साक्षात्कार-‘‘दंगाइयों को मिला है ममता का खुला संरक्षण’’
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साक्षात्कार-‘‘दंगाइयों को मिला है ममता का खुला संरक्षण’’

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Jul 31, 2017, 12:00 am IST
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दिंनाक: 31 Jul 2017 10:56:11

भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष राज्य के हालात को देखते हुए मानते हैं कि ‘पश्चिम बंगाल धीरे-धीरे कश्मीर के रास्ते पर है।’ बंगाल में आएदिन होते दंगे और तृणमूल सरकार के रवैये पर पाञ्चजन्य संवाददाता अश्वनी मिश्र ने उनसे बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश:-

पश्चिम बंगाल में लगातार दंगे हो रहे हैं और हिन्दुओं को प्रताड़ित किया जा रहा है। पहले मालदा, कलियाचक, धूलागढ़ और अब बशीरहाट। इन दंगों के पीछे क्या कारण देखते हैं ?
देखिए, पश्चिम बंगाल का उद्भव ही सांप्रदायिक परिवेश से हुआ है। हिन्दू-मुसलमान के आधार पर प्रदेश का विभाजन हुआ और फिर पूरा बंगाल जाने वाला था लेकिन डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के प्रयास से हिन्दू बहुल जिलों को लेकर पश्चिम बंगाल बना। उसके बाद यहां 19.7 फीसदी मुसलमान रह गए थे लेकिन आज यही 30 फीसदी के आस-पास पहुंच गए हैं। लेकिन उस समय जिस आधार पर इस प्रदेश का विभाजन हुआ था वह मुस्लिम तुष्टीकरण कभी रुका ही नहीं। इसके बाद जो भी सरकार यहां रहीं उन्होंने मुस्लिमों का तुष्टीकरण किया और बांग्लादेश से मुसलमानों की घुसपैठ में बराबर वृद्धि होती गई। इसका परिणाम यह है कि राज्य में 1 करोड़ से ज्यादा बांग्लादेशी मुस्लिम हैं। राज्य में जैसे-जैसे इनकी संख्या बढ़ी यहां विभाजनकारी राजनीति होने लगी। पहले चुनाव में सिर्फ 5 मुस्लिम विधायक चुनकर विधानसभा में आए थे। सीपीएम के समय यह आंकड़ा 45 तक गया, आज यह 60 हो गया है। उनकी आबादी बढ़ रही है तो वहीं राजनीतिक शक्ति में भी इजाफा हो रहा है। पहले अकेले मुर्शीदाबाद मुस्लिम बहुल था आज मालदा, दीनाजपुर, बशीरहाट इसी जनगणना में मुस्लिम बहुल हो गए। साथ ही सीमावर्ती इलाका होने के कारण यहां सिमी, जमात एवं बांग्लादेश के जितने भी आतंकी और कट्टरपंथी संगठन हैं, उन सभी की शाखा हंै। इन सभी का आसानी से बांग्लादेश आना-जाना है। सरकार इन्हें पूरा संरक्षण देती है। पुलिस कुछ करे तो पार्टी का झंडा उठा लो और चिल्लाओ-मां, माटी, मानुष। भारत और बांग्लादेश की सीमा लगभग 2200 किमी. है। अधिकतर जगह पर कोई बाड़ नहीं है। इसके कारण सब कुछ यहीं से तस्करी होता है। इस तस्करी में सैकड़ों-करोड़ का लेनदेन होता है। राजनीतिकों का भी कुछ स्वार्थ होने के कारण कोई इस पर गौर नहीं करता। सीमावर्ती क्षेत्रों में टीएमसी खुद लगकर बंगलादेशी मुस्लिमों को राशन कार्ड दिला रही है। सच बात ये है कि बंगाल आज बड़ी कठिन परिस्थिति से गुजर रहा है, आगे क्या होगा कहना मुश्किल है।

बशीरहाट सहित दर्जनों स्थानों पर दंगे हुए। तृणमूल पार्टी और सरकार की भूमिका को आप किस तरह से देखते हैं?
जहां भी हिन्दुओं पर हमले हो रहे हैं, वहां राज्य सरकार उन्हें दबाने का प्रयास कर रही है और अराष्ट्रीय गतिविधि करने वालों को खुलेआम संरक्षण देती है। ममता सरकार ही बताए इसके पीछे क्या कारण है? धूलागढ़ को भी सरकार ने भरपूर दबाने का प्रयास किया। खुद मुख्यमंत्री ने बोला था कि वहां कुछ हुआ ही नहीं। लेकिन कुछ दिन बाद 200 हिन्दू पीड़ितों को 35 हजार रुपये देने उनके अधिकारी गए जिनमें कुछ ने लिया कुछ ने नहीं। बशीरहाट के बारे में भी उनका यही इरादा था। लेकिन संयोग से राज्यपाल जी ने मामले का संज्ञान लिया और ममता बनर्जी उस संज्ञान से बौखला गईं तो यह मामला उल्टा पड़ गया और देश को इस दंगे के बारे में पता चल गया। नहीं तो इसे भी वह दबा देतीं।

दंगों में जिस तरह हिन्दुओं का उत्पीड़न हो रहा है, कहीं बंगाल कश्मीर के रास्ते पर तो नहीं है?
देखिए, दंगा वहीं होता है जहां हिन्दू अल्पसंख्यक होता है। मैं यह बिल्कुल मानता हूं कि बंगाल आज कश्मीर के रास्ते पर है। और सिर्फ बंगाल ही नहीं असम सहित बहुत से राज्य इसी रास्ते पर हैं। बशीरहाट में 3 दिनों तक जिहादियों ने जुलूस निकालकर भय का माहौल बनाया, दुकानें लूटीं पर कोई कुछ नहीं बोला। लेकिन जिन हिन्दुओं की दुकानें लूटी गई थीं, जिनके घरों को तोड़ा गया वे प्रतिक्रिया करने निकले तो पुलिस ने उनको मारा-पीटा। आखिर यह सब क्या है? उनके एक विधायक ने हिन्दू परिवारों में घुस-घुसकर युवाओं को पकड़वाया और पुलिस के हवाले किया और ऐसे 22 हिन्दू युवाओं को विभिन्न धाराओं में बंद करा दिया। मूर्तियां तोड़ी गर्इं, जगन्नाथ जी की रथ यात्रा पर हमला किया। पिछले दिनों यहा दुर्गा पूजा के दौरान विसर्जन बंद कर दिया था और उस दौरान लगभग 10 से 15 जगहों पर सांप्रदायिक घटनाएं घटीं लेकिन सामने एक-दो के अलावा और नहीं आने दी गर्इं। यानी जहां-जहां मुस्लिम आबादी बहुसंख्यक हो रही है वहां हर दिन सांप्रदायिक घटनाएं घटती हैं। यह सब कश्मीर में होता है आज यहां हो रहा है। अब यहां के लोग मानने लगे हैं कि टीएमसी, अलगाववादी और आतंकी संगठन एक हैं।

बंगलादेशी मुस्लिमों की घुसपैठ लगातार जारी है। इससे राज्य की जनसांख्यिकी में परिवर्तन आ रहा है। इसे कैसे देखते हैं आप?
बिल्कुल, परिवर्तन हो रहा है। तभी तो आज राज्य में मुस्लिम आबादी 30 फीसदी के करीब जा पहुंची है। यह आंकड़ा कम नहीं होता है। सीमावर्ती क्षेत्रों में यही स्थिति है। सरकारी रपटों की मानें तो बंगाल आज महिला तस्करी, शिशु तस्करी, महिला उत्पीड़न में सबसे आगे है। साथ ही हिन्दुओं का जान-माल सुरक्षित नहीं है। आज बाजार उनके हाथ में है इसलिए विमुद्रीकरण का सबसे ज्यादा विराध यहीं हुआ। क्योंकि वह किसी भी कानून में बंधना नहीं चाहते। मुख्यमंत्री का सहारा मिलते ही यही लोग सड़कों पर उतरे। राज्य के अधिकतर जिलों में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की दृष्टि से आज स्थिति ठीक नहीं है।

पश्विम बंगाल का मीडिया हिन्दू उत्पीड़न की अधिकतर खबरों को दबाने का काम करता है। इसके पीछे क्या कारण है?
यहां का मीडिया सरकार के कहने पर चलता है और उसी के आगे पीछे नाचता है। अगर यहां हिन्दू-मुसलमान का दंगा हो जाए तो ‘कम्युनल’ कहकर वह उसे दबा देता है। यानी राज्य सरकार से मीडिया इतना डरा रहता है कि वह अपने मन से कुछ भी नहीं कर सकता। धूलागढ़ में जब राष्ट्रीय मीडिया ने उस दंगे को दिखाना शुरू कर दिया तब जाकर यहां के मीडिया ने कुछ छापा। इस बार फिर बशीरहाट के दंगे में उसने यही किया। जब राष्ट्रीय मीडिया ने मामले को दिखाना शुरू किया तब यहां के कुछ अखबारों ने छापा। कुछ सेकुलर मीडिया से जुड़े पत्रकार बशीरहाट गए जहां उनके साथ मारपीट की भी खबरें आईं। इस दौरान लोगों का आरोप था कि यह सही खबर नहीं लिखते।

बंगाल में बम बनाने के छोटे-छोटे कारखाने खुले हुए हैं और यह स्थानीय राजनीति का एक हिस्सा बन चुका है। कितनी सचाई है इस बात में?
 यह बात बिल्कुल सही है कि देश में आज बंगाल के बारे में सब यही बोलते हैं कि बंगाल में एक ही ‘इंडस्ट्री’ है वह बम ‘इंडस्ट्री’। और बाकी सभी उद्योग-धंधे ठप हैं। कम ही जिले हैं जहां बम विस्फोट नहीं हुए। अभी कुछ दिन पहले वीरभूम में तृणमूल के पार्टी कार्यालय में धमाका हुआ। यह धमाका इतना भयानक था कि कुछ साबुत नहीं बचा। खुद मुख्यमंत्री को बोलना पड़ा कि सब बम बरामद करो। तब बम निकलना शुरू हुए। तो यह सब सरेआम है। यहां कोई कानून-व्यवस्था नहीं है और जितने अराजक तत्व हैं वह सब तृणमूल के कार्यकर्ता बन बैठे हैं। जितना भी तस्करी का गोरखधंधा हो रहा है उसमें सभी संलिप्त हैं और जितना भी पैसा यहां से आता है वह सब पार्टी को ‘फंड’ होता है। माफिया, गुंडे, पुलिस और नेता इनका अपना गठजोड़ बन चुका है। आने वाले दिनों में इस प्रकार के कारनामें अगर जारी रहे तो राज्य की स्थिति और ज्यादा खराब होने वाली है।

 पश्विम बंगाल में लगातार भारतीय जनता पार्टी का विस्तार हो रहा है। ममता बनर्जी के बौखलाने का कहीं यह तो कारण नहीं?
बिल्कुल, ममता बनर्जी भाजपा के बढ़ते व्याप से इतना परेशान रहती हैं कि उनके भाषणों में भाजपा की आलोचना के अलावा कुछ नहीं होता है। वे और उनके सांसद-विधायक साफ बोलते हैं कि उनका पहला दुश्मन भाजपा है। अभी जो विस्तार योजना का काम हुआ उससे करीब 18 हजार कार्यकर्ता काम पर निकले। इनमें से कइयों के साथ तृणमूल के नेताओं ने मारपीट की और उन्हें धमकाया। ऐसी 300 से ज्यादा वारदातें हुई जिनमें डरा, धमकाया, मारपीट की गई और यहां तक कि घरों में आग लगाई गई लेकिन कोई भी कार्यकर्ता अपने घर नहीं गया। इतनी सारी समस्याओं के बाद भी भाजपा के कार्यकर्ता आगे बढ़ रहे हैं और लोग हमारे साथ आ रहे हैं। हमारा वोट प्रतिशत लगातार बढ़ रहा है। कुछ जगह तो हम 12 से सीधे 28 फीसद तक पहुंचे हैं। इस सब कारण से राज्य की मुख्यमंत्री डरी हुई हैं। और डर का कारण है कि वह किसी भी चीज का सहारा लेकर भाजपा को   राज्य में रोकना चाहती हैं। हम आने वाले दिनों में हर विधानसभा     क्षेत्र में व्यापक रूप से बैठक करने वाले हैं और लोगों को जागरूक करने वाले हैं। यानी जहां-जहां हम नहीं पहुंचे हैं वहां हम इस बार पहुंचेंगे। 

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