जर्मनी में मौजूद हैं 1950 'जिहादी', अपना घिनौना चेहरा दिखा रहा कट्टर इस्लामी उग्रवाद
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जर्मनी में मौजूद हैं 1950 ‘जिहादी’, अपना घिनौना चेहरा दिखा रहा कट्टर इस्लामी उग्रवाद

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Feb 26, 2022, 10:25 pm IST
in विश्व, दिल्ली
जर्मनी के नागरिक 'कट्टर इस्लामवादी शरणार्थियों' के विरुद्ध लगातार प्रदर्शन करते आ रहे हैं

जर्मनी के नागरिक 'कट्टर इस्लामवादी शरणार्थियों' के विरुद्ध लगातार प्रदर्शन करते आ रहे हैं

इस्लामवादियों ने देश की सूरत बदलने की कोशिश की। कई आतंकी घटनाएं हुईं। जिहाद का घिनौना रूप जगह—जगह दिखाई देने लगा। आईएस की जिहादी विचारधारा सेकुलर युरोपीय युवाओं पर अपना असर दिखा रही है

पिछले कुछ सालों में 'मानवीयता की दुहाई' देते हुए कई यूरोपीय देशों के लोग सड़कों पर उतर आए थे कि पूर्वी एशिया में आतंकवाद और गृहयुद्ध में पिसते लोगों को अपने यहां शरण देनी चाहिए। सेकुलर मीडिया ने एक के बाद एक लेख छाप—छापकर 'शरणार्थियों' के लिए दरवाजे खोलने का माहौल बना दिया था। इसी का परिणाम था कि सीरिया, इजिप्ट, तुर्की, यमन आदि देशों के हजारों—लाखों शरणार्थियों ने जर्मनी, फ्रांस सहित यूरोप के कई देशों में डेरा डाल दिया। 

धीरे—धीरे 'शरणार्थियों' ने शरण देने वाले देशों में ही अपनी धमक दिखानी शुरू कर दी। संसाधनों का भरपूर दोहन करने के साथ ही वहां व्यवस्थाओं और कायदों को ठेंगा दिखाते हुए, नमाज के बहाने सड़कों, पार्किंग स्थलों को घेरना शुरू कर दिया, अवैध मस्जिदें और दरगाहें और मदरसे खड़े हो गए। सरकार पर ऐसा दबाव डाला गया कि अलग अधिकारों की मांग होने लगी। 

फ्रांस में इस्लाम का वैसा ही कट्टर स्वरूप सामने आने लगा कि सरकार को कई मस्जिदों और मदरसों को कट्टर इस्लाम का प्रचार करने के दोष में बंद करना पड़ा। बुर्के और हिजाब के विरुद्ध कानून बनाने पड़े। इस्लामवादियों ने देश की सूरत बदलने की कोशिश की। कई आतंकी घटनाएं हुईं। जिहाद का घिनौना रूप जगह—जगह दिखाई देने लगा। आईएस की जिहादी विचारधारा सेकुलर युरोपीय युवाओं पर अपना असर दिखाने लगी। 

 

जर्मनी की विदेश गुप्तचरी सेवा ने इसी महीने अलग से सावधान किया है कि अफगानिस्तान में तालिबान के कुर्सी पर आ बैठने के बाद जर्मनी से अनेक जिहादी तत्व वहां जा सकते हैं। पिछले कुछ सालों में सीरिया और इराक में आईएसआईएस का प्रभाव बढ़ने के बाद से जर्मनी से 1150 लोग उन देशों को जा चुके हैं। 
 

 

जर्मनी भी इस अभिशाप से अछूता नहीं रहा। जिन यूरोपीय अधिकारियों ने अपने अरब संपर्कों के साथ गठजोड़ करके जिस तरह इस्लामी तत्वों को यूरोप में आ बसने और 'विविधता' का सूत्र बनने के लिए अपनी अव्रजन नीतियों को बदलकर न्योता था आज वही उनके लिए नासूर बनते जा रहे हैं। 

जिहाद वॉच में रॉबर्ट स्पेंसर लिखत हैं कि जर्मन अधिकारियों के संज्ञान में 1950 लोग आए हैं जो जिहादी हैं या जिहादी बनने की सोच रखते हैं। ध्यान रहे, ये संख्या संज्ञान में आए लोगों की है। 22 फरवरी 2022 के द नेशनल न्यूज, यू.के. में टिम स्टिकिंग्स लिखते हैं कि जर्मन सरकार ने खुलासा किया है कि उनके यहां करीब 1950 उग्र इस्लामी अतिवादी हैं। गृह मंत्रालय का मानना है कि ये हिंसक या हिंसक कार्रवाइयों के लिए तत्पर पाए गए हैं।

ये जर्मनी में उन 29000 लोगों में से सबसे खतरनाक पाए गए लोगों की संख्या है जिनमें इस्लामी उग्रवाद की तरफ झुकाव है। जर्मनी में करीब 55 लाख मुस्लिम रहते हैं। जर्मन मंत्रियों का मानना है कि चरमपंथ जर्मनी की संवैधानिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरा है।

जर्मनी की विदेश गुप्तचरी सेवा ने इसी महीने अलग से सावधान किया है कि अफगानिस्तान में तालिबान के कुर्सी पर आ बैठने के बाद जर्मनी से अनेक जिहादी तत्व वहां जा सकते हैं। पिछले कुछ सालों में सीरिया और इराक में आईएसआईएस का प्रभाव बढ़ने के बाद से जर्मनी से 1150 लोग उन देशों को जा चुके हैं। 

यूरोपीय देशों से मिल रहे ऐसेे समाचार जिहाद और कट्टर इस्लामवाद के बढ़ते दुष्प्रभाव के लिए सावधान करने के लिए पर्याप्त हैं। आज यूरोप के कई देश 'शरणार्थियों' के प्रति अपनी 'उदारता' पर पछता रहे हैं, क्योंकि वहां के कभी शांत रहने वाले जनजीवन में उथलपुथल मच चुकी है।
 

Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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