‘‘भारत माता की जय कहने वाले एक हैं’’
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‘‘भारत माता की जय कहने वाले एक हैं’’

Written byArchiveArchive
Feb 5, 2018, 12:00 am IST
in Archive

दिंनाक: 05 Feb 2018 11:10:21

‘‘स्वावलंबन, संस्कृति, कला, परंपरा, नृत्य, वाद्य आदि जनजातीय समाज के स्वाभिमान और अस्मिता के विषय हैं। उन्हें अगर कोई बाधा पहुंचाने का प्रयास कर रहा हो तो इसे हिन्दू समाज नहीं सहेगा। जनजातीय समाज की प्राचीन परंपरा की रक्षा ही अस्मिता जागरण है। उक्त उद्बोधन राष्टÑीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री सुरेश भैयाजी जोशी ने दिया। वे गत दिनों वनवासी कल्याण आश्रम की ओर से नासिक की सुरगाणा तहसील के गुही गांव में आयोजित जनजाति अस्मिता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि इस देश में माता मानने वाली एकमात्र संस्कृति है। इसलिए हमारी भावना है कि जो-जो भारत माता की जय कहते हैं, वे सब एक ही हैं। दुर्भाग्य से यह संस्कृति खत्म करने के लिए कई शक्तियां समाज में कार्यरत हैं। यह बात समाज के लिए ही नहीं, बल्कि देश के लिए भी नुकसानदेह है।       (विसंकें, नासिक)

 

राष्टÑहित के अभियान के लिए समर्पित परिषद
पिछले दिनों अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने लखनऊ  स्थित पारा में अपना 57वां प्रांत अधिवेशन आयोजित किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ उपस्थित थे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि सीमा सुरक्षा, स्वदेशी, कश्मीर, शिक्षा की विषमता, ज्यादा फीस के मुद्दे पर केवल परिषद के लोगों ने संघर्ष किया है। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को प्रेरणा देते हुए कहा कि मजबूत इच्छाशक्ति से बाधाएं दूर होती हैं। परिस्थिति अनुकूल होने की प्रतीक्षा न करें और नकारात्मक सोच को छोड़कर सकारात्मक बनें। छात्र शक्ति को राष्टÑ शक्ति में बदलने के लिए अभाविप की स्थापना हुई हैं। एक मिशन राष्टÑभाव, एक धर्म-राष्टÑधर्म को आगे बढ़ाना है़, यही परिषद का उद्देश्य है। परिषद के राष्टÑीय संगठन मंत्री श्री सुनील आम्बेकर ने भी उपस्थित लोगों को संबोधित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता समाज सेवी ओपी श्रीवास्तव ने की। इस दौरान अवध विवि. के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।    प्रतिनिधि

 

सूर्यरथ सप्तमी पर 5 लाख लोगों ने किया सूर्यनमस्कार
पिछले दिनों जयपुर के सेन्ट्रल पार्क में गुरुकुल योग संस्थान और क्रीड़ा भारती के संयुक्त तत्चावधान में संपन्न हुए सूर्य नस्कार यज्ञ में जयपुर के 500 से अधिक स्कूलों के विद्यार्थियों के अलावा प्रदेश के 5 लाख से अधिक लोगों ने सूर्यरथ सप्तमी पर सूर्यनमस्कार किया। इस अवसर पर क्रीड़ा भारती के राष्टÑीय उपाध्यक्ष एवं राष्टÑीय धावक श्री गोपाल सैनी कहा कि योग भारत की धरा से निकला है। हमें भी अपने नित्य जीवन में योग को जोड़ना चाहिए़, जिससे शरीर के साथ हमारा मन भी स्वस्थ रहेगा। सूर्य नमस्कार को सम्पूर्ण योग का निचोड़ कहा गया है। इसलिए नियमित सूर्यनमस्कार से हम लम्बी आयु प्राप्त कर सकते हैं।      (विसंकें,जयपुर)

‘‘सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने के
प्रयास चिन्ताजनक ’’
‘‘अतीत में देश पर हुए विदेशी आक्रमणों के विरुद्ध संघर्ष में राष्टÑीय अस्मिता की रक्षार्थ, अपने प्राणों का उत्सर्ग कर देने वाले देश के वीर व वीरांगनाएं हमारी अगाध श्रद्धा के केन्द्र एवं सम्पूर्ण समाज के अविस्मरणीय महानायक हैं। शुद्ध व्यावसायिक लाभ की प्रेरणा से उनके जीवन प्रसंगों पर अपुष्ट, विवादास्पद व काल्पनिक जानकारियों के आधार पर फिल्म प्रदर्शन कर जन भावनाओं को आहत व उद्वेलित कर सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने के प्रयास गम्भीर रूप से चिन्ताजनक हैं।’’
उक्त बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राजस्थान क्षेत्र के क्षेत्र संघचालक श्री भगवती प्रकाश ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कही।  उन्होंने कहा कि फिल्म व नाटक जैसे लोकानुरंजन व जनसंचार के माध्यमों का उपयोग, समाज में सौहार्द, भ्रातृत्व व राष्टÑ गौरव के जागरण के साधन के रूप में ही देखा व प्रयोग किया जाना चाहिये।                          (विसंकें,

जयपुर)‘‘सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने के
प्रयास चिन्ताजनक ’’
सुभाष चन्द्र बोस पर था स्वामी विवेकानन्द का विशेष प्रभाव

पिछले दिनों जयपुर में पाथेय कण संस्थान में ‘स्वामी विवेकानन्द और सुभाष बोस’ विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में रा.स्व.संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री राजेन्द्र चड्ढा उपस्थित थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सुभाष चन्द्र बोस पर स्वामी विवेकानन्द का विशेष प्रभाव रहा। उन्होंने विवेकानन्द के सबसे निचले स्तर के व्यक्ति को उच्चतम स्तर पर पहुंचाने के संकल्प को अपने जीवन में उतारा और विद्यार्थी जीवन से ही देश सेवा में लग गए। कार्यक्रम के संयोजक पाथेय कण के संपादक श्री कन्हैयालाल चतुर्वेदी ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में एक तिहाई योगदान क्रांतिकारियों का, एक तिहाई अन्य लोगों का रहा। जबकि शेष एक तिहाई अकेले सुभाष चन्द्र बोस का रहा।       (विसंकें, जयपुर)

‘‘प्रवृति से निवृत्ति की ओर चलना हमारी संस्कृति’’
गत दिनों मध्य प्रदेश के टिमरनी में श्रद्धेय भाऊ साहब भुस्कुटे की स्मृति में ‘वर्तमान सभ्यता का संकट’ विषय पर व्याख्यानमाला का आयोजन किया था। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल उपस्थित रहे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि सभ्यता मस्तिष्क में उत्पन्न होती है और संस्कृति हृदय से उत्पन्न होती है। संस्कृति के प्रति हमारा दृष्टिकोण नहीं बदलना चाहिए। सभ्यता सुविधाएं जुटाएगी, संस्कृति उनमें सुगन्ध भरेगी। संस्कृति आत्मा है और सभ्यता शरीर है। सभ्यताएं आएंगी-जाएंगी, लेकिन उनमें संस्कृति विद्यमान रहनी चाहिए। आज सभ्यता हमसे हमारा बहुत कुछ मूल्यवान छीन रही है। पारिवारिक मूल्य समाप्त हो रहे हैं। सुविधाएं आई हैं, पर सांस्कृतिक मूल्य खो रहे हैं। हमारा कार्य इन समाप्त होते मूल्यों को सहेजना है। हम पश्चिम के विचार को न अपनाकर भारतीय विचारों में जिएं तो तमाम कष्ट अपने आप हल हो जाएंगे।      

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