चुनौतियां लेकर आई जीत
June 9, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम Archive

चुनौतियां लेकर आई जीत

Written byArchiveArchive
Dec 25, 2017, 12:00 am IST
in Archive

दिंनाक: 25 Dec 2017 11:11:10

हिमाचल प्रदेश में दो तिहाई बहुमत के साथ भाजपा को विरासत में कई चुनौतियां भी मिली हैं। राज्य पर करीब 44,000 करोड़ रुपये का कर्ज है और सालाना बजट का करीब 41 प्रतिशत वेतन और पेंशन मद में खर्च हो जाता है

डॉ. राजीव पत्थरिया

हिमाचल प्रदेश में 13वें विधानसभा चुनाव में 44 सीटों के साथ शानदार जीत हासिल कर भाजपा ने सत्ता हासिल की है। लेकिन यह जीत अपने साथ कई चुनौतियां लेकर आई है, जिनका सामना भाजपा की नई सरकार को करना पड़ेगा।
विरासत में मिला खाली खजाना
हिमाचल प्रदेश करीब 44,000 करोड़ रुपये के कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है। राज्य सरकार के सालाना बजट को देखा जाए तो उसमें से 40.74 प्रतिशत राशि वेतन और पेंशन पर खर्च हो रही है। ऋण वापसी और उस पर लगने वाले ब्याज की अदायगी पर सरकार को हर साल करीब 19.71 प्रतिशत राशि वार्षिक बजट में से खर्च करनी पड़ रही है। ऐसे में विकास के लिए लगभग 40 प्रतिशत राशि ही शेष रह जाती है। इन चुनावों में 21 सीटें लाने वाली कांग्रेस ने सत्ता में बने रहने के लिए सैकड़ों घोषणाएं कर बिना जरूरत के नए सरकारी संस्थान खोल दिए हैं और कर्मचारी वर्ग को लुभाने के लिए कई सरकारी वादों को भी सरकारी एजेंडा बना दिया है। खजाना खाली होने के कारण इन घोषणाओं को जारी रखना नवनिर्वाचित भाजपा सरकार के लिए बेहद मुश्किल साबित होगा।
भाजपा के समक्ष दूसरी बड़ी राजनीतिक चुनौती 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में भी आ सकती है। दरअसल, हमीरपुर और शिमला संसदीय क्षेत्र में पार्टी को काफी नुकसान झेलना पड़ा है। इस  बार विधानसभा चुनाव में भाजपा को 48.8 प्रतिशत वोट मिले हैं, जबकि 2014 के लोकसभा चुनावों में उसे 54.5 प्रतिशत वोट मिले थे।
जनता ने दिग्गजों को नकारा
इस चुनाव में मतदाताओं की खामोशी ने पहले ही बड़े चुनाव का संकेत दे दिया था। राजनीति के पुराने माहिर खिलाड़ी भी मतदाताओं के मूड को भांप नहीं पाए। खास बात यह रही कि हिमाचल प्रदेश में इस बार मतदान अधिक हुआ, जिसमें महिलाओं की भागीदारी अधिक रही। जागरूक मतदाताओं ने 70 और 90 के दशक से राजनीति में लगातार सफल रहने वाले चेहरों को भी नकार दिया है। इसमें दोनों दलों के बड़े-बड़े चेहरे शामिल हैं। भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री का चेहरा रहे प्रो. प्रेम कुमार धूमल भी चुनाव हार गए। दूसरी ओर 6 बार मुख्यमंत्री रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरभद्र सिंह के मंत्रिमंडल के पांच सहयोगियों को भी जनता ने नकार दिया। इनमें कौल सिंह ठाकुर और जी.एस. बाली प्रमुख तो हैं ही, वीरभद्र सिंह के चहेते मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी और प्रकाश चौधरी भी शामिल हैं। कौल सिंह तो वीरभद्र सिंह के बाद मुख्यमंत्री पद की दौड़ में भी शामिल थे। इसके अलावा, वीरभद्र के चहेते युवा नेता सुधीर शर्मा को भी इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। ऐसे में कांग्रेस को प्रदेश में नए नेतृत्व का चुनाव करना होगा, क्योंकि वीरभद्र 83 वर्ष के हो चुके हैं और पार्टी के लिए अगले पांच साल तक उन्हें ढो पाना मुश्किल है। उनका यह आखिरी चुनाव था। प्रो. प्रेम कुमार धूमल दो बार राज्य के मुख्यमंत्री और दो बार विपक्ष के नेता रह चुके हैं। लेकिन इस बार उनका विधानसभा क्षेत्र बदला और वे सुजानपुर से अपने ही शार्गिद राजेंद्र सिंह राणा से चुनाव हार गए। उनकी इस हार का कारण राजेंद्र राणा का अपने क्षेत्र में घर-घर तक पहुंच माना जा रहा है। वहीं, 1977 से राजनीति में सक्रिय गुलाब सिंह ठाकुर को इस बार सउदी अरब से लौटे प्रकाश राणा ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पटखनी दी है। वे हमीरपुर से भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर के ससुर हैं। उधर भाजपा अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती को कांग्रेस के युवा सतपाल सिंह रायजादा ने हरा दिया। इसी तरह, 90 के दशक से लगातार जीत को गले लगाते आए रविंद्र रवि मुंबई से आए आजाद प्रत्याशी होशियार सिंह के मुकाबले खेत रहे। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष और सांसद रह चुके महेश्वर सिंह, मंडी विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी और कौल सिंह ठाकुर की बेटी चंपा ठाकुर भी हार गर्इं, जबकि कांग्रेस के तेजतर्रार नेताओं में शुमार जी.एस. बाली को साधारण छवि वाले युवा अरुण कूका ने हार का स्वाद चखाया।  
नए राजनीतिक युग की शुरुआत!
इस बदलाव को हिमाचल में नए राजनीतिक युग की शुरुआत कहा जा सकता है, क्योंकि चुनाव में लगातार सत्ता से चिपके रहने वाले कुछ वरिष्ठ एवं कुछ नए नेताओं की व्यक्तिगत छवि को जनता ने सिरे से नकार दिया है। कुछ विधानसभा क्षेत्रों में काम के आधार पर वोट मिले हैं, लेकिन इसके साथ-साथ लोगों ने नेताओं के व्यवहार का भी आकलन किया है। भाजपा ने यह चुनाव अच्छी योजना और समय-समय पर होने वाले सर्वेक्षणों की रपट के आधार पर लड़ा और उसे इसका फायदा भी मिला। हिमाचल प्रदेश में हर पांच साल पर सरकार बदल जाती है, इसलिए कांग्रेस ने एक तरह से अपनी हार पहले ही मान ली थी। प्रदेश का मुख्यमंत्री अनुभवी व्यक्ति को ही बनाया जाना  चाहिए, क्योंकि सरकारी खजाना खाली है। ऐसे में आर्थिक किल्लत व बिना अनुभव सरकार चलाना मुश्किल साबित होगा। पहाड़ी राज्य और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण हिमाचल प्रदेश में विकास कार्यों पर लागत भी अधिक आती है और यहां प्रशासनिक व्यय अन्य बड़े राज्यों के बराबर है।   

विजय से जुड़ी नई उम्मीद
हिमाचल प्रदेश में भाजपा की जीत को कई मायने में अहम माना जा रहा है। बीते कुछ दशकों से हिमालयी क्षेत्र के लिए अलग मंत्रालय और नीति बनाने की वकालत की जा रही है। चूंकि उत्तराखंड में भाजपा की सरकार है, जबकि जम्मू-कश्मीर में यह सरकार की सहयोगी है। उत्तर-पूर्व के कुछ राज्यों में भी भाजपा का दखल बढ़ा है। इसलिए संभावना जताई जा रही है कि हिमालयी क्षेत्र के लिए अलग मंत्रालय और नीति बनाने के लिए जारी मुहिम को मजबूती मिलेगी। इसके अलावा, पड़ोसी राज्य उत्तराखंड के साथ साझा योजनाओं में भी तेजी आएगी। दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार होने के कारण परस्पर सहयोग वाली योजनाओं को सबसे अधिक फायदा होगा। उदाहरण के तौर पर किशाऊ बांध परियोजना को ही लें, तो यह केंद्र, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश का संयुक्त उपक्रम है। हिमाचल प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद बांध निर्माण में तेजी आएगी।

राजनीति में कोई एक जीतेगा तो दूसरा हारेगा ही, लेकिन मुझे हार की उम्मीद नहीं थी। व्यक्तिगत नुकसान (हार)  मायने नहीं रखता। खास बात यह है कि भाजपा ने हिमाचल में जीत दर्ज की। वोट देने के लिए राज्य की जनता का शुक्रिया।
—प्रो. प्रेम कुमार धूमल, भाजपा  

चुनाव न जीत पाना इत्तेफाक की बात है। पिछले कुछ चुनावों से हिमाचल में यह परंपरा बन गई है कि एक बार कांग्रेस की सरकार बनती है तो दूसरी बार भाजपा की। कांग्रेस का भविष्य उज्ज्वल है। हार के बाद ही जीत होती है।
—वीरभद्र सिंह, कांग्रेस

ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

जोजिला सुरंग परियोजना का निरीक्षण करते केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी

जोजिला सुरंग परियोजना में मुख्य सुरंग ब्रेकथ्रू का नितिन गडकरी ने किया निरीक्षण, हर मौसम में मिलेगी यातायात पहुंच

All India Radio Akashvani 90 Years Anniversary New Delhi

नई दिल्ली: देश की धड़कन ‘आकाशवाणी’ ने पूरे किए 90 साल, अब जल्द ही ‘विजुअल रेडियो’ से दर्शकों तक पहुंचेगी आवाज

Haridwar illegal mazar demolished bulldozer action Dhami govt

हरिद्वार : एक और अवैध मजार हुई जमींदोज, अब तक 590 अवैध मजारों पर चला धामी सरकार का बुलडोजर

समारोह को संबोधित करते हुए श्री मोहनराव भागवत

कार्यकर्ता विकास वर्ग द्वितीय : ‘दुनिया को एक नया रास्ता देने वाला भारत बनाएं’

क्या है जोजिला सुरंग परियोजना और क्यों है यह भारत के लिए रणनीतिक रूप से इतनी महत्वपूर्ण?

सीमा पर माैजूद घुसपैठिए

अभिमत : ‘पूर्व सरकारों ने घुसपैठ को वैध बना दिया था’

Load More

ताज़ा समाचार

जोजिला सुरंग परियोजना का निरीक्षण करते केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी

जोजिला सुरंग परियोजना में मुख्य सुरंग ब्रेकथ्रू का नितिन गडकरी ने किया निरीक्षण, हर मौसम में मिलेगी यातायात पहुंच

All India Radio Akashvani 90 Years Anniversary New Delhi

नई दिल्ली: देश की धड़कन ‘आकाशवाणी’ ने पूरे किए 90 साल, अब जल्द ही ‘विजुअल रेडियो’ से दर्शकों तक पहुंचेगी आवाज

Haridwar illegal mazar demolished bulldozer action Dhami govt

हरिद्वार : एक और अवैध मजार हुई जमींदोज, अब तक 590 अवैध मजारों पर चला धामी सरकार का बुलडोजर

समारोह को संबोधित करते हुए श्री मोहनराव भागवत

कार्यकर्ता विकास वर्ग द्वितीय : ‘दुनिया को एक नया रास्ता देने वाला भारत बनाएं’

क्या है जोजिला सुरंग परियोजना और क्यों है यह भारत के लिए रणनीतिक रूप से इतनी महत्वपूर्ण?

सीमा पर माैजूद घुसपैठिए

अभिमत : ‘पूर्व सरकारों ने घुसपैठ को वैध बना दिया था’

राजीव गांधी के ’15 पैसे’ वाले भ्रष्टाचार बनाम मोदी सरकार का DBT! जानिए कैसे टेक्नोलॉजी ने बदली देश के गरीबों की तकदीर

छत्रपति शिवाजी महाराज

हिन्दवी स्वराज्य से हिन्दू पद पादशाही तक : छत्रपति शिवाजी महाराज का अद्वितीय अभियान

PoJK में हुई बर्बरता पर भारत की दो टूक, नाकामियों को छिपाने के लिए मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहा पाकिस्तान

RSS Shatabdi Varsh Raipur Jan Goshthi Atul Limaye

“समाज की दुर्गति दुर्जनों से नहीं, सज्जनों की निष्क्रियता से होती है”: रायपुर में अतुल लिमये जी का बड़ा उद्बोधन

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies