विहिप के कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा : ''प्रस्तावित जनसंख्या कानून में एक बच्चे की नीति पर हो पुनर्विचार''
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विहिप के कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा : ”प्रस्तावित जनसंख्या कानून में एक बच्चे की नीति पर हो पुनर्विचार”

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jul 13, 2021, 11:19 am IST
inदिल्ली

12 जुलाई को विश्व हिंदू परिषद ने उत्तर प्रदेश के राज्य विधि आयोग को एक पत्र भेजकर अनुरोध किया है कि एक बच्चे के लिए प्रोत्साहन के प्रस्ताव पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। यह भी कहा गया है कि इससे आने वाले समय में अनेक गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।  

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित जनसंख्या नियंत्रण कानून का स्वागत करते हुए उसमें से एक बच्चे की नीति को हटाने का आग्रह किया है। राज्य विधि आयोग को भेजे सुझाव में विहिप के केंद्रीय कार्याध्यक्ष एडवोकेट श्री आलोक कुमार ने कहा है कि जनसंख्या नियंत्रण और परिवार में दो बच्चों की नीति को प्रोत्साहन देने के प्रस्तावित कानून के उद्देश्य से परिषद सहमत है किन्तु एक बच्चे के लिए प्रोत्साहन के प्रस्ताव से जनसंख्या में नकारात्मक वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।  
श्री आलोक कुमार ने कहा है कि प्रस्तावित कानून में निश्चित समय सीमा में कुल प्रजनन दर 1.7 तक लाने का लक्ष्य रखा गया है, जिस पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। विशेष तौर पर एक ही बच्चा होने पर सरकारी कर्मचारियों और अन्य लोगों को प्रोत्साहन की नीति पर फिर से विचार होना चाहिए।  
उनके अनुसार किसी समाज में जनसंख्या तब स्थिर होती है, जब एक महिला से जन्म लेने वाले बच्चों की औसत संख्या कुल प्रजनन दर 2 से कुछ अधिक होती है। प्रजनन दर यदि 2.1 होगी, तब यह लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। प्रजनन दर यदि 2.1 होगी, तब किसी कारणवश एक बच्चे की असामयिक मृत्यु होने पर भी लक्ष्य प्राप्ति में परेशानी नहीं होगी।

श्री आलोक कुमार के अनुसार प्रभावी जनसंख्या नियंत्रण के लिए दो बच्चों की नीति पर विचार होना चाहिए। एक महिला के औसतन दो से कम बच्चों की नीति अपनाने से जनसंख्या को लेकर समय के साथ अंतर्विरोध पैदा होंगे। इस कारण कई तरह के सामाजिक और आर्थिक दुष्प्रभाव होंगे। युवाओं और परिवार पर निर्भर लोगों की संख्या का अनुपात गड़बड़ा जाएगा। एक बच्चे की नीति का अर्थ यह है कि एक समय पर परिवार में 2 माता-पिता और बुजुर्ग पीढ़ी के 4 सदस्यों की देखभाल की जिम्मेदारी सिर्फ एक कामकाजी युवा के कंधों पर आ जाएगी।

श्री आलोक कुमार के अनुसार एक बच्चे की नीति उत्तर प्रदेश में अलग-अलग समुदायों के बीच जनसंख्या असंतुलन पैदा कर सकती है, क्योंकि परिवार नियोजन और गर्भ निरोध के उपायों को लेकर सबकी सोच अलग है। भारत के कई प्रदेशों में यह असंतुलन पहले से ही बढ़ रहा है। असम और केरल में यह खतरे के स्तर तक बढ़ गया है, जहां जनसंख्या की कुल वृद्धि दर घट गई है। इन दोनों प्रदेशों में हिंदू समुदाय में प्रजनन दर 2.1 से कम हो गई है। असम में मुस्लिम प्रजनन दर 3.16 और केरल में 2.33 हो गई है। इसलिए उत्तर प्रदेश को इस स्थिति में पहुंचने से बचना चाहिए। जनसंख्या नीति में आवश्यक सुधार किया जाना चाहिए, अन्यथा एक बच्चे की नीति उद्देश्य से भटका सकती है।  

      श्री आलोक कुमार ने कहा है कि चीन ने 1980 में एक बच्चे की नीति अपनायी थी। तकनीकी तौर पर इसे 1-2-4 की नीति कहते हैं। इसके दुष्परिणामों को दूर करने के लिए चीन को उन माता-पिता के लिए इस नीति में ढील देनी पड़ी, जो अपने माता-पिता के अकेले बच्चे थे। कहा जा सकता है कि चीन में एक बच्चे की नीति आधे से अधिक अभिभावकों पर कभी लागू नहीं हो सकी। तीन दशकों के अंदर इस नीति को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया।

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