उत्तराखंड : हिमालयी राज्यों में हीट वेव चिन्ताजनक, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी
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होम भारत उत्तराखंड

उत्तराखंड : हिमालयी राज्यों में हीट वेव चिन्ताजनक, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो
May 14, 2022, 06:16 pm IST
inउत्तराखंड

जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा के मुद्दों पर लगातार सक्रिय विशेषज्ञ चंद्रभूषण ने उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में “हीट वेव” और “हीट डेज” की संख्या में हुई बढ़ात्तरी पर चिन्ता जताई है। उन्होंने आगाह किया कि यदि हमने जरूरी कदम नहीं उठाये तो आने वाले समय में स्थितियां हाथ से निकल जाएंगी और आज की तुलना में स्थिति और चिंताजनक और भयावह होगी।

श्री चंद्रभूषण ने कहा कि दुनिया में औद्योगिक क्रांति शुरू होने से पहले धरती का तापमान 3 लाख वर्षों में एक डिग्री बढ़ा था, लेकिन उसके बाद के सिर्फ 150 से 170 वर्षों में ही एक डिग्री की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि धरती का तापमान 1 डिग्री बढ़ने का अर्थ यह है कि कई जगहों पर यह 5 से 6 डिग्री तक बढ़ जाता है।  इसका अर्थ यह भी है कि हीट डेज की संख्या बढ़ी है।

उन्होंने कहा कि हिमालयी राज्यों में भी हीट डेज की संख्या बढ़ी है। हिमाचल प्रदेश में अप्रैल के महीने में हीट वेव डेज की संख्या 21 और उत्तराखंड में 4 थी। पहाड़ी इलाकों में यदि तापमान 30 डिग्री से ज्यादा और मैदानी क्षे़त्रों में 40 डिग्री से ज्यादा दर्ज किया जाता है तो उसे हीट डे कहा जाता है। इसके अलावा यदि किसी दिन तापमान सामान्य से 4.5 से 6.5 डिग्री तक ज्यादा हो तो उसे भी हीट डे माना जाता है। उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में अप्रैल के महीने में कई दिन ऐसे थे, जब अधिकतम तापमान सामान्य से 7 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा दर्ज किया गया।

चंद्रभूषण का कहना है कि देहरादून की स्थिति अब पूरी तरह से बदल चुकी है। कुछ वर्ष पहले तक देहरादून में आमतौर पर पंखे की भी जरूरत नहीं होती थी, लेकिन अब अप्रैल में ही एसी चलने लगते हैं। पिछले 10 वर्षों में सभी हिमालयी राज्यों में हीट डे की संख्या बढ़ी है।

उनका कहना है कि उत्तराखंड में हीट वेव और हीट डेज की संख्या बढ़ाने में जंगलों की आग का भी महत्वपूर्ण योगदान है। 10-15 साल पहले राज्य में जंगलों में सालाना जहां आग की 150 तक घटनाएं होती थी, लेकिन अब इनकी संख्या 3 से 4 हजार तक पहुंच रही है। साथ ही हीट वेव भी जंगलों की आग की घटनाएं बढ़ाने में सहायक हो रही है। उन्होंने विकास के नाम पर बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाने को चिन्ताजनक बताया। उनका कहना था कि जिन शहरों में पेड़ों की संख्या ज्यादा है, वहां अपेक्षाकृत तापमान कम होता है। उन्होंने पर्वतीय क्षे़त्रों में परंपरागत घरों की जगह कंक्रीट के घर बनाने की प्रवृत्ति को भी गलत बताया।

उनका कहना था यदि पर्वतीय क्षेत्रों में इसी तेजी से निर्माण होते रहे तो आने वाले 20-30 वर्षों में पहाड़ों में भी दिल्ली जैसी स्थिति बन जाएगी। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा के दौरान तीर्थ स्थलों की क्षमता और वहां की ईकोलॉजी का ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने घरों को ठंडा रखने के लिए प्राकृतिक उपाय करने की जरूरत पर भी जोर दिया।

श्री चंद्रभूषण के साथ संवाद कार्यक्रम एस डी सी फाउंडेशन के अध्यक्ष अनूप नौटियाल ने चर्चा सत्र में ध्यान दिलाया कि हिमालय राज्यो में पेड़ो का कटना, वाहनों के धुएं का बढ़ना,जंगलों में आग की घटनाओं में वृद्धि भी “हीट वेव” का भविष्य में  एक बड़ा कारण हो सकता है।

Topics: Uttarakhand and HimachalHydro-wind changeहीट वेवहिमालय के राज्यउत्तराखंड और हिमाचलजल वायु परिवर्तनHeat waveHimalayan states
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