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समानता, समता और बंधुता की नई पहल

Written byArchiveArchive
Apr 24, 2017, 12:00 am IST
in Archive

दिंनाक: 24 Apr 2017 15:27:28

बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती के दिन दिल्ली में सामाजिक समरसता के लिए एक नई पहल हुई। राष्टÑीय स्वयंसेवक संघ, दिल्ली प्रांत के इस कदम की बड़ी प्रशंसा हो रही है। आने वाले समय में यह कदम सामाजिक समरसता का सेतु सिद्ध हो सकता है

अरुण कुमार सिंह

समरसता के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले बाबासाहेब डॉ़ भीमराव आंबेडकर की 126वीं जयंती 14 अप्रैल को पूरे देश में मनाई गई। बाबासाहेब कहा कहते थे कि समाज में स्वतंत्रता के बिना समानता नहीं आएगी और इन दोनों के बिना बंधुता की कल्पना तक नहीं की जा सकती।
बाबासाहेब के इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उनके जन्म दिवस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने एक नई पहल की है जिसे सह सरकार्यवाह श्री वी़ भागैया का सहयोग और आशीर्वाद मिला। श्री भागैया ने 14 अप्रैल को सबसे पहले संसद भवन परिसर में आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया। उल्लेखनीय है कि वहां हर वर्ष डॉ़ आंबेडकर की मूर्ति पर माल्यार्पण किया जाता है। उस दिन वहां राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित थे।
इन सबने डॉ. आंबेडकर की मूर्ति पर माल्यार्पण किया।  
इसके बाद सामाजिक समरसता के प्रसार हेतु लिए भागैया जी ने दिनभर अपने कार्यक्रमों में भाग लिया, जिनसे वंचित वर्ग वे प्रति सौहार्द के अद्भुत उदाहरण सामने आए। कार्यकर्ताओं ने उस दिन भागैया जी का जलपान एक जाटव परिवार में रखा था। परिवार के मुखिया हैं श्री जीत सिंह। वे करोलबाग जिले के सामाजिक समरसता मंच प्रमुख भी हैं। उनका परिवार नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के समीप पहाड़गंज के भारत नगर में रहता है।
यहां जाटव समाज के लगभग 5,000 लोग रहते हैं।
भागैया जी करीब 10 बजे जीत सिंह जी के घर पहुंचे, जो एक कमरे का है। साथ में प्रांत कार्यवाह श्री भारतभूषण और कुछ स्थानीय कार्यकर्ता थे। कमरे में एक बिस्तर के अलावा चार-पांच कुर्सियां रखी थीं और जमीन पर एक दरी बिछी थी। घर के बरामदे का इस्तेमाल रसोईघर के लिए किया जाता है। उसी बरामदे से होते हुए सभी कमरे में दाखिल हुए। साफ है कि घर भले ही छोटा हो, पर उनका दिल बहुत ही बड़ा है। परिवार के आग्रह पर भागैया जी बिस्तर पर बैैठे। उसके बाद उन्होंने परिवार के मुखिया जीत जी से अन्य सदस्यों की जानकारी ली। कुछ ही देर में जलपान आया। जलपान करते हुए उन्होंने भारत नगर की अन्य जानकारियां लीं। इलाके के बच्चे किन विद्यालयों में पढ़ते हैं, उनके खेलने के लिए मैदान है या नहीं! कार्यकर्ताओं ने बताया कि यहां के बच्चे सरकारी और निजी दोनों तरह के विद्यालयों में पढ़ते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भारत नगर में नगर निगम के तीन विद्यालय हैं। तीनों के भवन ठीक हालत में नहीं हैं इसलिए तीनों बंद पड़े हैं। इस पर भागैया जी ने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे उन विद्यालयों की तस्वीर खींचें और संबंधित विभागों को भेजें। उन्होंने कार्यकर्ताओं से यह भी कहा कि इन विद्यालयों में सुधार के लिए काम करें। इनका स्तर सुधरना चाहिए। जब तक विद्यालय नहीं सुधरेंगे, तब तक नई पीढ़ी को अच्छी दिशा नहीं मिल पाएगी। उन्होंने कहा कि समाज में संस्थागत परिवर्तन के लिए हम सबको मिल-जुलकर काम करना होगा। देश में 75 प्रतिशत लोग सामान्य परिवारों के हैं। उनके पास साधन सीमित हैं। इन परिवारों के बच्चे समाज के सहयोग से ही आगे बढ़ सकते हैं।
भारत नगर में भागैया जी को पता चला कि उनसे मिलने वाले कार्यकर्ताओं में एक बड़े अच्छे भजन गायक भी हैं। अंत में उन्होंने उस कार्यकर्ता से भजन सुना और घर की गृहिणी से भी बातचीत की। अपनत्व के इस भाव से वह बहुत गदगद् हुर्इं।  
इसके बाद भागैया जी संसद भवन के निकट सामाजिक समरसता मंच द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे। वहां उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति का विकास ही देश का विकास है, लेकिन अनुसूचित जातियों के नेताओं और संगठनों की बड़ी संख्या में  उपस्थिति के बावजूद उनके विकास के लिए जितना काम होना चाहिए, वह नहीं हो पा रहा है। इसकी जिम्मेदारी सभी पर है कि वे अनुसूचित जातियों के समग्र विकास की चिंता करें। श्री भागैया ने अनुसूचित जाति के छात्रों को छात्रवृत्ति मिलने में हो रही देरी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अभी तक 2016-17 की छात्रवृत्ति भी इन छात्रों को नहीं दी गई है। ऐसी स्थिति में ये छात्र किस प्रकार अपनी पढ़ाई जारी रख पाएंगे? उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति के कल्याण के लिए राज्य सरकारों को दिया गया पैसा किसी और काम में लगाए जाने के उदाहरण भी सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति के हितों की रक्षा करने के लिए सबको मिलकर प्रयास करना होगा। श्री भागैया ने कहा कि डॉ. आंबेडकर हमेशा कहा करते थे कि शिक्षा प्राप्त कर योग्य बनो और संघर्ष करो। नई पीढ़ी को उनकी यह शिक्षा याद रखनी होगी। उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर का स्पष्ट मत था कि भारत में केवल भौगोलिक एकता ही नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक एकता भी है। उन्होंने भारत को एक रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और सामाजिक आंदोलन को संतुलित ढंग से चलाया। इस अवसर पर दिल्ली प्रांत के संघचालक श्री कुलभूषण आहूजा सहित अनेक वरिष्ठ जन उपस्थित थे।
श्री भागैया के लिए दोपहर के भोजन का प्रबंध मानकपुरा (करोलबाग) में रहने वाले श्री राधेलाल के यहां किया गया था। वे भी अनुसूचित वर्ग से हैं। जब भागैया जी उनके घर पहुंचे तो देहरी पर उनका स्वागत किया गया। राधेलाल जी ने उन्हें तिलक लगाया और परिवार के अन्य लोगों ने उनका अभिवादन किया। उनके साथ सह प्रांत संघचालक श्री आलोक कुमार, सामाजिक समरसता मंच, दिल्ली प्रांत के संयोजक श्री ओमप्रकाश गिहारा और अनेक स्थानीय कार्यकर्ता थे।
एक फैक्टरी में काम करने वाले राधेलाल जी का घर भी एक कमरे का है। घर में प्रवेश करते ही पहली नजर दीवार में एक आले में बने मंदिर पर गई। भागैया जी ने सबसे पहले मंदिर के सामने सिर झुकाया। मंदिर के ऊपर दीवार पर एक तस्वीर टंगी हुई है। भागैया जी ने पूछा कि यह तस्वीर किनकी है। राधेलाल जी ने बताया कि ये मेरे माता-पिता हैं, जो अब इस दुनिया में नहीं रहे। इसके बाद उन्होंने उनको भी प्रणाम किया। भागैया जी ने मजाक के तौर पर कहा कि अब चलते हैं। इस पर राधेलाल जी ने पूछा— ‘‘कहां, भोजन तैयार है। ’ भागैया जी ने कहा, मैं भोजन की ही बात कर रहा हूं, इस पर सभी हंसने लगे। इसी हंसी-मजाक के माहौल में राधेलाल जी भोजन परोसने लगे। भागैया जी ने उनसे कहा कि भोजन तो माता जी (राधेलाल जी की पत्नी) के हाथों से ही लेंगे। वे रसोई में थाली लगा रही थीं। इसके बाद वे खुद ही भोजन की थाली लेकर आर्इं। भोजन के बाद भागैया जी ने भगवान कृष्ण का एक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि जब सांदीपनी आश्रम में भगवान कृष्ण की शिक्षा पूरी हुई तो ऋषि सांदीपनी ने उनसे कहा कि कोई वरदान मांगो। इस पर भगवान श्रीकृष्ण ने कहा- ऋषिवर! ऐसा वरदान दें कि मुझे सर्वदा माता के हाथ का खाना मिलता रहे। इस पर उन्होंने कहा— आप तो पूरे विश्व में भ्रमण करने वाले हैं। ऐसे में आपकी माता जी कहां-कहां खाना लेकर घूमती रहेंगी? यह तो संभव नहीं है, पर हां, यह हो सकता है कि आपको सदैव किसी माता के हाथ का ही भोजन मिले। भागैया जी ने कहा कि उस वरदान का लाभ हम जैसे लोगों को भी मिल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि माता के हाथ के भोजन में असीम प्यार, वात्सल्य और स्नेह छिपा रहता है। ऐसा भोजन हर किसी को मिले। इसके बाद उन्होंने राधेलाल जी की बहू (बेटे की पत्नी) से भी बात की और उनसे कहा कि अपने माता-पिता को मेरा नमस्कार कहना। इन प्रसंगों से राधेलाल जी भाव-विभोर हो गए।
भागैया जी राधेलाल जी के घर से निकले तो गली में एक बालक मिला। उन्होंने बालक को पुचकारते हुए नाम पूछा। वह शरमा गया। इसके बाद उन्होंने उसके घर वालों को इस तरह आवाज दी, मानो उन्हें जानते हों। आवाज सुनकर एक छोटी-सी लड़की बाहर निकली। उसने बताया कि घर में कोई बड़ा नहीं है। इसके बाद भागैया जी ने कार्यकर्ताओं से कहा कि इस बच्चे को कृमि मारने की दवा दिला दें। चेहरे से पता चलता है कि इसके पेट में कीड़े हैं। तब तक वहां मुहल्ले के और कई लोग भी आ गए। सभी साथ-साथ चलने लगे। रास्ते में भागैया जी ने लोगों से कहा कि हर हफ्ते एक दिन मुहल्ले में सफाई अभियान चलाएं। उन्होंने लोगों से यह भी कहा कि बच्चों को जरूर पढ़ाएं।
शाम को भागैया जी न्यू कोंडली के एक बौद्ध मठ में गए। वहां उन्होंने परंपरागत ढंग से पूजा की, भिक्खुओं का प्रवचन सुना और उन्हें चीवर दान किया। इसके बाद उन्होंने कहा कि आज विश्व को भगवान बुद्ध की करुणा, दया, अहिंसा की बड़ी आवश्यकता है। इस दिशा में साधु-संत और बौद्ध भिक्षुओं को मिलकर काम करना चाहिए।
भागैया जी की इस पहल के संदर्भ में अनेक लोगों ने कहा समरसता के इन अनूठे प्रयासों से आज नहीं तो कल सुखद परिणाम अवश्य आएंगे। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि ऐसे प्रयास लगातार होने चाहिए, क्योंकि आज समाज में समरसता की सबसे अधिक जरूरत है।   

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