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'अपने पास के समाज को देश के लिए करें संगठित'

Written byArchiveArchive
Feb 6, 2017, 12:00 am IST
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दिंनाक: 06 Feb 2017 15:06:45

'भारत की सेवा करनी है तो अपने आसपास के समाज में संगठन खड़ा करें। जिस दिन ऐसा होने लगेगा, भारत को हम जिस स्थान पर देखना चाहते है, वह देख सकेंगे।' उक्त वक्तव्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उत्तर क्षेत्र संघचालक डॉ. बजरंग लाल गुप्त ने दिया। वे कुरुक्षेत्र में मंडल कार्यवाहों के तीन दिन के शिविर में भाग ले रहे थे। उन्होंने कहा कि मेरा मंडल मेरा तीर्थ बने, इस भाव से हमें कार्य में जुटना चाहिए। इसकी शुरुआत हमें अपने गांव से करनी होगी। गांव में शिक्षा, स्वावलंबन व ग्राम विकास के कार्य में तेजी लाते हुए अपने गांव को कुरीतियों और बुराइयों से मुक्त करें।    ल्ल प्रतिनिधि

प्रतियोगी परीक्षाओं में न हो अंग्रेजी की अनिवार्यता
शैक्षणिक संस्थानों में पाठ्यक्रम, पुस्तक रचना और शिक्षार्थियों के व्यक्तित्व विकास व चरित्र निर्माण के मुद्दे को लेकर शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की तीन दिवसीय बैठक गत दिनों लखनऊ  में संम्पन्न हुई। राजधानी के निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में आयोजित बैठक के दौरान दो प्रस्ताव पारित किये गए। पहले प्रस्ताव के तहत प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा गठित सचिवों की समिति जिसमें छठी कक्षा से ऊपर अंग्रेजी की अनिवार्यता की बात कही गई है, का विरोध किया गया। वहीं दूसरे प्रस्ताव के तहत यूजीसी द्वारा प्रस्तावित 38 हजार अंग्रेजी जर्नलों के अलावा भारतीय भाषाओं के जर्नलों को शोध के लिए शामिल करने की मांग की गई।
बैठक को सम्बोधित करते हुए न्यास के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री दीनानाथ बत्रा ने कहा कि यूनेस्को द्वारा तैयार रिपोर्ट पर न्यास की गतिविधियों व कार्यप्रणालियों में भी विचार किया जाएगा। उन्होंने भारतीय विचार के आधार पर शिक्षा नीति को बनाने की मांग की। न्यास के राष्ट्रीय सचिव श्री अतुल भाई कोठारी ने कहा कि विधिक क्षेत्र में न्यायालयों के फैसले भारतीय भाषाओं में होने चाहिए। वहीं चिकित्सा एवं अन्य क्षेत्रों की शिक्षा भी भारतीय भाषा में दी जानी चाहिए। चरित्र निर्माण व व्यक्तित्व विकास के लिए अध्यापकों व छात्रों दोनों को साथ लेकर काम करना होगा, क्योंकि इनके बिना शिक्षा क्षेत्र की उन्नति की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं में अंग्रेजी की अनिवार्यता को खत्म कर भारतीय भाषाओं को अपनाने पर बल दिया और जोर दिया कि अधिकारियों के प्रशिक्षण का पाठ्यक्रम भी राष्ट्र के प्रति अनुराग का भाव उत्पन्न करने वाला होना चाहिए।  -लखनऊ (विसंकें)

'नि:स्वार्थ भाव से सेवा करें स्वयंसेवक'
'संघ का लक्ष्य प्रत्येक नागरिक में चरित्र निर्माण करना है। इसके लिए ही यह वर्ग आयोजित किए जाते हैं। इसमें प्रशिक्षण लेकर स्वयंसेवक समाज में आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार होते हैं। बिना किसी अपेक्षा के नि:स्वार्थ भाव से सेवा करना ही स्वयंसेवकों का ध्येय रहता है। यही कारण है कि समाज में आने वाली आपदाओं के समय संघ के स्वयंसेवक सबसे पहले सेवा को पहुंचते हैं।' पिछले दिनों हिमाचल प्रदेश में संघ शिक्षा वर्ग के समापन अवसर पर हिमरश्मि विद्या मंदिर परिसर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य श्री इन्द्रेश कुमार ने स्वयंसेवकों व नागरिकों को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सेवानिवृत एडीजीपी कश्मीर चंद सड्याल उपस्थित रहे।
श्री कुमार ने कहा कि छुआछूत को जो धर्म मानते हैं, वे सबसे बड़े अधर्म करने वाले हैं। छुआछूत को मिटाने के लिए उन्होंने महात्मा गांधी के प्रयासों का उदाहरण दिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित श्री कश्मीर चंद सड्याल  ने कहा कि उन्हें इस बात की बेहद खुशी है कि माईनस 3 डिग्री तापमान में चले वर्ग में संघ के स्वयंसेवकों के हौंसलों में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं दिखाई दी। यह बड़ी ही गौरवपूर्ण बात है। जहां भारी बर्फबारी के कारण पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं भी प्रभावित हो गयी थीं, वहीं इस परिसर में न तो व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की कोई कमी नजर आयी और न ही किसी प्रकार की किल्लत से किसी को जूझना पड़ा। इसके लिए उन्होंने व्यवस्थापकों का धन्यवाद किया। उन्होंने खुशी जताते हुए कहा कि उन्हें पहली बार ही ऐसा कार्यक्रम देखने को मिला और यहां के दृश्य देखकर मन में खुशी होती है। ऐसे मौसम में भी स्वयंसेवकों का उत्साह देखते ही बनता है। कार्यक्रम में हिमाचल प्रांत संघचालक कर्नल रूपचंद , प्रांत कार्यवाह     श्री किस्मत कुमार, प्रांत प्रचारक श्री संजीवन कुमार, वर्ग कार्यवाह श्री प्रताप सिंह        सहित अनेक गणमान्य लोग कार्यक्रम में उपस्थित रहे।    

-शिमला (विसंकें) 

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