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तिरंगे में लिपटे सवाल

Written byArchiveArchive
Feb 5, 2018, 12:00 am IST
in Archive

दिंनाक: 05 Feb 2018 11:10:21


देश विरोधी तत्वों ने ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे के साथ तिरंगा यात्रा में शामिल नौजवानों पर हमला कर दिया। इससे अनेक सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस देश में तिरंगा फहराना  या तिरंगा
लेकर चलना गुनाह  है?

अनुग्रह शंकर

कांसगंज की घटना के बाद अनेक प्रश्न उठ रहे हैं। जैसे-हाथों में तिरंगा उठाए वंदेमातरम् का जयघोष करती, देशभक्ति के गीत गुनगुनाती युवाओं की टोली देश विरोधी तत्वों की आंखों की किरकिरी कैसे बन गई? जहां फूलों की उम्मीद थी, वहां गोलियां क्यों बरसाई गर्इं? अपना खून देकर दूसरों की जान बचाने वाला हंसता-खेलता चंदन खूनी साजिश का शिकार कैसे बना? क्या तिरंगा फहराना या तिरंगा यात्रा निकालना अपराध है? जिन लोगों के ऊपर गोली चलाने और दंगे की साजिश रचने के आरोप हैं, उनके ठिकानों से बम, बंदूक, चाकू-छुरे निकल रहे हैं।  इसलिए यह कहने में कोई हिचक नहीं है कि निहत्थे नौजवानों पर हमले की तैयारी पहले से थी।
तारीख 26 जनवरी। गणतंत्र दिवस के जश्न में डूबे कासगंज शहर में कुछ युवा सुबह के समय तिरंगा यात्रा निकाल रहे थे। जहां से भी गुजर रहे थे, वहां के लोग उनका स्वागत कर रहे थे। कई इलाकों से होती तिरंगा यात्रा मुस्लिम बहुल बडू नगर पहुंची थी। वहां पहले से मौजूद भीड़ ने यात्रा में शामिल लोगों पर अचानक हमला कर दिया। मारपीट, पथराव के साथ गोलियों की बौछार शुरू हो गई। कई लोग घायल हो गए। यात्रा में शामिल लोग किसी तरह वहां से बचकर तहसील रोड तिराहे पर पहुंचे तो वहां भी पहले से मौजूद हिंसक भीड़ ने भी उन्हें घेर लिया और गोलीबारी शुरू कर दी। चंदन गुप्ता उर्फ अभिषेक को गोली लगी। लहूलुहान चंदन को उसके साथ वाले अस्पताल लेकर दौड़े मगर उसे बचाया नहीं जा सका। तिरंगा यात्रा पर पथराव-गोलीबारी में युवक की मौत की खबर फैली तो गम, गुस्सा, गुबार सड़कों पर नजर आने लगा। आक्रोश का ज्वार फूट पड़ा। फिर जो कुछ हुआ, उसके निशान कई दिन बाद तक शहर में नजर आए।
उपद्रव की शुरुआत कैसे हुई? हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़ किसने की? जांच एजेंसियां इन सवालों के जवाब तलाश रही हैं। मगर कुछ जवाब गली-गली छनते हुए खुद सामने आ रहे हैं। लोग यही कह रहे हैं कि गणतंत्र दिवस पर निकाली गई तिरंगा यात्रा पर हमला सुनियोजित था। खास इलाके में उसकी पहले से तैयारी थी।  

क्या गुनाह था?
तिरंगा यात्रा पर हमले में शहीद हुआ चंदन अभी जीवन के 20 बसंत ही देख पाया था। बी. कॉम अंतिम वर्ष का छात्र था। पिता सुशील गुप्ता कंपाउंडर हैं। हमेशा हंसता-मुस्कुराता नजर आने वाला चंदन शुरू से ही समाज सेवा में आगे रहता था। किसी बीमार को खून की जरूरत होती थी, तो दौड़कर ब्लड बैंक पहुंच जाता था। कितने ही लोगों की वह जान बचा चुका था। परिवार की आर्थिक हालत ठीक न होते हुए भी गरीबों की सेवा में जुटा रहता था। इस मौसम में जब शीतलहर अमीरों को भी तड़पा रही थी, तब चंदन ने कितने ही गरीबों को गर्म कपडेÞ देकर उन्हें ठंड से बचाने का प्रशंसनीय कार्य किया था। चंदन की हत्या से उसका परिवार टूट गया है। पूरा शहर शोक में डूबा है। बिलखता परिवार बस एक ही सवाल पूछ रहा है कि आखिर उसके लाडले ने तिरंगा यात्रा में जाकर ऐसा क्या गुनाह किया जो दुश्मनों ने उसकी जान ले ली? गुस्साए लोगों ने चंदन का अंतिम संस्कार तब किया, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फोन पर बात कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।

सरकार सख्त
हमेशा खराब कानून-व्यवस्था और दंगों को लेकर सुर्खियों में रहे उत्तर प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद पहला मौका है, जब इस तरह से किसी शहर का माहौल खराब किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कासगंज दंगे पर बेहद सख्त नजर आ रहे हैं। योगी ने दो टूक कहा है कि राज्य में किसी तरह की अराजकता चलने नहीं दी जाएगी, कासगंज हिंसा के दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई
की जाएगी। राज्यपाल राम नाईक ने भी कासगंज की घटना की कड़े शब्दों में निंदा की। सरकार ने लखनऊ  से वरिष्ठ अधिकारियों को तुरंत कासगंज भेजा, जो हालात सामान्य होने तक शहर में ही डेरा जमाए रहे। स्थिति को संभालने में नाकाम रहे कासगंज के पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार सिंह को पद से हटा दिया गया। इस सख्ती का ही असर है कि कासगंज में उपद्रव को लेकर 125 से अधिक लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। खुराफातियों को चिह्नित कर कार्रवाई की जा रही है। तलाशी अभियान में अवैध हथियार और बम भी बरामद हुए हैं। गुप्तचर एजेंसियां इसकी तह में जाने की कोशिश कर रही हैं कि इस तरह मौत का साजो-सामान कहां से जुटाया गया और साजिश में कौन-कौन लोग शामिल थे।

एसआईटी कर रही जांच
प्रदेश शासन ने कासगंज दंगे की जांच के लिए एसआईटी गठित की है। अब तक पांच मुकदमे दर्ज किए गए हैं। एसआईटी ने सभी मामलों की जांच शुरू कर दी है। सरकार की ओर से चंदन गुप्ता के परिवार को 20,00000 रु. की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। एटा के सांसद राजवीर सिंह ने भी परिवार को अपनी ओर से 1,00000 रु. की मदद दी है। कासगंज के जिलाधिकारी आर.पी. सिंह का कहना है कि हालात अब पूरी तरह सामान्य हैं। प्रशासन उपद्रवियों पर कार्रवाई में जुटा है। दोषियों पर राष्टÑीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।

सेकुलर मीडिया का दोमुंहापन
कासगंज की घटना ने एक बार फिर सेकुलर मीडिया के दोहरे चरित्र को उजागर किया है। मीडिया ने चंदन की हत्या पर ऐसी चुप्पी साध ली मानो, कुछ हुआ ही नहीं है। जबकि यही सेकुलर मीडिया उस समय गला फाड़-फाड़ कर चिल्लाता है जब किसी दंगे में कोई ‘रहीम’ या ‘जैकब’ मारा जाता है। भारत के लोगों को सेकुलर मीडिया के इस दोमुंहेपन को समझना होगा। जांच चल रही है। उम्मीद है कि प्रदेश सरकार ईमानदारी से दोषियों को निकाल लाएगी और उन्हें सजा दिलाएगी। लोग भी चाहते हैं कि कासगंज के कातिल किसी भी सूरत  में न छूटें और भविष्य में देशद्रोही इस तरह से राष्ट्रीय स्वाभिमान पर आघात करने की कोशिश न करें।     

‘‘मां खाना बना कर  रखना,   
झंडा फहरा कर आ रहा हूं’’
दंगाइयों की गोली से शहीद हुए चंदन की मां संगीता गुप्ता का क्रन्दन किसी सामान्य  व्यक्ति के लिए सुन पाना आसान नहीं था। वह रोती हुई कहती हैं, ‘‘मेरा बच्चा 26 जनवरी को झंडा फहराने गया था। उसने मुझसे कहा, मां, ‘मैं आ रहा हूं। बस तिरंगा फहराने जा रहा हूं। खाना बना कर रखना’, लेकिन वह वापस नहीं आया। मेरे बेटे ने देश के लिए अपनी जान दे दी। कुछ लड़कों ने उसको रास्ते में रोक लिया। मेरा बच्चा ‘हिंदुस्थान जिंदाबाद’ के नारे लगा रहा था और वे लोग ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगा रहे थे। उन लड़कों ने कहा कि अगर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ नहीं कहोगे तो इस गली से आगे जिंदा नहीं जाने देंगे.. मेरे बच्चे ने ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ नहीं कहा, तो उन लड़कों ने मेरे बच्चे को जान से मार दिया।’’
‘‘मेरा फूल सा बच्चा था। मेरे बुढ़ापे की लाठी था, मेरी तो लाठी टूट गई। अब मैं किसके सहारे जिऊंगी। मेरे बच्चे को इंसाफ मिले, मुझको इंसाफ मिले। अगर न्याय नहीं मिलेगा तो कोई मां अपने बच्चे को 26 जनवरी और 15 अगस्त पर झंडा फहराने नहीं भेजेगी।’’
 चंदन के पिता सुशील गुप्ता का भी यही कहना है कि ‘‘मेरे बेटे ने ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ नहीं बोला इसलिए उसे गोली मार दी गई।’’

शिकंजे में सलीम
चंदन गुप्ता की हत्या के मुख्य अभियुक्त सलीम ने कानून से भागने की कोशिश तो बहुत की मगर ऐसा नहीं कर नहीं पाया। पुलिस और एसटीएफ ने कासगंज हिंसा के पांचवें दिन उसे शिकंजे में ले लिया। पुलिस के अनुसार, सलीम ही वह शख्स है, जिसने गणतंत्र दिवस के दिन तिरंगा यात्रा निकाल रहे निहत्थे नौजवानों पर गोलियां बरसाई थीं। आगरा क्षेत्र के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) अजय आनंद ने बताया कि घटना में शामिल सलीम के दो भाई अभी फरार हैं। उनकी सरगर्मी से तलाश जारी है। जल्द ही सभी गुनहगार सलाखों के पीछे होंगे।  
           

    कासगंज घटना की हर दृष्टिकोण से जांच कराई जा रही है। दंगाइयों के खिलाड़ी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जांच में अधिकारियों की लापरवाही सामने आई तो उनके खिलाफ भी कड़ा कदम उठाया जाएगा।
—केशव प्रसाद मौर्य, उप मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश  
          
  कासगंज की घटना सुनियोजित थी। चंदन गुप्ता की जगह किसी मोहम्मद इस्माइल की हत्या हुई होती तो मीडिया में 24 घंटे बहस चलती। यह मानसिकता बदलनी होगी। ‘पाकिस्तान  जिन्दाबाद’ बोलने वालों को भारत में रहने का हक नहीं है।
—गिरिराज सिंह, केंद्रीय मंत्री
           
   तिरंगा यात्रा पर हमला करने वालों ने ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे भी लगाए। दंगाइयों को पाकिस्तान का समर्थन नजर आता है। दहशतगर्दों से सख्ती से निपटना होगा। कासगंज में पहले कभी सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ। कुछ लोग पाकिस्तान के समर्थन से दंगा कराने में सफल रहे।
—विनय कटियार,राज्यसभा सांसद, भाजपा  
    
     कासगंज की घटना से साबित होता है कि देश विरोधी तत्वों को तिरंगा यात्रा सहन नहीं होती। ऐसी घटनाओं को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
—साध्वी निरंजन ज्योति, केंद्रीय मंत्री      

     
    तिरंगा यात्रा पर अचानक गोलीबारी करना यही दर्शाता है
कि इसकी तैयारी पहले से थी।  ऐसे समाज विरोधी अवैध हथियार
रखने वाले तत्वों को बेनकाब कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो।

—सत्येंद्र कश्यप, युवा नेता, कासगंज              
   सरकार दोषियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई करे कि भवष्यि में फिर कोई इस तरह साजिश करने की हिम्मत न जुटा सके।
—राकेश गुप्ता, व्यापारी, कासगंज       

       
   कासगंज जैसे शांत शहर का माहौल बिगाड़ने की गहरी साजिश हुई। तिरंगा यात्रा पर हमला करने वालों पर रासुका के तहत कार्रवाई की जाए।
 —नवल कुलश्रेष्ठ, समाजसेवी, कासगंज

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