प्रधानमंत्री की विदेश यात्रा-साझे हित के ठोस प्रयास
June 14, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम Archive

प्रधानमंत्री की विदेश यात्रा-साझे हित के ठोस प्रयास

Written byArchiveArchive
Jun 5, 2017, 12:00 am IST
in Archive

दिंनाक: 05 Jun 2017 12:09:26

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जर्मनी, स्पेन, रूस और फ्रांस की हाल की यात्रा ने जहां इन सभी देशों के साथ भारत के संबंधों को नई ऊंचाई दी है, वहीं आतंकवाद जैसी वैश्विक समस्या के प्रति साझी चिंता को भी रेखांकित किया है

प्रशांत बाजपेई
यूरोप में यह बदलाव का दौर दिख रहा है। सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक परिवर्तनों के बीच प्रधानमंत्री मोदी जब यूरोप पहुंचे, उस समय शीत युद्ध के बाद का खुमार उतर रहा है और शीत युद्ध के पहले के चलन अब चलन से बाहर हो रहे हैं। बदलाव की राह पर भारत भी है। जिसकी बदली हुई गति और चाल को ध्यान से देखा जा रहा है। मोदी के एजेंडे में आतंकवाद, व्यापार, भूसामरिक समीकरण और रक्षा गठबंधन थे। चीन नयी राहें फोड़कर उनका इस्तेमाल रस्सियों की तरह भारत को उलझाने के लिए कर रहा है। आतंक के नए-पुराने गढ़ जहर उगल रहे हैं। अमूमन यही मुद्दे मोदी के मेजबान देशों में भी गरम हैं। मैनचेस्टर, पेरिस, बू्रसेल्स, स्टॉकहोम, वेस्टमिन्स्टर, बर्लिन, नॉरमैन्डी…शहर-दर-शहर जिहादी हमले हो रहे हैं। यूरोपीय संघ के मजबूत दुर्ग की दीवारों में दरारें उभरने लगी हैं। ब्रेक्जिट के भावी  आर्थिक परिणामों को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। द्वितीय विश्वयुद्ध के पहले से स्वाभाविक साझेदार रहे अमेरिका और यूरोप के बीच पहले जैसी गर्मजोशी नहीं रही है। पर्यावरण का मुद्दा बड़ी चुनौती है। यूरोजोन अनिश्चितता से आशंकित है। ऐसे में मोदी आतंक  के विरुद्ध आक्रामक चेहरे के रूप में, तेजी से बढ़ती हुई जीडीपी का भरोसा, एफडीआई, स्मार्ट सिटी और आधारभूत ढांचे के विकास की महत्वाकांक्षा के साथ, नयी उभरी कूटनीतिक-सामरिक परिस्थितियों में, बहुप्रतीक्षित अतिथि के रूप में देखे जा रहे हैं।
चार देशों के छह दिवसीय दौरे पर प्रधानमंत्री सबसे पहले 29 मई को जर्मनी पहुंचे जहां चांसलर एंजेला मार्कल के साथ उनकी लंबी चर्चा हुई। 30 मई को वे स्पेन में राजा फेलिप और राष्ट्रपति मैरिआनो से (तीन दशकों बाद स्पेन पहुंचने वाले भारत के प्रधानमंत्री के रूप में) मिले। उनकी यात्रा का आखिरी पड़ाव फ्रांस के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति के मेहमान के रूप में रहा। दोनों नेताओं ने दुनिया के सामने दिख रही विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की और साझे विकास को ध्यान में रखकर मुद्दों पर चलने का मन बनाया।
मोदी का यह दौरा खासा महत्वपूर्ण है। जापान की तरह जर्मनी भी भारत का मजबूत साझेदार है। तीनों देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार और स्थायी सदस्यता के मुद्दे पर एक दूसरे का समर्थन करते आए हैं। बिलियन डॉलर्स की आर्थिक सहायता दोनों देशों से आती रही है। तकनीक तथा दूसरे मामलों में जर्मनी के उद्योग विश्व में बेहतरीन हैं, तो भारत में मौके हैं। दोनों देश मौजूदा 17.42 बिलियन डॉलर के व्यापार को और आगे ले जाना चाहते हैं। मेक इन इंडिया किसी भी संभावित निवेशक के लिए बड़ा आकर्षण है। जीएसटी और दूसरे आर्थिक सुधार तथा भारत में केंद्र सरकार के स्तर पर भ्रष्टाचार मुक्त शासन मोदी के महत्वपूर्ण आयाम हैं। भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते की शर्तों को तय करना भी एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है। (भारत ने इसके कुछ मसौदों को अपने लिए हानिकारक बताकर इसे रद्द कर दिया था) इसके अलावा विदेश मंत्रालय का बयान बतलाता है कि दोनों नेताओं के बीच बातचीत का दायरा काफी विस्तृत रहा। प्रवक्ता ने कहा,‘‘दोनों नेताओं ने ब्रेक्जिट (ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से अलग होने का फैसला) की समीक्षा और इसके भारत-जर्मनी तथा यूरोपीय संघ पर पड़ने वाले असर पर चर्चा की। आतंकवाद और मजहबी कट्टरता के फैलाव पर भी बातचीत हुई।’’ जुलाई में जर्मनी के हैमबर्ग में जी-20 सम्मेलन होने जा रहा है। संभावना है कि इस बहुपक्षीय मंच पर जर्मनी के मुद्दों और दृष्टिकोण को लेकर भी चर्चा होगी। भू-राजनैतिक और भू-सामरिक मामलों पर भी दोनों देश और करीब आ रहे हैं। हिन्द महासागर क्षेत्र जर्मनी और सारे यूरोप के लिए बेहद महत्व रखता है। यहां से मलक्का बाइपास से होकर उनका तेलमार्ग गुजरता है। दरअसल तेल निर्यातक ओपेक देशों की तेल राजनीति या ब्लैकमेलिंग का शिकार होने से  बचने के लिए जर्मनी और दूसरे यूरोपीय देश अपने तेल आयात का बड़ा हिस्सा रूस और इस क्षेत्र के दूसरे देशों से मंगवाते हैं। इसलिए भारत की इस क्षेत्र में मजबूती और भारत के साथ गठजोड़ उनके लिए मायने रखता है।
चीन का ओबीओआर (वन बेल्ट वन रोड) या नव रेशम मार्ग पाक अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर से होकर गुजरता है जो कि भारत की संप्रभुता का उल्लंघन है। हाल ही में संपन्न फोरम की बैठक, जिसमें चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग के साथ 27 अन्य राष्ट्राध्यक्षों और 130 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, का बहिष्कार कर भारत ने अपनी दशकों पुरानी छवि के उलट कड़ा सन्देश दिया है। इस मार्ग में ग्वादर बंदरगाह से शुरू होने वाला चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर भी जुड़ता है। इस कदम पर भारत को यूरोपीय संघ का अप्रत्यक्ष समर्थन मिला, जैसा कि भारत में जर्मनी के राजदूत मार्टिन  द्वारा ओबीओआर को ‘चीन केंद्रित व्यापार तंत्र’ कहने और यूरोपीय संघ द्वारा समझौते पर हस्ताक्षर न करने से जाहिर होता है। स्पेन के साथ साइबर सुरक्षा, तकनीकी सहयोग, नागरिक उड्डयन और बंदियों के आदान-प्रदान सहित सात समझौतों पर हस्ताक्षर हुए।  मोदी ने स्पेन की कंपनियों को रक्षा, ऊर्जा और आधारभूत ढांचे में निवेश करने का आमंत्रण दिया। वैसे अब स्पेन, फ्रांस और जर्मनी के साथ भारत को दूसरा संतुलन भी बैठाना है। आज का यूरोप पहले की तरह अमेरिका का पिछलग्गू नहीं रहा। पर्यावरण  पर हुई पेरिस की बैठक और उसके मसौदों पर अमेरिका और यूरोपीय देशों में मतभेद उभर आये हैं और ट्रम्प को खरी-खरी सुननी पड़ी है। ट्रम्प भी अपनी खीझ को खुलकर व्यक्त कर रहे हैं। वहीं पर्यावरण को लेकर मोदी की प्रतिबद्धता की यूरोप में मुक्त कंठ से प्रशंसा हुई है। लेकिन मोदी सावधान थे क्योंकि अंतरराष्ट्रीय राजनीति के मोर्चे पर उन्हें यूरोप और अमेरिका के बीच संतुलन साधते हुए ट्रम्प का साथ भी निभाना है। इसलिए पर्यावरण रक्षा  के प्रति अपना आश्वासन दोहराते हुए मोदी ने कहा कि यदि पेरिस समझौता नहीं हुआ होता तब भी भारत पर्यावरण रक्षण की अपनी जिम्मेदारी निभाता। इस बीच, यूरोप की अपनी भविष्य दृष्टि है। भारत आज भले ही अमेरिका का विकल्प नहीं बन सकता लेकिन आर्थिक सामरिक रूप से बड़ी ताकत है जो भविष्य में किसी भी संभावना को साकार करने को तैयार हो रहा है।
उधर भारत के लिए चीन की चुनौती लगातार कायम है। मोदी के जर्मनी छोड़ते ही चीन के प्रधानमंत्री ली किशियांग जर्मनी जा पहुंचे। ली का बयान था कि दोनों देशों को मिलकर विश्व बाजार को ‘अस्थिर’ होने से रोकना है। सबको पता है कि चीनी प्रधानमंत्री के लिए मुख्य मुद्दा ओबीओआर है। चीन को ध्यान से सुना भी जाएगा, क्योंकि उसकी विकट आर्थिक शक्ति के चलते उसकी उपेक्षा आज कोई नहीं कर सकता। इसीलिए जर्मनी, ब्रिटेन, रूस या अमेरिका पहले चीन के साथ संतुलन साधते हैं, फिर भारत आकर उसे साधते हैं। तो जब चीनी प्रधानमंत्री अपने महत्वाकांक्षी ‘रेशम मार्ग’ की बाधाएं हटाने की कोशिश कर थे, तब मोदी पुतिन के साथ व्यापार, सुरक्षा, रक्षा उत्पादन पर बात कर रहे थे। इस साल भारत-रूस मैत्री के 70 साल पूरे हुए। दोनों के बीच आर्थिक-कूटनीतिक-रक्षा-ऊर्जा-निवेश-शिक्षा-विज्ञान आदि के परस्पर सहयोग का लंबा इतिहास है। ब्रिक्स बैंक,  इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बैंक मामलों में भी दोनों के साझा सरोकार हैं। ओबीओआर को लेकर रूस भी बहुत सहज नहीं है। चीन की चुनौती से दो-चार होता भारत रूस और यूरोप की आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए आर्थिक-सामरिक विकल्प लाना चाहता है जिसमें वह स्वयं केंद्रीय भूमिका में हो। चीन ने ओबीओआर को लेकर महत्वाकांक्षा पाली है। भारत के पास इसका बेहतरीन जवाब है-अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण कॉरिडोर (इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर) या रूस-भारत कॉरिडोर। यह रास्ता ईरान के चाबहार बंदरगाह  से अजरबैजान होता हुआ, कैस्पियन सागर क्षेत्र से होते हुए भारत और रूस को जोड़ेगा। सड़क, रेल और जहाज वाले इस मार्ग से भारत सीधे यूरोप और उत्तर-मध्य व पश्चिम एशिया से जुड़ जाएगा। वर्तमान में स्वेज नहर वाले रास्ते की तुलना में यह रास्ता आधा होगा। (स्वेज वाला मार्ग जल मार्ग है जबकि यह नया रास्ता अधिकांशत: सड़क और रेल मार्ग होगा) ये ज्यादा सुरक्षित होगा। यह रास्ता भारत को मास्को, बर्लिन, पेरिस, मैड्रिड, तुर्की, सीरिया, ईरान, इराक, कजाकिस्तान और मंगोलिया से जोड़ सकेगा।
आतंकवाद और पाकिस्तान को लेकर भारत को वैश्विक सहयोग की दरकार है। पाकिस्तान का दोस्त चीन भारत को मौलाना मसूद, सुरक्षा परिषद की सदस्यता और एनएसजी को लेकर परेशान कर रहा है। बीते कुछ वर्षों में रूस-चीन और पाकिस्तान के निकट आया है। लेकिन भारत के सामरिक-सुरक्षा संबंध यथावत हैं। सर्जिकल स्ट्राइक के समय भी रूस ने भारत का प्रखरता से समर्थन किया था। बहरहाल, भारत के पास कई अवसर हैं। अफगानिस्तान के मामले में भारत रूस और अमेरिका दोनों का विश्वास हासिल कर सकता है। जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर अमेरिका का हाथ खींचना एक रिक्तता पैदा करेगा। भारत नेतृत्व के लिए आगे आ सकता है। ईरान और रूस को साथ लेकर रूस-भारत कॉरिडोर या इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर पर आगे बढ़ने के परिणाम विस्मयकारी हो सकते हैं। इस यात्रा के दौरान उठने वाले मुद्दे और होने वाली घोषणाएं काफी महत्वपूर्ण रही हैं। कई सालों की हिचक के बाद पुराना भरोसा फिर बहाल हुआ जब सेंट पीटर्सबर्ग में मोदी की  उपस्थिति में पुतिन ने रावलपिंडी  को चौंकाते हुए बयान दिया कि पाकिस्तान के साथ रूस के करीबी सैन्य संबंध नहीं हंै और रूस आतंक के विरुद्ध भारत के साथ दृढ़ता से खड़ा है। यह एक अच्छी बढ़त है।  

ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

अफगानिस्तान के खिलाफ मैच में शुभमन गिल ने खेली कप्तानी पारी

afghanistan vs india: भारत ने अफगानिस्तान को 7 विकेट से हराया, गिल की कप्तानी पारी, हर्ष दुबे-गुरनूर बरार ने किया कमाल

हर्ष दुबे और गुरनूर बरार

afghanistan vs india : टीम इंडिया को मिले दो नए सितारे, धर्मशाला वनडे में हर्ष और गुरनूर की शानदार एंट्री

Mohan Bhagwat on Sanatan Dharma RSS Thiruvananthapuram Kerala Speech

“सनातन धर्म भारत की आत्मा, इसके सिद्धांतों से दुनिया का मार्गदर्शन करने के लिए तैयार रहें”: सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी

Women Cadets Permanent Commission IMA Dehradun Passing Out Parade President Draupadi Murmu

IMA में बना इतिहास: 9 महिला कैडेट्स को मिला स्थायी कमीशन, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल से समझें इसका महत्व

दिल्ली-NCR में अगले साल से डीजल ऑटो रिक्शा होंगे पूरी तरह बंद, प्रदूषण पर सख्त हुआ आयोग

राजनाथ सिंह ने विमान दुर्घटना में बलिदान 5 जवानों को दी श्रद्धाजंलि, असम के जोरहाट में हुआ था हादसा

Load More

ताज़ा समाचार

अफगानिस्तान के खिलाफ मैच में शुभमन गिल ने खेली कप्तानी पारी

afghanistan vs india: भारत ने अफगानिस्तान को 7 विकेट से हराया, गिल की कप्तानी पारी, हर्ष दुबे-गुरनूर बरार ने किया कमाल

हर्ष दुबे और गुरनूर बरार

afghanistan vs india : टीम इंडिया को मिले दो नए सितारे, धर्मशाला वनडे में हर्ष और गुरनूर की शानदार एंट्री

Mohan Bhagwat on Sanatan Dharma RSS Thiruvananthapuram Kerala Speech

“सनातन धर्म भारत की आत्मा, इसके सिद्धांतों से दुनिया का मार्गदर्शन करने के लिए तैयार रहें”: सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी

Women Cadets Permanent Commission IMA Dehradun Passing Out Parade President Draupadi Murmu

IMA में बना इतिहास: 9 महिला कैडेट्स को मिला स्थायी कमीशन, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल से समझें इसका महत्व

दिल्ली-NCR में अगले साल से डीजल ऑटो रिक्शा होंगे पूरी तरह बंद, प्रदूषण पर सख्त हुआ आयोग

राजनाथ सिंह ने विमान दुर्घटना में बलिदान 5 जवानों को दी श्रद्धाजंलि, असम के जोरहाट में हुआ था हादसा

श्रीराम मंदिर, अयोध्या

अयोध्या राम मंदिर दानपात्र विवाद: ट्रस्ट के अनुरोध पर SIT का गठन, ये 3 वरिष्ठ अधिकारी करेंगे गहन जांच

दीनदयाल जी, अटल जी के नाम पर सम्मान

Bangladesh Ram Mandir Controversy Gaibandha Islamists Rally Against Ram Murti

बांग्लादेश में श्रीराम प्रतिमा निर्माण पर रोक: हिंदू अस्तित्व और धार्मिक स्वतंत्रता पर उठते सवाल

Yuru Kabgyat Festival Ladakh Lamayuru Monastery Chams Mask Dance

लद्दाख का युरु काबग्यात उत्सव: आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक बौद्ध विरासत का अनूठा महापर्व

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies