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पश्चिम बंगाल में भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता से माकपा, कांग्रेस, विशेषकर सत्तारूढ़ तूणमृल कांग्रेस के नेताओं में भगदड़ मची हुई है। तृणमूल के कार्यकर्ता और नेता भाजपा की ओर जा रहे हैं। इससे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गुस्साई हुई हैं और अनर्गल बयान दे रही हैं
असीम कुमार मित्र
पिछले दिनों भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पश्चिम बंगाल में थे। उन्होंने कई जगहों पर भाजपा के कार्यकर्ताओं को संबोधित कर उनका मनोबन बढ़ाया। जब शाह अपने कार्यकर्ताओं से मिल रहे थे, ठीक उसी समय राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उत्तर बंगाल के दौरे पर थीं। उन्होंने कामतापुर के आंदोलनकारियों की एक आम सभा बुलाई थी। उद्देश्य था अमित शाह को यह दिखाना कि बंगाल में उनकी दाल नहीं गलेगी। परंतु हो रहा है इसके विपरीत। भाजपा के प्रति लोगों में रुझान बढ़ रहा है।
इन सबसे लोगों का ध्यान हटाने के लिए ममता बनर्जी हर मुमकिन कोशिश कर रही हैं। इसका एक उदाहरण बहुत ही दिलचस्प है। ममता की सभा की एक तस्वीर तृणमूल विरोधी कोलकाता के एक बांग्ला दैनिक, जिसकी प्रसार संख्या 5,50,000 है, के कार्यालय में आई। उस तस्वीर में दिखाई दे रहा था कि ममता बनर्जी की सभा जिस मैदान में थी, वह मैदान आधा खाली था। ऐसा कहा जा रहा है कि उस तस्वीर को देखकर संपादक भड़क गए और समाचार संपादक से पूछताछ करने लगे। इसके साथ ही उन्होंने उस फोटोग्राफर को नौकरी से निकालने की बात कही। हालांकि उसकी नौकरी नहीं गई। समाचार संपादक ने पूरी बात अपने पर ले ली और कहा कि मैंने ही उसे समाचार के नजरिए से फोटो लेने को कहा था।
अब प्रश्न यह उठता है कि उस दैनिक के संपादक इस तरह से एकाएक बदल कैसे गए। कुछ लोगों का कहना है कि राज्य सरकार ने उस दैनिक में छपे सरकारी विज्ञापनों की राशि ने रोक रखी है। कुछ लोग यह भी कहते हैं कि उन संपादक के लिए ममता ने राज्यसभा की एक सीट भी खाली कर रखी है।
दरअसल, तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी को यह एहसास नहीं था कि अमित शाह का बंगाल दौरा उनके लिए इतना डरावना होगा। इस डर के मारे ममता बनर्जी ने लगातार तीन दिन तक (जब तक शाह बंगाल में रहे) अनाप-शनाप बयान दिए। दौरे के दूसरे दिन शाह ने जनजातीय समाज के परिवार के घर जमीन पर बैठकर भोजन किया। मीडिया ने इसको खूब प्रचारित किया और लोगों ने भी इसकी सराहना की। लेकिन ममता को भला यह सब हजम कैसे होता? करीब एक हफ्ते बाद ही परिवार के मुखिया राजू और उसकी पत्नी को तृणमूल कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर डरा-धमकाकर प्रेस के सामने अपनी पार्टी के झंडे पकड़ाकर उन्हें तृणमूल का सदस्य बता दिया। उल्लेखनीय है कि बंगाल दौरे के दौरान अमित शाह अतिथि गृहों में ही ठहरते थे। यह बात ममता बनर्जी को भलीभांति पता थी। इसके बावजूद उन्होंने गलतबयानी की।
लोगों का मानना है कि वे बंगाल में भाजपा की लोकप्रियता से घबराने लगी हैं। बंगाल में हाल में जितने भी चुनाव हुए हैं, उनमें भाजपा का मत प्रतिशत जबरदस्त ढंग से बढ़ा है। इस वजह से तृणमूल कांग्रेस सहित अनेक दलों के नेता और कार्यकर्ता भाजपा के पाले में जाने का मन बना रहे हैं। इससे तृणमूल कांग्रेस, माकपा, कांग्रेस आदि सभी दलों में हड़कंप-सा मच गया है। विशेष कर तृणमूल कांग्रेस के नेता से लेकर आम कार्यकर्ता सभी एक-दूसरे के प्रति संदेह की नजर से देख रहे हैं। देखा यह जा रहा है कि जब तृणमूल कांग्रेस के दो कार्यकर्ता मिलते हैं तो पहली बात यह होती है कि आज तृणमूल छोड़कर भाजपा में कौन जा रहा है?
तृणमूल के नेता खुद स्वीकार करने लगे हैं कि उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव परिणाम के बाद से ही पश्चिम बंगाल के गांवों तथा शहरी इलाकों में तृणमूल छोड़कर भाजपा में जाने की होड़ मची है। यह भी कहा जा रहा है कि नारदा घोटाले के आरोपपत्र में जिन 13 बड़े नेताओं के नाम हैं, वे लोग तृणमूल कांग्रेस छोड़ने का मन बना चुके थे, लेकिन उससे पहले ही उनका ‘खेल’ खत्म हो गया। आने वाला समय बताएगा कि बंगाल में भाजपा कितनी सफल होगी, लेकिन फिलहाल तो एक बात साफ दिख रही है कि उसने बंगाल में जड़ें जमानी शुरू कर दी हैं। ममता के लिए यही सबसे बड़ी चिंता
की बात है।











