नागालैंड की मान्यता
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नागालैंड की मान्यता

Written byArchiveArchive
Oct 2, 2017, 12:00 am IST
inArchive

दिंनाक: 02 Oct 2017 01:51:48

पाञ्चजन्य
वर्ष: 1४  अंक: 8
29 अगस्त ,1960

देशभक्ति और राष्ट्रनिष्ठा पर बगावत और गद्दारी की विजय
सरकार उनके सम्मुख घुटने टेक रही है, जिनमें न मातृप्रेम है
 न देश के प्रति निष्ठा,  लोकसभा में अटल जी की गर्जना
‘कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक गारों से लेकर गिलगिट तक यह भारत एक देश है। इसमें निवास करने वाली जनता एक है। यह हमारी मातृभूमि है, धर्मभूमि है और इसमें नागालैंड या अलग-अलग होमलैंड के लिए जगह नहीं हो सकती।’ इन शब्दों में भारतीय जनसंघ के मंत्री और संसदीय दल के नेता श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने लोक सभा में नए नागालैंड की निर्मिति का जोरदार विरोध किया। आपने कहा कि जो नया नागा राज्य बनेगा, इसकी आबादी मुश्किल से 4 लाख के करीब होगी। इसकी आमदनी भी सालाना पांच लाख से अधिक नहीं होगी।
अकल्पनीय और हास्यास्पद: अध्यक्ष महोदय, आपने शायद ही कभी ऐसा सुना हो कि साढ़े तीन लाख, चार लाख की आबादी और पांच लाख वार्षिक आमदनी का एक अलग राज्य बनाया जाए। इस प्रकार का राज्य बनाना मैं समझता हूं अकल्पनीय है। मगर जो चीज नहीं होनी चाहिए और जो कहीं नहीं हुई है, यह हमारे देश में हो रही है, क्योंकि शायद सरकार न तो प्रेम से समझा-बुझाकर लोगों को सीधी राह पर ला सकती है और न किसी वर्ग या समूह में विकार पैदा हो गया है तो उसका परिष्कार भी नहीं कर सकती।
सुरक्षा के मार्ग में बाधक:  हमें यह भी स्मरण रखना चाहिए कि नागा राज्य भारत के सीमांत पर बनेगा। एक ओर चीन है, पूर्वी पाकिस्तान है, वर्मा की सीमा लगी हुई है। यह एक छोटा सा राज्य होगा जो कि आर्थिक दृष्टि से भी देश की सुरक्षा के मार्ग में बाधक बनेगा।
बगावत और गद्दारी की विजय: यह स्पष्ट है कि असम के इन आदिवासी क्षेत्रों में केवल नागा लोग ही नहीं रहते और भी आदिवासी जातियां रहती हैं। किन्तु राज्य केवल नागाओं के लिए बनाया जा रहा है। आखिर इसका असर दूसरे आदिवासियों पर क्या होगा? शायद इसका एक कारण है कि कुछ नागा लोगों ने पिछले अनेक सालों से देश के खिलाफ बगावत की है, विद्रोह का झण्डा उठाया है और हथियारों और हिंसा के बल पर अपनी बात को मनवाने की कोशिश की है, हमारे जवानों को गोली का निशाना बनाया है, सरकार के प्रति वफादार है, उनको भी इन विद्रोही नागाओं के हाथों भारी संकट का सामना करना पड़ा है। ऐसी स्थिति में एक अलग राज्य बनाना पृथकतावाद को इनाम देना है और विद्रोहियों को हिंसा और विनाश के लिए भड़काना है। यह अलग राज्य नहीं बनाया जा रहा, मानो सरकार बगावत करने वालों के सामने घुटने टेक रही है। पृथक नागा राज्य की स्थापना एकीकरण पर विघटन की विजय है, … हिंसा की, ध्वंस की विजय है। हमें इस बात का भी विचार करना चाहिए कि उस क्षेत्र के अलावा संपूर्ण देश में अन्य जो आदिवासी बंधु रहते हैं उन पर इस पृथक राज्य के निर्माण की प्रतिक्रिया क्या होगी?

अर्थ का अभाव और प्रभाव
अर्थ के अभाव से तो धर्म का ह्रास होता ही है; अर्थ का प्रभाव भी धर्म की हानि करता है, अर्थ के अभाव और प्रभाव से ही आर्थिक स्वतंत्रता का हनन होता है। सुसाध्य आजीविका की अप्राप्ति तथा उत्पादन की बनाए रखने अथवा बढ़ाने के लिए आवश्यक पूंजी की कमी अर्थ का अभाव है। यह बात व्यक्ति और राष्ट्र दोनों पर लागू होती है। अर्थ की साधनता को भुलाकर उसमें आसक्ति, अर्थ से धर्मानुकूल कामोपभोग की इच्छा का, ज्ञान का, शक्ति का अभाव, अर्थ का अनुचित गौरव, समाज में आर्थिक विषमता, मुद्रा का आधिक्य एवं अवमूल्यन वे कारण हैं जिनमें अर्थ का प्रभाव उत्पन्न होता है। अर्थ का प्रभाव मानव
की कर्म-शक्ति को कुण्ठित कर अर्थ और श्री के हृास का कारण बनता है।
   —पं. दीनदयाल उपाध्याय (विचार-दर्शन, खण्ड-7, पृ. 63)

अंतरिक्ष में कृत्रिम उपग्रहों की स्थापना
जीवधारियों को अंतरिक्ष से सकुशल वापस लाने में रूस सफल
विगत 3 वर्षों से चद्र लोक की यात्रा करने के लिए रूस और अमेरिका अंतरिक्ष में कृत्रिम उपग्रह स्थापित करनें में व्यस्त हैं। सर्वप्रथम उपग्रह स्थापित करनें में रूस ने सफलता प्राप्त की थी जब स्पुटनिक1 को सकुशल अंतरिक्ष में स्थापित कर दिया गया था। अब अंतरिक्ष से जीवधारियों को पुन: जीवित अवस्था में वापस लाने में भी रूस ने ही सफलता प्राप्त की है। गत सप्ताह 2 कुत्ते, बन्दर, चूहे मक्खियां आदि जीवों को अंतरिक्ष भेजकर रूस ने सुकशल वापस पृथ्वी पर उतार लिया। रूस की इस सफलता से अब मानव की अंतरिक्ष यात्रा पर्याप्त सुगम हो गई है। अमेरिका ने अंतरिक्ष में डिस्ककरर-3 और ‘इको’ नामक जो दो नए कृत्रिम उपग्रह पृथ्वी को कक्ष में स्थापित किए हैं, उन्हें मिलाकर अंतरिक्ष में विद्यमान अमेरिकी उपग्रहों और ग्रहों की संख्या 16 तक पहुंच गई। अंतरिक्ष युग के प्रारम्भ से लेकर अब तक, अर्थात् 6 वर्षों की अवधि में अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए कुल मिलाकर 34 उपग्रह अथवा ग्रह अंतरिक्ष में छोड़े गए। उनमें से 27 परीक्षण अमेरिका द्वारा किए गए। अमेरिका द्वारा छोड़े गए इन 27 कृत्रिम उपग्रहों अथवा ग्रहों से 7 अब भी महत्वपूर्ण सूचनाएं पृथ्वी को प्रेरित कर रहे हैं। इस समय अंतरिक्ष में जो अमेरिकी कृत्रिम उपग्रह और ग्रह विद्यमान हैं, उनके विवरण अंतरिक्ष में स्थापित होने के क्रम के अनुसार इस प्रकार हैं:-
1- एक्सप्लोरर1 (जून, 31,1958) इस उपग्रह ने पृथ्वी के बाह्य वायुमण्डल में विद्यमान आंतरिक ‘वान एलन, विकिरण पट्टी’ की तथा पृथ्वी के वायुमण्डल  में विद्यमान विद्युत-चुंबकीय परत की खोज की।
2- वेनगार्ड- (17 मार्च, 1958)- इस उपग्रह ने यह खोज की कि पृथ्वी का आकार नासपाती जैसा है। इसने यह भी सूचना दी कि सूर्य किरणों के दबाव में उपग्रहों को अपनी कक्ष से थोड़ा-बहुत हटा दोने की शक्ति रहती है। इस उपग्रह से अब भी रेडियो संकेत प्राप्त हो रहे हैं।
3-वेनगार्ड -2 (फरवरी, 17, 1959)-इस उपग्रह ने पृथ्वी के वायुमण्डल में विद्यमान बादल-समूहों के अस्पष्ट चित्र पृथ्वी को प्रेषित करने में सफलता प्राप्त की।
4-पायोनियर-4 (3 मार्च, 1959)- यह कृत्रिम ग्रह सूर्य की परिक्रमा कर रहा है। इसने 4 लाख 7 हजार मील तक की दूरी से पृथ्वी को रेडियो-संकेत प्रेषित किए। इससे पूर्व इतनी अधिक दूरी से रेडियो संकेत पहले कभी पृथ्वी पर ग्रहण नहीं किए गए।

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