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नर्मदा सेवा यात्रा – 'नीर' में हैं नारायण

Written byArchiveArchive
May 22, 2017, 12:00 am IST
in Archive

दिंनाक: 22 May 2017 14:24:26

सदानीरा नर्मदा मध्य प्रदेश की जीवन-रेखा है। यहां की समृद्धि नर्मदा से ही है। प्रदेश के साथ-साथ मां नर्मदा अपने अमृत-जल से गुजरात का भी पोषण करती हैं। नर्मदा का महत्त्व दोनों प्रदेश भली प्रकार समझते हैं। इसका अधिक से अधिक स्नेह प्राप्त करने के लिए दोनों प्रदेश वर्षों तक आपस में झगड़े भी। यह संयोग ही है कि नर्मदा के तट पर पैदा हुए राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उसके जल से आचमन करने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नर्मदा के उद्गम स्थल पर आकर उसके ऋण से उऋण होने का संकल्प लेते हैं। प्रदेश में 148 दिन से संचालित 'नमामि देवी नर्मदे: नर्मदा सेवा यात्रा' का विशाल कार्यक्रम वन प्रदेश अमरकंटक में गत 15 मई, 2017 को आयोजित किया गया।  वास्तव में यह पूर्णता कार्यक्रम कम था, बल्कि नदियों के महत्त्व के प्रति जन-जागरण की मजबूत नींव पर नदी संरक्षण के भव्य स्मारक के निर्माण कार्य का शुभारंभ था। नर्मदा सेवा यात्रा की पूर्णता पर नर्मदा सेवा मिशन की घोषणा यहां की गई और इसे संवारने का संकल्प दोनों लोकप्रिय नेताओं ने स्वयं ही नहीं लिया, अपितु नर्मदा के लाखों पुत्रों को भी कराया।
समुद्र तल से लगभग 3,500 फुट की ऊंचाई पर स्थित अमरकंटक के पहाड़ों से निकल बहने वाली नर्मदा भारत की सबसे बड़ी पांच नदियों में शामिल है। इसका लगभग 82 प्रतिशत हिस्सा मध्य प्रदेश की प्यास बुझाता है। लेकिन, स्वार्थ में पड़कर सभी ने इसकी अनदेखी की और इसका शोषण प्रारंभ कर दिया। नर्मदा का सीना छलनी करके अवैध रेत उत्खनन किया। उसके गहने 'वृक्ष' उतार लिए। हम भूल गए कि नर्मदा हिम खण्डों से नहीं निकली, अपितु वृक्षों की जड़ से निकला बूंद-बूंद जल ही उसकी अथाह जलराशि है। अवैध उत्खनन और पेड़ों की अंधाधुंध कटाई ही क्या कम थी कि नर्मदा का दम निकालने के लिए उसमें कारखानों का कचरा और नगरों का सीवेज छोड़ा जाने लगा। वर्तमान हालात ऐसे हैं कि राज्य की जीवन-रेखा कही जाने वाली नर्मदा अपनी ही सांसें गिन रही है।
नर्मदा का संरक्षण भविष्य के लिए आवश्यक है। नर्मदा के प्रति संवेदनशील मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नर्मदा संरक्षण के महत्त्व को समझा और अपने मुख्यमंत्री पद के कार्यकाल के 11 वर्ष पूर्ण होने पर 'नर्मदा सेवा' का संकल्प लिया। उन्होंने 11 दिसंबर, 2016 को अनूपपुर जिले में स्थित नर्मदा उद्गम स्थल अमरकंटक से 'नमामि देवी नर्मदे: नर्मदा सेवा यात्रा' का शुभारंभ किया था। 148 दिन में 16 जिलों के 1100 गांवों, 615 ग्राम पंचायतों और 51 विकास खण्डों में 1100 जनसंवाद कार्यक्रमों को करते हुए यात्रा ने 3,350 किलोमीटर की दूरी तय की। इस यात्रा में लगभग 25 लाख लोग सम्मिलित हुए, जिसमें 1 लाख लोगों ने 'नर्मदा सेवक' बनने का संकल्प लिया। 15 मई, 2017 को यात्रा उसी स्थान पर पहुंचकर पूर्ण हुई। लगभग पांच लाख नर्मदा सेवकों की उपस्थिति में आयोजित नर्मदा सेवा यात्रा के पूर्णता कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नर्मदा संरक्षण का विजन दस्तावेज सबके सामने रखा। प्रधानमंत्री ने नर्मदा सेवा मिशन की कार्ययोजना के इस दस्तावेज को 'परफैक्ट डाक्युमेंट' बताया। उन्होंने कहा कि इस कार्ययोजना को सभी राज्यों को भेजा जाना चाहिए ताकि भारत के शेष राज्यों की सरकारें भी नर्मदा सेवा यात्रा की तर्ज पर अपनी नदियों को बचाने के लिए जनांदोलन चलाने को
प्रवृत्त हों।
पर्यावरण संरक्षण के लिए अनूठा और अनुकरणीय आंदोलन चलाने के लिए प्रधानमंत्री ने गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के नागरिकों एवं किसानों की ओर से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश की सरकार और नागरिकों का अभिनंदन करते हुए बधाई दी। उन्होंने कहा कि गुजरात के लोग बखूबी जानते हैं कि नर्मदा की एक-एक बूंद का कितना महत्त्व है।
कर्तव्य भाव जाग्रत करने का महायज्ञ     
पर्यावरण को क्षति क्यों पहुंच रही है, इस संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जब अधिकार भाव प्रबल हो जाता है और कर्तव्य भाव क्षीण हो जाता है, तब अनेक पर्यावरणीय समस्याएं उत्पन्न होती हैं। नदियों के संरक्षण के प्रति भी कर्तव्य भाव कम होने से नदियां लुप्त हो रही हैं। ऐसे समय नर्मदा सेवा का काम लोगों में कर्तव्य भाव जाग्रत करने का महायज्ञ सिद्ध होगा।
नदियों को हम दें जीवन
प्रधानमंत्री मोदी ने केरल की एक नदी का उदाहरण देते हुए कहा कि आज कई नदियों में पानी नहीं है, क्योंकि हम समय रहते चेते नहीं। हिन्दुस्थान में कई नदियां हैं, जिनका नक्शे पर नाम है, लेकिन उनमें जल का नामोनिशान नहीं है। मध्य प्रदेश के नागरिक समय रहते नर्मदा संरक्षण के प्रति जाग्रत हो गए हैं, यह अच्छी बात है। चूंकि नर्मदा नदी ग्लेशियर से नहीं निकलती, यह पौधों के प्रसाद से प्रगट होती है, इसलिए बड़े पैमाने पर पेड़ लगाकर ही इसकी रक्षा संभव है, इसके अतिरिक्त कोई और विकल्प नहीं है। पेड़ लगाकर हम आने वाली पीढ़ी की भी सेवा करेंगे। हम ऐसा कर्म करें कि आने वाली पीढि़यां हमें याद रखें जैसे कि आज हम अपने पुरखों का याद करते हैं। जैसे नदियों ने पुरखों को जीवन दिया, उसी तरह हम भी नदियों को जीवन दें।
नया भारत बनाने सब आगे आएं
प्रधानमंत्री ने नागरिकों से आह्वान किया कि वे हर पल आजादी के 75 वर्ष को याद करें और देश के लिए सकारात्मक योगदान देने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि अपनी संस्था, अपने गांव, परिवार और प्रदेश-देश के लिए योगदान देने के लिए संकल्पित हो जाएं। हम नया भारत बनाने का सपना लेकर चले हैं। इस काम में प्रत्येक नागरिक को जोड़ा है। प्रत्येक नागरिक यह कोशिश करे कि वह अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान कैसे दे सकता है। यदि नागरिक एक कदम आगे चलेंगे तो देश सवा सौ करोड़ कदम आगे निकल जाएगा। इस मौके पर उन्होंने 'नर्मदे-सर्वदे' का नया उद्घोष भी दिया।
नदी संरक्षण के लिए इस अनूठे आंदोलन के सूत्रधार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूर्णता कार्यक्रम में सेवा यात्रा का समूचा ब्यौरा प्रस्तुत किया और भविष्य की कार्ययोजना पर भी विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि नर्मदा सेवा यात्रा समाप्त नहीं हुई है, बल्कि नर्मदा सेवा मिशन में बदल गई है। नर्मदा सेवा मिशन की कार्ययोजना को समाज के साथ मिलकर क्रियान्वित किया जाएगा। नर्मदा सेवा मिशन की कार्ययोजना की प्रगति का प्रतिवेदन एक साल बाद जनता को समर्पित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश की शेष नदियों के संरक्षण के लिए भी प्रयास शुरू होंगे।
 अगले साल से ताप्ती, बेतवा और चंबल तथा अन्य नदियों के संरक्षण का कार्य शुरू किया जाएगा। क्षिप्रा को बचाने के लिए भी जनांदोलन चलाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने नर्मदा सेवकों से वादा किया कि नगरों के सीवेज को नदियों में मिलने से पूरी तरह रोका जाएगा। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे और ट्रीटमेंट के बाद का पानी सिंचाई में उपयोग किया जाएगा। कारखानों के दूषित जल और कचरे को भी नदियों में मिलने से रोका जाएगा। नदियों के आसपास के गांव खुले में शौच मुक्त बनाए जाएंगे। नर्मदा के दोनों ओर बसे गांवों में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा और रेत की जरूरत के कारण नर्मदा को छलनी नहीं होने देंगे। खनन का कार्य वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार किया जाएगा। अमरकंटक की पहाड़ी पर किसी भी प्रकार का उत्खनन नहीं होने दिया जाएगा।
एक वर्ष में 12 करोड़ पौधे रोपेंगे
मुख्यमंत्री चौहान ने बताया कि प्रदेश के 25 लाख लोग नर्मदा सेवा से जुड़ गए हैं। इनमें से करीब 80,000 नर्मदा सेवक स्थायी रूप से नर्मदा सेवा मिशन से जुड़ गए हैं। अब नर्मदा सेवकों के सहयोग से 2 जुलाई को नर्मदा के तटों पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जाएगा। इनकी रक्षा की जिम्मेदारी के लिए वृक्ष सेवक उपलब्ध रहेंगे। इस वर्ष में 12 करोड़ पौधे लगाये जायेंगे। इनमें से दो जुलाई को छह करोड़ पौधे लगाए जाएंगे। अगले वर्ष 15 करोड़ पौधे लगाए जाएंगे।
प्रशासक और उपासक हों साथ
आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने जल का महत्व बताते हुए कहा कि नीर में ही नारायण है। जल की स्वाभाविक मांग होती है। आज जल की कमी हो रही है। इसलिए शासक, प्रशासक और उपासक को एक साथ काम करने का संकल्प लेने का अवसर है।
पढ़ाए जाएंगे नदी संरक्षण के पाठ

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नर्मदा सेवा मिशन की कार्ययोजना की चर्चा करते हुए बताया कि नदियों के संरक्षण और पर्यावरणीय शुद्धता के अध्ययन के लिए विश्वविद्यालयों में विभाग खोले जाएंगे। साथ ही उन्होंने अमरकंटक के पर्यावरणीय और आध्यात्मिक महत्व को देखते हुए इसे मिनी स्मार्ट सिटी बनाने की घोषणा भी की।  
भविष्य में पीने योग्य पानी की कमी न हो इसके लिए मध्य प्रदेश सरकार का यह मिशन समयानुकुल है। भारत जल की आराधना में जुटा है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में इस दिशा में काम हो रहा है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री राज्य के लिए आधुनिक भगीरथ सिद्ध हुए हैं। सिंहस्थ का आयोजन कर वे आधुनिक विक्रमादित्य साबित हुए।    -लोकेन्द्र सिंह-

मां नर्मदा का महात्म

नर्मदा भारत की प्राचीन नदियों में से एक है। पुण्यदायिनी नर्मदा का जन्मदिवस प्रतिवर्ष माघ शुक्ल सप्तमी को 'नर्मदा जयंती महोत्सव' के रूप में मनाया जाता है। नर्मदा की महत्ता को इस प्रकार बताया गया है कि जो पुण्य गंगा में स्नान करने से या यमुना का आचमन करने से मिलता हैं, वह नर्मदा के नाम स्मरण करने मात्र से मिल जाता है। नर्मदा नदी का उल्लेख अनेक धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। स्कंद पुराण में नर्मदा का वर्णन रेवा खंड के अंतर्गत किया गया है। कालिदास के 'मेघदूत' में नर्मदा को रेवा का संबोधन मिला है। रामायण तथा महाभारत में भी अनेक स्थान पर नर्मदा के महात्म को बताया गया है। शतपथ ब्राह्मण, मत्स्य पुराण, पद्म पुराण, कूर्म पुराण, नारदीय पुराण और अग्नि पुराण में भी नर्मदा का जिक्र आया है। नर्मदा की धार्मिक महत्ता के कारण प्रदेश का बहुत बड़ा वर्ग नर्मदा के प्रति अगाध श्रद्धा रखता है।

नर्मदा सेवा यात्रा दुनिया की एक असंभव और असामान्य घटना है, जब लाखों लोग एक नदी की रक्षा के लिए संकल्पबद्ध हुए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, मध्यप्रदेश की जनता और नर्मदा सेवा से जुड़े भक्तों को इस असाधारण कार्य के लिए बधाई।
– नरेन्द्र मोदी, प्रधानमंत्री

नीर में ही नारायण हैं। लेकिन आज जल की कमी हो रही है। इसलिए शासक, प्रशासक और उपासक को एक साथ काम करने का संकल्प लेने का अवसर है।
-आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि

मुख्यमंत्री का दायित्व वर्तमान शासन संचालन तक सीमित नहीं है। भविष्य की पीढि़यों के हित संरक्षण का विचार और तदनुसार कार्य भी हमारी जिम्मेदारी है। इस दायित्व बोध से ही नर्मदा सेवा यात्रा आरंभ की गई है।
– शिवराज सिंह चौहान
मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश 

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