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‘भारतीय कलाओं को संरक्षित करने की जरूरत’’

Written byArchiveArchive
Mar 12, 2018, 12:00 am IST
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दिंनाक: 12 Mar 2018 16:19:35


पिछले दिनों संस्कृत भारती की जयपुर इकाई की ओर से मानसरोवर स्थित होटल प्रिंस में अष्टावधान कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें आंध्र प्रदेश के विद्वान दोर्बल प्रभाकर शास्त्री ने आठ विद्वानों द्वारा लगातार विभिन्न साहित्यिक बाधाएं उत्पन्न करने के बावजूद काव्य रचना करने के साथ-साथ उनके द्वारा उत्पन्न की गई बाधाओं का समाधान देकर उपस्थित श्रोताओं को अपने कौशल से मंत्रमुग्ध कर दिया तथा भारत की समृद्ध परंपरा को जीवंत किया। इस अवसर पर श्री दोर्बल प्रभाकर ने अष्टावधान विधा के बारे में कहा कि इस विधा में एक काव्य बनाने वाला तथा आठ प्रश्न पूछने वाले होते हैं, जिनका कार्य रचनाकार के सम्मुख बाधा उत्पन्न करना है। काव्य रचनाकार को इन बाधाओं का समाधान करने के साथ-साथ काव्य की रचना करनी होती है। इसी प्रकार शतावधान, सहस्रावधान भी आयोजित किया जाता है, जो एक ही समय में सौ तथा हजार लोगों के प्रश्नों का समाधान करते हुए काव्य रचना करते हैं। समय के साथ अब यह कलाएं विलुप्त होती जा रही हैं। ऐसे में इन विधाओं का प्रसार अत्यन्त आवश्यक है। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो़ प्रकाश पाण्डेय ने की।    (विसंकें, जयपुर)

‘‘सरना व सनातनियों को  एकजुट होना होगा ’’
झारखंड के गुमला जिले के सुरसा गांव स्थित कोटारी के सरना मैदान में 28 फरवरी को हिन्दू जागरण मंच द्वारा सरना सनातन महासम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में राष्टÑीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक श्री रविशंकर ने कहा कि झारखण्ड सहित पूरे देश में राष्टÑ हित में सरना समाज व सनातन समाज को एकजुट होना होगा, यही वर्तमान समय की मांग है। उन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत को हर काल में देश के भीतर से ही कुछ मुट्ठीभर गद्दारों के कारण बड़ा खतरा रहा है। वर्तमान भारत भी इस कटु सच से अछूता नहीं है। राजनीतिक षड्यंत्रों की वजह से देश में जबरन पंथनिरपेक्षता थोपी जा रही है जो मूल रूप से छद्म वेश में भारत को नित डसने का काम करती रही है। पूर्व की गलत नीतियों के कारण भारत मां के 1947 में दो टुकड़े कर दिए गए, विभाजन की भयानक विभीषिका में लाखों लोगों को जान गंवानी पड़ी। देश के जाने-माने संस्थान जेएनयू में ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ के नारे लगते हैं, तब देश को अत्यंत पीड़ा होती है कि किस तरह राजनीतिक संरक्षण में भारत की गोद में आस्तीन के सांप पाले जाते रहे हैं। सत्ता की आड़ में जहरीले सर्पों को दूध पिलाया गया। अब देश किसी भी सूरत में अगले किसी भी विभाजन को सहन करने की स्थिति में नहीं है। ऐसी परिस्थिति में हम सबको देश व धर्म की सुरक्षा के प्रति दृढ़ संकल्पित होना होगा। उन्होंने कहा कि लव जिहाद जनसंख्या जिहाद, भूमि जिहाद, से समाज को सतर्क और सजग रहने की जरूरत है। क्योंकि झारखंड के जनजातीय सरना समाज को बरगलाया जा रहा है। बहन-बेटियों का कन्वर्जन करने के लिए नित नए कुचक्रों का सहारा लिया जा रहा है। ऐसी विषम परिस्थिति में हमें मिलकर रहना होगा और साजिशें रचने वालों से सतर्क रहना पड़ेगा। इस अवसर पर प्रान्त संघचालक श्री सच्चिदानंद अग्रवाल, कबीर मठ के संत संतोष दास सहित बड़ी संख्या में सरना समाज के लोग उपस्थित थे।           (प्रतिनिधि)

विज्ञान महोत्सव में हुआ प्रतिभाओं का सम्मान
जयपुर के मालवीय राष्टÑीय प्रौद्योगिकी संस्थान स्थित विवेकानंद थियेटर कॉम्पलैक्स में विज्ञान भारती, राजस्थान और एम़ एऩ आई.टी. के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय राष्टÑीय विज्ञान महोत्सव का आयोजन किया गया। आयोजन में राजस्थान के 135 स्थानों से आए विद्यार्थियों ने विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राजस्थान के सहकारिता मंत्री श्री अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि शिक्षक के पास वह ताकत है, जिसके माध्यम से वह शिवाजी, महाराणा प्रताप, डॉ. कलाम जैसे व्यक्तित्वों का निर्माण कर सकता है। भारत में विज्ञान पौराणिक काल से है। रामायण और महाभारत में हमें इसका वर्णन सुनने और पढ़ने को मिलता है। भारत में शल्य चिकित्सा भी अति प्राचीन है। ऐसे में हमें अपनी पुरातन शिक्षा व्यवस्था में भरे पड़े ज्ञान-विज्ञान भंडार को आज की पीढ़ी को बताने की आवश्यकता है। कार्यक्रम के अध्यक्ष एवं संस्थान के निदेशक डॉ़ उदय कुमार यागारेट्टी ने कहा कि विज्ञान महोत्सव के माध्यम से इस परिसर का गृहप्रवेश हुआ है। आयोजन की महक से यह परिसर सदैव प्रफुल्लित रहेगा। इस मौके पर विज्ञान क्षेत्र में विशेष कार्य हेतु एम़ एऩ आई.टी. के पूर्व निदेशक प्रो़ एस़ सी.अग्रवाल, मौसम विज्ञान के लिए प्रो़ एऩ एस़ राठौड़, भू-विज्ञान के लिए प्रो़ एच़ एस़ शर्मा, वनस्पति विज्ञान के लिए प्रो़ अश्विनी कुमार और भौतिक विज्ञान के लिए प्रो़ वी़ के़ विजय को लाईफ टाइम अचीवमेन्ट अवार्ड’ से सम्मानित किया गया।  
    ल्ल (विसंकें, जयपुर)

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