नक्शों में समाया दिल्ली का जीवंत इतिहास
June 14, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम Archive

नक्शों में समाया दिल्ली का जीवंत इतिहास

Written byArchiveArchive
May 29, 2017, 12:00 am IST
in Archive

दिंनाक: 29 May 2017 14:38:54

 

इतावली लेखिका मारिया ने अपनी पुस्तक में दिल्ली के पुराने नक्शे प्रकाशित किए हैं। उन नक्शों के जरिए वे बताती हैं कि दिल्ली कैसी थी और अब कैसी हो गई

नलिन चौहान

दिल्ली और उसका इतिहास इतनी परतों में सिमटा हुआ है कि किसी एक विशिष्ट क्षेत्र का चयन संभव नहीं है। पूरी दिल्ली में पसरे हुए प्राचीन स्मारकों में से हर किसी की अपनी एक अलग मगर दिलचस्प कहानी है। सो, ऐसे में एक खोजी की दृष्टि से उसे तलाशने की आवश्यकता है। अंतरराष्टÑीय और राष्टÑीय स्तर के अनेक अभिलेखागारों में दिल्ली के विभिन्न मानचित्र संग्रहित हैं। इनमें से सबसे पुराने नक्शे को खोजकर निकालना, रुई के ढेर में से एक सुई को खोजने के समान है। ऐसे समय में इतालवी लेखिका पिलर मारिया ग्युरेरिइरी ने अपनी पुस्तक ‘मैप्स आॅफ डेल्ही’ (रोली बुक्स से प्रकाशित) में 19 वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध से लेकर 2021 के मास्टर प्लान तक के नक्शों को अपने अध्ययन का आधार बनाते हुए न केवल राजधानी के पुराने गुम हो चुके रास्तों को खोजा है, बल्कि उनके माध्यम से इतिहास को देखने का एक दृष्टिकोण दिया है।
मारिया ने इन नक्शों का केवल दिखावटी इस्तेमाल न करते हुए उनके माध्यम से शहर के विकास का विश्लेषण किया है। उन्होंने ठीक एक इतिहासकार, जो कि ऐतिहासिक घटनाओं की व्याख्या को समझने के लिए लिखित अभिलेखीय रिकॉर्ड का प्रयोग करता है, की तरह नक्शों काइस्तेमाल करते हुए शहर के विकास को समझने की कोशिश की है। उदाहरण के लिए वे अपने विश्लेषण के आधार पर मजबूती से इस बात को दर्शाती हैं कि दिल्ली अनेक एकल इकाइयों वाला एक संपूर्ण शहर है। कई जटिल संरचनाओं वाली ये इकाइयां एक बड़ी सामूहिक पहचान का निर्माण करती हैं और वह है शहरों का शहर दिल्ली।

हर नक्शा कहता एक कहानी
नक्शा बनाने के कई उद्देश्य होते हैं। कुछ नक्शे सैनिक उद्देश्यों के लिए, तो कुछ यात्रा-पर्यटन की सुविधा के लिए बनाए जाते हैं, जबकि अधिकांश नक्शे सर्वव्यापक प्रयोजनों के लिए बनते हैं। शहर का नक्शा तैयार करने वाले वास्तुकार, शहर के नियोजित विकास के लिए आवासीय जमीनों और दूसरे उपयोग की जमीनों के सीमांकन और रिकॉर्ड के लिए नक्शे तैयार करते हैं।
‘मैप्स आॅफ डेल्ही’ पुस्तक में, भिन्न उद्देश्यों से अलग-अलग समय में बनाए गए ये नक्शे एक साथ संकलित होकर बहुमूल्य ऐतिहासिक जानकारी का स्रोत बन गए हैं। इनकी मदद से दिल्ली के शहरी स्वरूप के विकास की यात्रा के साथ बीते दौर में शहर की बसावट के स्वरूप में आए विशिष्ट बदलावों को भी समझा जा सकता है।
इस पुस्तक में पहला नक्शा 19 वीं शताब्दी की शुरुआत का है। यह वही समय है जब अंग्रेज दिल्ली पहुंचे थे और दिल्ली पर आधिपत्य के लिए अंग्रेजों-सिंधिया की मराठा सेना के बीच पटपड़गंज में एक युद्ध (1803) हुआ था। भारत में मानचित्र बनाने की विधा का आरंभ उपनिवेशवाद के साथ होने के कारण इनका गहरा जुड़ाव रहा है। दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि मानचित्र निर्माण, उसकी सूचना से उपजने वाला ज्ञान और इन दोनों से मिलने वाली शक्ति का हमेशा से आपस में अटूट संबंध रहा है।
मारिया के अनुसार, ‘‘इस किताब को लिखते समय मुझे नक्शों में छिपे अनेक छोटी पर आकर्षक ऐतिहासिक घटनाओं के बारे में जानकारी मिली। उदाहरण के लिए, जैसे दिल्ली 1857, शहर की योजना और उससे सटे हुए इलाकों वाले नक्शे में, ‘जहां निकल्सन गिरा’ का वाक्य लिखा होना, रिज पर ब्रितानी कैम्प में क्वार्टर मास्टर जनरल के आॅफिस का बना होना या दिल्ली का युद्ध अंग्रेज जनरल लॉर्ड लेक का मराठों के विरुद्ध सैनिक अभियानों वाले नक्शे में आपस में खींची हुई दो छोटी तलावारों से मराठा-अंग्रेज युद्ध के स्थान को चिन्हित करता है।’’ उल्लेखनीय है कि 21 सितम्बर, 1857 को दिल्ली पर अंग्रेजों ने दोबारा अधिकार कर लिया, परंतु भारतीयों के साथ लड़ाई में जन निकल्सन मारा गया था।
इसी तरह, दिल्ली की घेराबंदी, 1857 का नक्शा, अंग्रेज छावनी की पहली स्थिति और बसावट को प्रदर्शित करता है। शाहजहांबाद की उत्तर दिशा में स्थित छावनी को रिज की ओर से सुरक्षा मिली हुई थी, जिसकी विशेषता छावनी का एक बहुत सरल और कामकाजी ग्रिड पैटर्न का होना था।
अंग्रेजों की सैन्य घेराबंदी को गहराई से समझने के लिए 8 जून से 14 सितंबर, 1857 की अवधि में दिल्ली में ब्रितानी सेना की तैनाती योजना को देखना उपयुक्त है। जहां, 1857 के गदर की सैन्य घटना का वास्तव में अधिक विस्तार में वर्णन किया गया है। नक्शे पर सैन्य युद्धाभ्यास साफ दिखते हैं, फिर चाहे वह दुश्मन की खाई हो, विशिष्ट तोपखानों की तैनाती की स्थिति या बाएं ओर से घुसने की संभावना हो अथवा दाएं ओर से घुसने की संभावना का संकेत। यहां अलग-अलग तोपखानों को चिह्नित करते हुए उनके कमांडिंग ब्रिगेडियर के नाम के साथ नामित किया हुआ है, जिसमें पहले भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का दृश्य साफ दिखाई देता है।
किसी भी शहर के समकालीन विकास के मूल को समझने के लिए इतिहास और पुराने नक्शों से बेहतर कोई माध्यम नहीं हो सकता है। उनमें झांकने से यह पता चलता है कि मौजूदा महानगर की अनेक समस्याओं का कारण स्थानीय संदर्भ में पश्चिम के गलत मॉडल (प्रारूप) को अपनाया जाना या सीधा कहें तो नकल करना है।
लेखिका ने शहर की वास्तुकला और योजना बनाते समय देसी संदर्भ, उसका भूविज्ञान, जलवायु और संस्कृति की अनदेखी को रेखांकित किया है। उसने वास्तुकारों के इन मूलभूत कारकों पर ध्यान देने की अपेक्षा केंद्रीयकृत योजना यानी ऊपर से थोपने की प्रवृत्ति की कमी को उजागर किया है।
मारिया के अनुसार, गुड़गांव और नोएडा में अपनी स्थानीय आवश्यकताओं से हटकर बनी नई, चमकदार, कांच और लोहे वाली वास्तुकला की इमारतें इस बात का जीता-जागता उदाहरण हैं। उनका मानना है कि भारतीय युवा वास्तुकारों में अभी भी भवन निर्माण के लिए विदेशी मॉडलों के प्रति एक ललक है। इसके लिए वह वास्तुकला के पाठ्यक्रम में भारतीय इतिहास और विरासत के न होने की बात को दोषी मानती हैं। कहीं से प्रेरित होकर नकल करना तभी कारगर होता है जब युवा वास्तुकारों को इस बात का ज्ञान होता है कि उनकी नकल स्थानीय जनता की आवश्यकताओं को पूरा करने में सफल होगी। पर दुर्भाग्य से वास्तविकता इससे बिल्कुल उलट है, क्योंकि अधिकतर युवा वास्तुकारों में इस दृष्टि का अभाव है। हैरानी की बात यह है कि मारिया को अपने अध्ययन में हाथ से बने नक्शे सबसे अधिक पसंद आए। उसमें भी विशेष रूप से 1807 का एक पुराना नक्शा, जो उन्हें उस दौर के गांव, जलमार्गों, नहरों और खेतों वाली विलक्षण दिल्ली में ले गया। मानो समय का पहिया उल्टा घूम गया हो।
इस पुराने नक्शे से इस बात का पता चलता है कि तब शहरी नियोजन में भूगोल और स्थलाकृति का विशेष ध्यान रखा जाता था। और कैसे दिल्ली जैसा प्राचीन शहर वास्तव में प्रकृति के समरूप बसा था न कि उसके विरुद्ध। उदाहरण के लिए अगर शाहजहांनाबाद के स्थान के चयन पर विचार करें तो पता चलेगा कि यह एक पहाड़ी पर बना शहर था जो कि प्राकृतिक रूप से बाढ़ से बचाव की स्थिति में था।  लेखिका का मानना है कि वास्तुकारों और योजनाकारों को पुरानी राजधानी की प्रकृति के साथ सहयोग की भूमिका के संबंध से प्रेरित होकर एक बेहतर और पर्यावरण-अनुकूल शहर बनाने की दिशा में काम करना चाहिए। दिल्ली के शानदार अतीत के नक्शों को देखना-बूझना एक अच्छा अनुभव हो सकता है।  

ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

अफगानिस्तान के खिलाफ मैच में शुभमन गिल ने खेली कप्तानी पारी

afghanistan vs india: भारत ने अफगानिस्तान को 7 विकेट से हराया, गिल की कप्तानी पारी, हर्ष दुबे-गुरनूर बरार ने किया कमाल

हर्ष दुबे और गुरनूर बरार

afghanistan vs india : टीम इंडिया को मिले दो नए सितारे, धर्मशाला वनडे में हर्ष और गुरनूर की शानदार एंट्री

Mohan Bhagwat on Sanatan Dharma RSS Thiruvananthapuram Kerala Speech

“सनातन धर्म भारत की आत्मा, इसके सिद्धांतों से दुनिया का मार्गदर्शन करने के लिए तैयार रहें”: सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी

Women Cadets Permanent Commission IMA Dehradun Passing Out Parade President Draupadi Murmu

IMA में बना इतिहास: 9 महिला कैडेट्स को मिला स्थायी कमीशन, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल से समझें इसका महत्व

दिल्ली-NCR में अगले साल से डीजल ऑटो रिक्शा होंगे पूरी तरह बंद, प्रदूषण पर सख्त हुआ आयोग

राजनाथ सिंह ने विमान दुर्घटना में बलिदान 5 जवानों को दी श्रद्धाजंलि, असम के जोरहाट में हुआ था हादसा

Load More

ताज़ा समाचार

अफगानिस्तान के खिलाफ मैच में शुभमन गिल ने खेली कप्तानी पारी

afghanistan vs india: भारत ने अफगानिस्तान को 7 विकेट से हराया, गिल की कप्तानी पारी, हर्ष दुबे-गुरनूर बरार ने किया कमाल

हर्ष दुबे और गुरनूर बरार

afghanistan vs india : टीम इंडिया को मिले दो नए सितारे, धर्मशाला वनडे में हर्ष और गुरनूर की शानदार एंट्री

Mohan Bhagwat on Sanatan Dharma RSS Thiruvananthapuram Kerala Speech

“सनातन धर्म भारत की आत्मा, इसके सिद्धांतों से दुनिया का मार्गदर्शन करने के लिए तैयार रहें”: सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी

Women Cadets Permanent Commission IMA Dehradun Passing Out Parade President Draupadi Murmu

IMA में बना इतिहास: 9 महिला कैडेट्स को मिला स्थायी कमीशन, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल से समझें इसका महत्व

दिल्ली-NCR में अगले साल से डीजल ऑटो रिक्शा होंगे पूरी तरह बंद, प्रदूषण पर सख्त हुआ आयोग

राजनाथ सिंह ने विमान दुर्घटना में बलिदान 5 जवानों को दी श्रद्धाजंलि, असम के जोरहाट में हुआ था हादसा

श्रीराम मंदिर, अयोध्या

अयोध्या राम मंदिर दानपात्र विवाद: ट्रस्ट के अनुरोध पर SIT का गठन, ये 3 वरिष्ठ अधिकारी करेंगे गहन जांच

दीनदयाल जी, अटल जी के नाम पर सम्मान

Bangladesh Ram Mandir Controversy Gaibandha Islamists Rally Against Ram Murti

बांग्लादेश में श्रीराम प्रतिमा निर्माण पर रोक: हिंदू अस्तित्व और धार्मिक स्वतंत्रता पर उठते सवाल

Yuru Kabgyat Festival Ladakh Lamayuru Monastery Chams Mask Dance

लद्दाख का युरु काबग्यात उत्सव: आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक बौद्ध विरासत का अनूठा महापर्व

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies