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जीवन सुगम बनाती तकनीक की राह

Written byPanchjanyaPanchjanya
Mar 5, 2021, 02:49 pm IST
inभारत

आजकल जाने-अनजाने लोग तकनीक के साथ नजदीकी रिश्ता कायम करते जा रहे हैं। वक्त के इस दौर में यह जरूरी भी है। मोबाइल फोन में ही दुनियाभर की सुविधाएं देने वाले एप उपलब्ध हैं। इन्हें आजमाइए और जीवन सुगम बनाइए

कोरोना वायरस के बाद के घटनाक्रमों से हर वर्ग के लोगों को भले ही तमाम किस्म की असुविधाएं हुई हों, लेकिन इससे एक अच्छा काम यह हुआ कि लोगों को तकनीक का इस्तेमाल करना आ गया। लोगों को अनायास ही प्रौद्योगिकी की ओर धकेल दिया गया और जब सिर पर आन पड़ी तो वे प्रयोग भी करने लगे। वे जिस तकनीक के प्रयोग में झिझकते थे, वह एक किस्म की मजबूरी बन गई। यह बात औरों के साथ-साथ कवियों, लेखकों, विद्वानों, वक्ताओं आदि पर भी लागू होती थी। अगर कार्यक्रमों में जाना है तो जूम, माइक्रोसॉफ़्ट टीम्स, गूगल मीट या वेब-एक्स जैसे आॅनलाइन माध्यमों का इस्तेमाल करना जरूरी हो गया। धीरे-धीरे लोग इसके अभ्यस्त होते चले गए और आज हम इस बात से परेशान हैं कि हमारे चारों तरफ आॅनलाइन कार्यक्रमों की यह इतनी जबरदस्त भीड़ कहां से आ गई है!

ऐसे में जबकि हम सभी तकनीक के प्रति सहजता के दौर में आगे बढ़ रहे हैं, कुछ जानकारियों का होनी जरूरी है। भले ही आप एक सामान्य कर्मचारी हों, कार्यकर्ता, कवि, कहानीकार, उपन्यासकार, समीक्षक, या फिर पत्रकार या संपादक ही क्यों न हों, आप चाहें तो इनका और भी बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं—अपने कामकाज को सुविधाजनक बनाने के लिए, अपने रचनाकर्म को गति देने के लिए, अपनी सामग्री को सहेजने के लिए और दूसरों तक पहुंचाने के लिए भी।

साइबर सुरक्षा
पहली जरूरत है मोबाइल और कंप्यूटर, दोनों ही माध्यमों पर अपने आपको साइबर सुरक्षित रखने की। अगर आपकी तमाम सामग्री किसी कम्प्यूटर या मोबाइल फोन में रखी है तो वह उपकरण आपकी जीवन-संपदा जैसा हो जाता है। अगर वह असुरक्षित हुआ, किसी ने उसे हैक कर लिया या चुरा लिया तो आप सब कुछ खो बैठेंगे। लिहाजा जरूरी है कि सबसे पहले उसकी सुरक्षा की जाए।

आजकल विंडोज में विंडोज डिफेन्डर नाम का सॉफ्टवेयर पहले से संस्थापित होकर आता है जो साइबर सुरक्षा सॉफ़्टवेयर है। उसमें वायरस-रोधी (एंटी-वायरस), जासूसी-रोधी (एंटी-स्पाइवेयर) और फायरवॉल जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। अगर यह सक्रिय है तो आपको विशेष फिक्र करने की जरूरत नहीं है, बशर्ते आप इधर-उधर की वेबसाइटों पर किसी भी लिंक को क्लिक कर देने तथा कुछ भी डाउनलोड करने जैसी असावधानियां न बरतते हों। या फिर दूसरे लोगों की पेन ड्राइव आदि का आंख मूंदकर इस्तेमाल न करते हों। डिफेन्डर अपने आप में पर्याप्त रूप से सक्षम है, लेकिन अगर आप चाहें तो कुछ नि:शुल्क एंटी-वायरस सॉफ्टवेयर भी आजमा सकते हैं। मिसाल के तौर पर, अवास्ट और एवीजी। ये एंटी-वायरस कंप्यूटर के साथ-साथ स्मार्टफोन के लिए भी उपलब्ध हैं।

टंकण की चुनौती
हिंदी में कामकाज करने वालों के लिए टंकण यानी टाइपिंग सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। हालांकि ऐसा होना नहीं चाहिए, क्योंकि आज हम जिस दौर में हैं उसमें लगभग हर व्यक्ति बुनियादी कम्प्यूटर कामकाज के लिए स्वयं सक्षम होता है। पहले जिस तरह से लोग दूसरों को ‘डिक्टेशन’ दिया करते थे, वह जमाना आज से बीस साल पहले ही लद गया था। हां यह बात अलग है कि आज भी अनेक लोग टाइपिंग के मामले में खुद को असमर्थ महसूस करते हैं और इस छोटे-से पर महत्वपूर्ण काम के लिए दूसरों पर निर्भर हैं।

वैसे टाइपिंग कोई इतना दुष्कर काम नहीं है। लातीनी अक्षरों में लिखी गई अंग्रेजी को देवनागरी लिपि में बदलने वाले सॉफ्टवेयर आज बहुतायत में उपलब्ध हैं। सुविधा इतनी है कि उन्हें अलग से डाउनलोड करने की भी जरूरत नहीं है, क्योंकि विंडोज 10 में ही फोनेटिक कीबोर्ड शामिल कर दिए गए हैं। इससे पहले भी इस काम के लिए कई विकल्प उपलब्ध रहे हैं, जैसे गूगल इंडिक इनपुट कीबोर्ड, माइक्रोसॉफ्ट इंडिक लैंग्वेज इनपुट टूल, इंडिक आईएमई और बरहा आदि। एंड्रोइड मोबाइल और आईओएस मोबाइल फोन पर भी ऐसे ‘कीबोर्ड’ सहजता से उपलब्ध हैं। तो यह लातीनी अक्षरों को देवनागरी में बदलने का तरीका हुआ। इसके अलावा भी कई तरह के ‘कीबोर्ड लेआउट’ कम्प्यूटर और मोबाइल फोन पर इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इनमें से ज्यादातर तो खुद उन उपकरणों के ‘आॅपरेटिंग सिस्टम’ में ही मौजूद हैं, जैसे कि इनस्क्रिप्ट। इनस्क्रिप्ट को भारतीय भाषाओं के लिए सर्वश्रेष्ठ ‘कीबोर्ड लेआउट’ माना जाता है जो शुद्धतम और तीव्रतम टाइपिंग के मार्ग को सुगम बना देता है। इसे सीखना चाहें तो लेखक के द्वारा विकसित किया हुआ ‘स्पर्श’ हिंदी टाइपिंग ट्यूटर इस्तेमाल कर सकते हैं जो इंटरनेट से नि:शुल्क डाउनलोड के लिए उपलब्ध है। गूगल पर सर्च कीजिए और डाउनलोड कर लीजिए।

फोनेटिक कीबोर्ड
विंडोज पर हिंदी में टाइप करने के लिए आप ‘इनबिल्ट फोनेटिक कीबोर्ड’ का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए सेटिंग्स में जाएं और वहां ‘टाइम एंड लैंग्वेज’ पर क्लिक करें। अब खुलने वाले पेज में लैंग्वेज पर क्लिक करें। दायीं तरफ आपको ‘एड ए प्रफर्ड लैंग्वेज’ नाम का विकल्प दिखेगा। इस पर क्लिक करें। अब दिखने वाली भाषाओं की सूची में से हिंदी का चुनाव कर लें। जब हिंदी इन्स्टॉल हो जाए तो आप्शन्स बटन पर क्लिक करें। यहां ‘कीबोर्ड्स’ नाम के खंड में ‘एड कीबोर्ड’ पर क्लिक करें। अब आपको कई ‘कीबोर्ड लेआउट’ के विकल्प नजर आएंगे जिनमें से आप अपनी पसंद के लिहाज से फोनेटिक या इनस्क्रिप्ट का चुनाव कर सकते हैं। चाहें तो दोनों को चुन सकते हैं। याद रखिए, फोनेटिक कीबोर्ड वह है जिसमें आप अंग्रेजी में टाइप करते हैं और वह स्वत: देवनागरी पाठ में बदलता चला जाता है।

हमने ऊपर इनस्क्रिप्ट टाइपिंग पद्धति का जिक्र किया है जो भारतीय भाषाओं के लिए सरकार की ओर से निर्धारित मानक टाइपिंग पद्धति है। आप चाहें तो माइक्रोसॉफ्ट की वेबसाइट भाषाइंडियाडॉटकॉम के डाउनलोड खंड में जाकर ‘माइक्रोसॉफ्ट इंडिक लैंग्वेज इनपुट टूल’ को भी डाउनलोड कर सकते हैं। यह उसी तरह से काम करता है जैसे कि विंडोज 10 के फोनेटिक कीबोर्ड। लेकिन फोनेटिक कीबोर्ड सिर्फ विंडोज 10 में काम करता है जबकि यह ‘टूल’ विंडोज 7 और 8 में भी काम करेगा। पहले गूगल ने भी ‘गूगल इंडिक इनपुट’ के नाम से एक टाइपिंग टूल उपलब्ध कराया हुआ था, लेकिन अब उसे बंद कर दिया गया है।

अब मोबाइल में दर्ज करें विचार
रचनाकर्मियों का मस्तिष्क बहुत उर्वर होता है और उसमें हमेशा नए विचार कौंधते रहते हैं। किसी जमाने में लोग छोटी-सी नोटबुक साथ में रखा करते थे ताकि इस तरह के विचारों को तुरंत नोट कर लिया जाए। अब उसकी जरूरत नहीं है क्योंकि आपके मोबाइल फोन में नोट दर्ज करने के एप आते हैं। ऐसे ही एप्स में से एक का नाम है ‘माइक्रोसॉफ्ट वन नोट’ और दूसरे का ‘गूगल कीप’। ऐसा ही एक और एप्प है जिसका नाम है ‘एवरनोट’। इनमें से किसी भी एप्प को प्ले स्टोर पर खोजकर डाउनलोड तथा इन्स्टॉल कर लें। अगर आप ‘कीप’ का चुनाव करते हैं तो वह आपके गूगल खाते के साथ जुड़ेगा और अगर ‘वन नोट’ का चयन करते हैं तो वह माइक्रोसॉफ्ट खाते के साथ जुड़ जाएगा। यहां पर कविता, दोहा, विचार, बिंदु आदि कुछ भी टाइप करते रहिए और बाद में जरूरत पड़ने पर उन्हें कागज या कम्प्यूटर पर उतार लीजिए। अगर आपने इसे अपने गूगल या माइक्रोसॉफ्ट खाते के साथ जोड़ा हुआ है तो फोन के खो जाने या फॉरमैट हो जाने पर भी इन एप्स में रखा हुआ डेटा आपके गूगल या माइक्रोसॉफ्ट अकाउंट में मौजूद रहेगा और उसे फिर से वापस पाया जा सकेगा। (लेखक सुप्रसिद्ध तकनीक विशेषज्ञ हैं)

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