यूक्रेन-रूस युद्ध में मिसाइलों और लड़ाकू विमानों की बमों की बौछारों के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान देकर सबको चौंका दिया है। उन्होंने एक हैरान करने वाली संभावना जताई है। ट्रंप ने कहा है कि चीन कभी भी ताइवान पर हमला बोल सकता है। उल्लेखनीय है कि अभी दो दिन पूर्व ही ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने भी ताइवान को लेकर कुछ ऐसी ही आंशका व्यक्त की थी।
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल में एक साक्षात्कार में कहा है कि अब ताइवान की बारी है। उन्होंने कहा कि रूस ने जिस तरह यूक्रेन के दो क्षेत्रों को स्वतंत्र देश की मान्यता दी है उससे प्रेरणा लेकर चीन ताइवान पर कुछ ऐसी ही कार्रवाई कर सकता है। ट्रम्प का दावा है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग बहुत जल्दी ताइवान पर कब्जा करने की कोशिश करेंगे।
बता दें कि अभी दो दिन पहले ही ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने भी कुछ ऐसी ही आशंका व्यक्त की थी। जॉनसन ने कहा था कि चीन के पूर्वी यूरोप में चल रहे यूक्रेन संकट की आड़ में ताइवान के विरुद्ध सामरिक कार्रवाई करने के संकेत हैं।
अमेरिका और ब्रिटेन के दो शीर्ष नेताओं के ये बयान बहुत गंभीरता से लिए जा रहे हैं। ताइवान पर चीन पहले से हमलावर है और आएदिन अपने लड़ाकू विमान उसके आसमान में भेजकर उकसावे की कार्रवाई करता रहता है। इसके अलावा चीन उसे स्वतंत्र देश मानने वाले राष्ट्रों, जैसे अमेरिका, जापान, आस्ट्रेलिया आदि को खुलेआम धमका चुका है कि 'चीन के उस हिस्से को स्वतंत्र देश कहकर संबोधित न किया जाए'। अब इन दो नेताओं के ऐसे बयानों के बाद ताइवान के संदर्भ में दक्षिण चीन सागर में पहले से जारी तनाव में वृद्धि हो सकती है।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने यह दावा एक रेडियो चैनल को दिए साक्षात्कार में किया है। बातचीत में उन्होंने कहा है कि रूस ने दोनेत्स्क तथा लुगांस्क को पीपुल्स रिपब्लिक की मान्यता दे दी है। रूस के इस कदम से चीन की सरकार प्रेरणा लेकर ताइवान को अपने शिकंजे में कसने की दिशा में बढ़ने की कोशिश करेगी। ट्रंप ने आगे कहा कि अगर हम वहां, यानी व्हाइट हाउस में, होते तो ऐसा हो ही नहीं सकता था।

ताइवानी वायुसेना: राष्ट्रपति जिनपिंग (बाएं) और ताइवान की राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन (दाएं)
ताइवान पर चीन पहले से हमलावर है और आएदिन अपने लड़ाकू विमान उसके आसमान में भेजकर उकसावे की कार्रवाई करता रहता है। इसके अलावा चीन उसे स्वतंत्र देश मानने वाले राष्ट्रों, जैसे अमेरिका, जापान, आस्ट्रेलिया आदि को खुलेआम धमका चुका है कि 'चीन के उस हिस्से को स्वतंत्र देश कहकर संबोधित न किया जाए'। अब इन दो नेताओं के ऐसे बयानों के बाद ताइवान के संदर्भ में दक्षिण चीन सागर में पहले से जारी तनाव में वृद्धि हो सकती है।
उन्होंने पुतिन के संदर्भ में कहा कि पुतिन इस मौके की तलाश में थे। ट्रंप ने खुलकर कहा, ''मुझे पता था कि यूक्रेन हमेशा से उनके दिमाग में था। मैंने इस बारे में पुतिन से बात भी की थी। मैंने उनसे कहा था कि वे ऐसा नहीं कर सकते। लेकिन यह साफ दिखता था कि उनकी नीयत यूक्रेन को कब्जाने की रही थी। अब चीन भी ठीक इसी तरह का कुछ कर सकता है। चीन का अगला निशाना ताइवान होगा''।
यह पूछने पर कि, क्या चीन ताइवान पर कब्जा करने वाला है। ट्रम्प ने इस सवाल के जवाब में कहा, ''हां, बिल्कुल। चीनी ओलंपिक खेलों के पूरा होने के इंतजार में थे। अब ये खत्म हो चुके हैं''। ट्रम्प ने चुटकी लेते हुए कहा कि उन्होंने अपनी स्टॉपवॉच देख ली है। एक अन्य सवाल के जवाब में ट्रम्प का कहना था कि चीन हमेशा से ताइवान को अपने में मिलाने की इच्छा रखता आया है। वह ताइवान पर जबरदस्त हमला कर सकता है।
जैसा पहले बताया, अभी दो दिन पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन भी ठीक इसी तरह की आशंका जता चुके हैं। जॉनसन ने कहा है कि यदि पश्चिम के देश यूक्रेन की आजादी का समर्थन करने के अपने किए वादों को अंजाम तक पहुंचाने में नाकाम रहते हैं, तो दुनियाभर में इसके गंभीर नतीजे देखने में आएंगे। जॉनसन ने म्यूनिख में सम्पन्न सुरक्षा सम्मेलन में यह बात कही थी। ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि हम राष्ट्रपति पुतिन के इरादे को पूरी तरह से नहीं जानते हैं, लेकिन अभी जैसे संकेत मिल रहे हैं, वे बहुत गंभीर हैं। उनका कहना है कि यदि यूक्रेन मुसीबत में है, तो इसका झटका दुनिया भर में महसूस होगा, जिसे पूर्वी एशिया में भी महसूस किया जाएगा, ताइवान में महसूस किया जाएगा।
इस संदर्भ में उल्लेखनीय है कि रूस ने जब यूक्रेन पर आक्रमण किया था, उसी दिन यानी 24 फरवरी को ही चीन के कई लड़ाकू विमान ताइवान के हवाई क्षेत्र में जा पहुंचे थे। लेकिन ताइवान की चौकन्नी वायुसेना ने चीन के लड़ाकू विमानों को फौरन खदेड़ बाहर किया था।
इससे एक दिन पहले ताइवान की राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन ने यूक्रेन संकट पर गठित राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की एक बैठक में ताइवान सेना और वायुसेना की सतर्कता का स्तर बढ़ाने की अपील की थी। ताइवान की राष्ट्रपति ने कहा था कि कुछ विदेशी ताकतें पूर्वी यूरोप में जारी संकट के माध्यम से ताइवान के नागरिकों के मन पर चोट करने की, उनका मनोबल गिराने की कोशिश कर रही हैं।











