-साथ एप्पल और सैमसंग जैसी वैश्विक कंपनियां भी हैं।

डिजिटल इंडिया की बदौलत एक अरब भारतीयों को आनलाइन लाने की दिशा में बड़ी सफलता प्राप्त की जा चुकी है। सस्ती दरों पर उपलब्ध स्मार्टफोनों के साथ-साथ सस्ती दरों पर इंटरनेट कनेक्टिविटी (डेटा) की उपलब्धता और दूरसंचार के विश्वस्तरीय आधारभूत ढांचे ने डिजिटलीकरण की अद्भुत क्रांति को साकार कर दिखाया है। जिस अंदाज में लाखों-करोड़ों भारतीय डिजिटल माध्यमों से भुगतान कर, आयकर रिटर्न भर रहे हैं, रेलवे टिकटों की बुकिंग करा रहे हैं, बैंकिंग सेवाओं एवं ईकॉमर्स का उपयोग कर रहे हैं और सरकारी तंत्र से जुड़ चुके हैं-वह दुनिया के लिए आश्चर्यजनक उपलब्धि है जिसका मुकाबला अमेरिका और ब्रिटेन जैसे विकसित देश भी नहीं कर सकते। देश में डिजिटल मानस और परिवेश का विकसित होना सुखद भविष्य की गारंटी है क्योंकि अभी कम से कम दो दशकों तक आर्थिक विकास में दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी का दबदबा बना रहेगा।
(लेखक माइक्रोसॉफ्ट में ‘निदेशक- भारतीय भाषाएं और सुगम्यता’ के पद पर कार्यरत हैं)

Topics: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीडिजिटल मानसडिजिटल इंडियादूरसंचार क्रांतिईकॉमर्स का उपयोग
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