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अमेरिका : अब खुलेगी चीन के साइबर हमलों की पोल

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jul 20, 2021, 02:40 pm IST
inदिल्ली

चीन बदनाम है सरकारी शह पर साइबर हैकिंग के लिए  (प्रतीकात्मक चित्र)


नाटो देशों के साथ अमेरिका अपनी महत्वपूर्ण सुरक्षा एजेंसियों की मदद से चीनी हैकर्स की शरारतों को दुनिया के सामने उजागर करेगा

खबर है कि अमेरिका और सहयोगी देश एक साझी रणनीति पर काम कर रहे हैं जिससे चीन द्वारा विश्व के प्रमुख संस्थानों पर साइबर हमलों का खुलासा भी होगा और उसका इलाज भी।

पिछले लंबे समय से चीन द्वारा विभिन्न देशों के महत्वपूर्ण संस्थानों की साइबर हैकिंग, साइबर हमलों और व्यवस्था में व्याधियां लाने की हरकतें देखने में आ रही हैं। सबसे ताजा उदाहरण है पिछले दिनों ईरान के रेलवे नेटवर्क का जड़ होना, जिसके पीछे चीनी साइबर हमले का हाथ बताया जा रहा है। चीन में बैठे हैकर्स संभवत: सरकारी शह पर दूसरे देशों की रक्षा, वित्त, व्यापारिक, लोकसेवा आदि क्षेत्रों के बड़े संस्थानों के तंत्र को जड़ करने की हरकतें करते रहे हैं। भारत में भी विमान सेवा और दूरसंचार से जुड़ी कुछ कंपनियों को साइबर हैंकिंग का निशाना बनाया गया था।

नाटो देशों ने भी चीन की साइबर हरकतों की अनेक अवसरों पर निंदा की है। इन हमलों के माध्यम से चीन में बैठे हैकर धन वसूली, क्रिप्टो जैकिंग, आर्थिक हेराफेरी और चोरी जैसे अपराध करते हैं। पता चला है कि अमेरिका चीन के हैकर्स और चीन की हैकिंग तकनीक का खुलासा राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी, साइबर सुरक्षा, विनिर्माण सुरक्षा एजेंसी, जांच ब्यूरो, एनएसए, सीआईएसए तथा एफबीआई के माध्यम से करेगा।

लेकिन अब पता चला है अमेरिका ने कमर कस ली चीन के साइबर हमलों की विश्वव्यापी हरकतों के चलन से पर्दा हटाने की। इसको उजागर करने के बाद उसका प्रतिकार करने और रोकने के कदम उठाए जाएंगे। उसके विरुद्ध आगे कार्रवाई की जाएगी। अमेरिका के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, अमेरिका और उसके सहयोगी देश चीन की साइबर हरकतों को बेपर्दा करने की ओर हैं।

गत 19 जुलाई को बाइडेन प्रशासन की तरफ से बयान में स्पष्ट कहा गया कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश चीन के साइबर हमलों के प्रति चिंतित हैं और इन्हें रोकने में कोई कोर—कसर नहीं छोड़ी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह चलन अमेरिका के लिए आर्थिक और देश की सुरक्षा के संदर्भ में खतरनाक है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने चीन पर वैश्विक साइबर हैकिंग अभियान चलाने का आरोप लगाया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि अमेरिका, उसके सहयोगी चीन की नफरत से उपजी साइबर हरकतों को दुनिया के सामने बेपर्दा कर देंगे। और न सिर्फ चीन को बेपर्दा करेंगे बल्कि उन हरकतों का मुकाबला करके सटीक समाधान भी करेंगे। चीन की इन गतिविधियों के खिलाफ अब अमेरिका नाटो, यूरोपीय संघ, कनाडा, ब्रिटेन, जापान, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के साथ खड़ा है।

उल्लेखनीय है कि नाटो देशों ने भी चीन की साइबर हरकतों की अनेक अवसरों पर निंदा की है। इन हमलों के माध्यम से चीन में बैठे हैकर धन वसूली, क्रिप्टो जैकिंग, आर्थिक हेराफेरी और चोरी जैसे अपराध करते हैं। पता चला है कि अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी, साइबर सुरक्षा और विनिर्माण सुरक्षा एजेंसी तथा जांच ब्यूरो, एनएसए, सीआईएसए तथा एफबीआई के माध्यम से उस चीनी तकनीक से पर्दा हटाएगा जिसको इस्तेमाल करके चीन के धूर्त हैकर दुनिया के अनेक देशों को बेवजह परेशान कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि चीन पर इससे पहले भी ठीक ऐसे आरोप लगे थे, उस वक्त चीन ने बेचारगी दिखाते हुए खुद को भी साइबर हमलों का शिकार बताया था।
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