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जाति के कपोल कुचक्र से बचें, दूसरों को भी बचाएं

Written byPanchjanyaPanchjanya
Feb 8, 2022, 05:16 am IST
in भारत, मत अभिमत, दिल्ली
प्रतीकात्मक चित्र

प्रतीकात्मक चित्र

महाभारत लिखने वाले वेद व्यास भी मछुआरे थे, पर महर्षि बन गए। वे गुरुकुल चलाते थे। विदुर, जिन्हें महापंडित कहा जाता है, एक दासी के पुत्र थे। वे हस्तिनापुर के महामंत्री बने। उनकी लिखी हुई विदुर नीति राजनीति का एक महाग्रंथ है। भीम ने वनवासी हिडिम्बा  से विवाह किया। श्रीकृष्ण दूध का व्यवसाय करने वाले परिवार से थे। उनके भाई  बलराम खेती करते थे और हमेशा हल साथ रखते थे। यादव क्षत्रिय  रहे हैं, कई प्रांतों पर शासन किया और श्रीकृष्ण सबके पूजनीय हैं।

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सम्राट शांतनु  ने एक मछुआरे की पुत्री सत्यवती  से विवाह किया। उनका बेटा ही राजा बने, इसलिए देवव्रत (भीष्म पितामह) ने विवाह नहीं करने की भीष्म प्रतिज्ञा ली। सत्यवती के बेटे बाद में क्षत्रिय बन गए, जिनके लिए भीष्म आजीवन अविवाहित रहे, क्या उनका शोषण होता होगा?

महाभारत लिखने वाले वेद व्यास भी मछुआरे थे, पर महर्षि बन गए। वे गुरुकुल चलाते थे। विदुर, जिन्हें महापंडित कहा जाता है, एक दासी के पुत्र थे। वे हस्तिनापुर के महामंत्री बने। उनकी लिखी हुई विदुर नीति राजनीति का एक महाग्रंथ है। भीम ने वनवासी हिडिम्बा  से विवाह किया। श्रीकृष्ण दूध का व्यवसाय करने वाले परिवार से थे। उनके भाई  बलराम खेती करते थे और हमेशा हल साथ रखते थे। यादव क्षत्रिय  रहे हैं, कई प्रांतों पर शासन किया और श्रीकृष्ण सबके पूजनीय हैं। उन्होंने विश्व को गीता जैसा ग्रंथ दिया।

राम के साथ वनवासी निषादराज गुरुकुल में पढ़ते थे। उनके पुत्र लव-कुश महर्षि वाल्मीकि के गुरुकुल  में पढ़े, जो  वनवासी थे और पहले डाकू थे। यह हो गई वैदिक काल की बात। स्पष्ट है कि कोई किसी का शोषण नहीं करता था। सबको शिक्षा का अधिकार प्राप्त था। अपनी योग्यता के आधार पर कोई भी शीर्ष पद तक पहुंच सकता था। वर्ण सिर्फ काम के आधार पर थे, जो बदले जा सकते थे। आज के अर्थशास्त्र में इसे ही डिविजन आॅफ लेबर यानी श्रम विभाजन कहते हैं।

इसी तरह, प्राचीन काल में भारत के सबसे बड़े जनपद मगध पर जिस नन्द वंश का राज रहा, वे जाति से नाई थे। नन्द वंश की शुरुआत महापद्मनंद ने की थी, जो राजा के नाई थे। बाद में वे राजा बन गए और फिर उनके वंशज क्षत्रिय ही कहलाए। उसके बाद  मौर्य वंश  का पूरे देश पर राज हुआ, जिसकी शुरुआत  चन्द्र्रगुप्त से हुई, जो कि एक मोर पालने वाले परिवार से थे। एक  ब्राह्मण चाणक्य ने  उन्हें सम्राट बनाया। 506 साल देश पर मौर्यों का राज रहा। फिर  गुप्त वंश  का राज आया, जो अस्तबल चलाते थे  और घोड़ों का व्यापार करते थे। गुप्तों का राज 140 साल तक रहा। प्राचीन काल में केवल  पुष्यमित्र शुंग  के 36 साल के राज को छोड़कर 92 प्रतिशत समय तक देश में शासन उन्हीं का  रहा, जिन्हें आज दलित-पिछड़ा कहते हैं, तो शोषण कहां से हो गया? यहां भी कोई शोषण वाली बात नहीं है।

फिर शुरू होता है मध्यकालीन भारत का समय जो सन् 1100-1750 ई. तक है। इस दौरान अधिकतर समय, अधिकतर जगह मुस्लिम शासन रहा। अंत में  मराठों  का उदय हुआ। बाजीराव पेशवा, जो कि ब्राह्मण थे, ने गाय चराने वाले गायकवाड़  को गुजरात का राजा बनाया, चरवाहा जाति के होलकर को मालवा का राजा बनाया। अहिल्या बाई होलकर खुद बहुत बड़ी शिवभक्त थीं। उन्होंने ढेरों मंदिर और गुरुकुल बनवाए। 

मीराबाई जो कि राजपूत थीं। उनके गुरु रविदास एक चर्मकार थे। रविदास के गुरु रामानंद, जो कि ब्राह्मण थे। यहां भी शोषण वाली बात कहीं नहीं है। मुगलकाल से देश में गंदगी शुरू हो गई  और यहां से पर्दा प्रथा, गुलाम प्रथा, बाल विवाह  जैसी कुरीतियों की शुरुआत हुई।

1800-1947 ई. तक अंग्रेजों का शासन  रहा और यहीं से जातिवाद शुरू हुआ। ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति के तहत उन्होंने ऐसा किया। अंग्रेज अधिकारी  निकोलस डार्क की किताब ‘कास्ट आफ माइंड’ में मिल जाएगा कि कैसे अंग्रेजों ने जातिवाद, छुआछूत को बढ़ाया और कैसे स्वार्थी भारतीय नेताओं ने अपने स्वार्थ के लिए इसका राजनीतिकरण किया।

इन हजारों सालों के दौरान देश में कई विदेशी आए, जिन्होंने भारत की सामाजिक स्थिति पर किताबें लिखीं, जैसे कि मेगास्थनीज की ‘इंडिका’, फाहियान, ह्वेनत्सांग और अलबरूनी आदि ने कहीं भी नहीं लिखा कि यहां किसी का शोषण होता था।

योगी आदित्यनाथ, जो ब्राह्मण नहीं हैं, गोरखपुर मंदिर के महंत हैं। पिछड़ी जाति की उमा भारती महामंडलेश्वर रही हैं। जन्म आधारित जातीय व्यवस्था हिंदुओं को कमजोर करने के लिए लाई गई थी। इसलिए हिंदुस्थानी (हिंदू धर्म) होने पर गर्व करें और घृणा, द्वेष और भेदभाव के षड्यंत्र से खुद भी बचें और औरों को भी बचाएं।
 

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