कैप्‍टन अमरिंदर कुर्सी बचाने के लिए विधायकों के बेटों को सरकारी नौकरी बांट रहे
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होम भारत पंजाब

कैप्‍टन अमरिंदर कुर्सी बचाने के लिए विधायकों के बेटों को सरकारी नौकरी बांट रहे

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jun 19, 2021, 04:56 pm IST
in पंजाब

पंजाब के मुख्‍यमंत्री कप्‍टन अमरिंदर सिंह ने मंत्रियों के विरोध के बावजूद कांग्रेस के दो विधायकों के बेटों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी दी है। आतंकियों ने 1987 में इन विधायकों के पिता की हत्‍या कर दी थी। विपक्ष का आरोप है कि कुर्सी बचानेे के लिए मुख्‍यमंत्री ने ऐसा किया।

 

    पंजाब में कैप्‍टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार नाराज विधायकों के बेटों को सरकारी नौकरी बांट रही है। वह भी उन विधायकों के बेटों को, जिनके पास पहले से ही करोड़ों रुपये की संपत्ति है। मुख्‍यमंत्री ने नौकरी देने का प्रस्‍ताव बाकायदा कैबिनेट बैठक में रखा था, जिसका पांच मंत्रियों ने विरोध किया था। वे विधायक के बेटों को नौकरी देने के पक्ष में नहीं थे। लिहाजा, अपने प्रस्‍ताव को पारित कराने के लिए कैप्‍टन अमरिंदर को काफी जद्दोजहद करनी पड़ी। कैप्‍टन अमरिंदर के इस फैसले को लेकर विपक्ष हमलावर है।

    कैप्‍टन ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपनी पार्टी के दो विधायकों को फायदा पहुंचा रहे हैं। फतेहजंग सिंह बाजवा गुरदासपुर के कादियां सीट से विधायक हैं, जिनके पास 33,35,46,608 रुपये की घोषित संपत्ति है। कैप्‍टन सरकार ने उनके बेटे अर्जुन बाजवा को पंजाब पुलिस में निरीक्षक (समूह बी) के पद पर नियु‍क्‍त करने का फैसला किया है। बता दें कि फतेहजंग सिंह बाजवा राज्‍यसभा सांसद प्रताप सिंह बाजवा के छोटे भाई हैं। दूसरे हैं राकेश पांडेय जो लुधियाना उत्‍तर से विधायक हैं। इनके पास 3,26,09,825 रुपये की घोषित संपत्ति है। इनके बेटे भीष्‍म पांडेय को मुख्‍यमंत्री ने राजस्‍व विभाग में नायब तहसीलदार (समूह बी) के पद पर नियुक्‍त करने का फैसला किया है।

    कैबिनेट मंत्रियों का विरोध दरकिनार

    मुख्‍यमंत्री के कुछ कैबिनेट सहयोगी इस तरह विधायकों के बेटों को सरकारी नौकरी बांटने के खिलाफ थे। उनका कहना था कि नौकरी किसी करोड़पति के बच्‍चों को नहीं, बल्कि खेतिहर मजदूर या किसान की संतान को दी जानी चाहिए। बताया जा रहा है कि विधायकों के बेटों को कैप्‍टन पहले डीएसपी और तहसीलदार के पद पर नियुक्‍त करना चाहते थे, लेकिन मंत्रियों के विरोध के बाद उन्‍हें एसआई और नायब तहसीलदार के पद पर तैनात करने का फैसला लेना पड़ा। महत्‍वपूर्ण बात यह है कि फतेहजंग बाजवा के पिता सतनाम सिंह बाजवा और राकेश पांडेय के पिता जोगिंदर पांडेय की आतंकियों ने 1987 में हत्‍या कर दी थी। सतनाम सिंह बाजवा पंजाब सरकार में मंत्री रह चुके थे। इसी आधार पर विधायकों के बेटों को अनुकंपा पर नियुक्‍त किया जाना है। कैप्‍टन के कैबिनेट सहयोगी चाहते थे कि ये नौकरियां किसी जरूरतमंद परिवार के बच्‍चों को दी जाए।

    विपक्ष के निशाने पर मुख्‍यमंत्री

    इन फैसलों को मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने के बाद विपक्षी पार्टी शिरोमणि अकाली दल के अध्‍यक्ष सुखबीर सिंह बादल कैप्‍टन सरकार पर हमलावर हैं। उन्‍होंने कहा कि मुख्‍यमंत्री कांग्रेस विधायकों को पुलिस और राजस्‍व विभाग में नौकरी दे रहे हैं। वे अपनी कुर्सी बचाने के लिए यह फैसला लिया है। सुखबीर ने कहा कि 2022 में अगर उनकी सरकार सत्‍ता में आई तो ऐसे फैसलों को पलट दिया जाएगा। उन्‍होंने इन नियुक्तियों को अवैध करार देते हुए कहा कि दादा की मौत होने पर पोतों को नौकरी नहीं दी जा सकती। उनके पिता विधायक हैं। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि उन्‍हें नियमों में एक बार मिली छूट के तहत नियुक्ति दी गई है, इसे हर मामले में नहीं दोहराया जा सकता है।

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