पूर्व में बढ़ता भारत का दबदबा
August 8, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम Archive

पूर्व में बढ़ता भारत का दबदबा

Written byArchiveArchive
Jan 30, 2017, 12:00 am IST
inArchive

दिंनाक: 30 Jan 2017 15:00:36

भारत की 'लुक ईस्ट' नीति के अच्छे नतीजे आने लगे हैं। दक्षिण एशिया में अपनी दारोगाईर चलाने वाले चीन की अब वियतनाम को भी घुड़की देने की हिम्मत नहीं है। वियतनाम के साथ बढ़ती नजदीकियों के चलते भारत को न केवल इस क्षेत्र में एक मजबूत आधार मिला है, बल्कि सदियों पुराने रिश्तों में गर्मजोशी आई है। चीन इस स्थिति से चिंतित है

प्रो. सतीश कुमार

पिछलेे दिनों वियतनाम के नेता निएग्युम  फु त्रोंग चीन गए थे। वहां उनकी मुलाकात चीन के राष्ट्रपति और कम्युनिस्ट पार्टी के जनरल सेक्रेटरी से हुई। चीन ने वियतनाम के साथ विगत के सारे मनमुटाव को भूलने की बात कही। साथ ही यह भी कहा कि दोनों देश हर क्षेत्र में मिलकर काम करने को तैयार हैं। आखिरकार चीन का यह हृदय परिवर्तन हुआ कैसे?
दरअसल नरेन्द्र मोदी के भारत का प्रधानमंत्री बनने के बाद वियतनाम को सबसे महत्वपूर्ण सामरिक देश करार दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी की सोच चीन से बदले की नहीं, बल्कि उसकी भूल को सुधारने की है। चीन भारत के तमाम अनुरोध के बावजूद उसे अपने स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स अभियान से बांधने  की कोशिश करता रहा। भारत चीन को हर कदम पर मदद देने की बात करता और वह उस पर कांटे बोने की कोशिश करता रहा। यह सब देख मोदी ने भारत की रणनीति को बदला। उन्होंने चीन के फार्मूले पर काम करते हुए व्यापारिक समीकरण को अलग रखा और वियतनाम में अपनी स्थिति मजबूत बनाने की कोशिश शुरू कर दी। भारत ने आकाश और ब्रह्मोस मिसाइल वहां पहुंचा दीं।  इनकी मारक क्षमता 25 और 50 किलो मीटर की है। चीन के साथ युद्ध की स्थिति में अब वियतनाम लचर और निराश नहीं होगा। भारत ने वियतनाम को सुखोई भी देने की शुरुआत   कर दी है।  दूसरी तरफ विश्व राजनीतिक समीकरण बदलने लगे हैं। पिछले वर्ष अमेरिकी सरकार ने वियतनाम के साथ नए सिरे से सैन्य और आर्थिक सहयोग की पेशकश की। विशेषकर डोनाल्ड ट्रंप सरकार चीन की दादागीरी को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं दिखती। जो पूर्वी एशिया एक जमाने में अमेरिकी दबाव में था, वह आज पूरी तरह से चीन के कब्जे में है। चीन ने पिछले दो दशकों में यहां खूब दखल दिया और अंतरराष्ट्रीय कानून को ताक पर धर दक्षिण चीन सागर में घुसपैठ की। उसने तकरीबन सारे समुद्री इलाके को अपना बताया। उसने वियतनाम के साथ युद्ध किया, ब्रूनेश, मलेशिया और अन्य देशों को धमकाया। और संयुक्त राष्ट्र के निर्णय को मानने से इनकार कर दिया। इतना होने के बाद जब पूर्वी एशिया के देश इन मुश्किल हालातों में भारत के नजदीक खिसकने लगे तो चीन की नींद टूटी, जो शक्ति के मद में पूरी तरह चूर था। 
आज भारत और अमेरिका  की दोस्ती ने चीन को बैकफुट पर ला दिया है।  इस स्थिति के निर्माण में मोदी की एक्ट ईस्ट नीति काफी कारगर रही है। चीन-वियतनाम का मौजूदा प्रेम कब तक टिक पाएगा, कहा नहीं जा सकता, क्योंकि यह लगाव दिखावटी है। चीन ने 4 दशकों में वियतनाम को हाशिये  पर लाकर खड़ा कर दिया है। 1978 से लेकर 2012 तक दोनों में बीच कई बार गंभीर झड़पें हुई थीं और दोनों के अविश्वास की गहरी खाई पैदा की गई थी। वियतनाम की राष्ट्रीयता का एक व्यापक आयाम चीन विरोधी लहर भी है। अगर पैसे और संसाधनों से चीन वियतनाम के कम्युनिस्ट नेतृत्व को अपने वश में कर भी लेता है तो यह बात वहां की आम जनता को हजम नहीं होगी। चीन की तपिश में हजारों वियतनामियों की जान गई हैं। सवाल यह भी है कि क्या चीन दक्षिण चीन सागर पर अपनी दावेदारी छोड़ देगा तथा वियतनाम और अन्य पूर्वी एशियाई देशों के साथ बंदरबांट कर लेगा? ऐसा चीन के स्वभाव में नहीं है। चीन द्वारा इतिहास की ऐसी व्याख्या की गई है जिससे यह दिखे कि दक्षिण चीन सागर चीन का हिस्सा रहा है। चीन और वियतनाम के बीच तनाव का एक कारण मीकांग नदी विवाद भी है। इस पर चीन ने बांध बनाने शुरू कर दिए हैं। इन बांधों की वजह से मीकांग नदी में पानी का स्तर अचानक नीचे चला गया। इस नदी पर जल प्रपात के जरिये पनबिजली योजनाएं चलती थीं जो वियतनाम की कुल खपत का 10 प्रतिशत हिस्सा था। वह ऊर्जा मिलनी बंद होने लगी है। चीन ने वियतनामी मछुआरों को भी मारना शुरू कर दिया है। इसकी वजह से वियतनाम के कई शहरों में चीन विरोधी धरने-प्रदर्शन होने लगे हैं।

दरअसल भारत और अमेरिका जब-जब नजदीक आते हैं, चीन को पसीना आने लगता है। वियतनाम में भी ऐसा ही कुछ हो रहा है। चीन को डर है कि अमेरिका ने जिस तरीके से वियतनाम के साथ नए आर्थिक और सैनिक संबंधों की पेशकश की है, वह उसके लिए  गंभीर संकेत है। उधर जापान और ऑस्ट्रेलिया भी चीन की दादागीरी से दु:खी थे। इन चार देशों के बूते वियतनाम चीन से खुलकर बात करने की स्थिति में आ गया है।  चीन और वियतनाम के बीच दक्षिण चीन सागर को लेकर तनातनी बहुत बढ़ गई है। दरअसल वियतनाम के पास कुछ ऐसे छोटे-छोटे द्वीप हैं, जिन पर उसका हमेशा से कब्जा रहा है और जहां तेल तथा गैस मिलने की अपार संभावनाएं हैं। संयुक्त राष्ट्र ने भी माना है कि इन छोटे द्वीपों का असली मालिक वियतनाम ही है। उसकी सरकारी तेल कंपनी और भारत की ओएनजीसी के बीच इस तेल को निकालने को लेकर एक समझौता हुआ था, जिसका चीन खुलकर विरोध कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार, भारत ने ओएनजीसी की 'टेक्नोे-कमर्शियल फिजीबिलिटी रिपोर्ट' के आधार पर दक्षिण चीन सागर में 2 से 3 वियतनामी तेल ब्लॉक होना स्वीकार करने का फैसला किया है। हाल ही में वियतनाम ने एक और साल के लिए दक्षिण चीन सागर में दो तेल ब्लॉक पर भारत की लीज का नवीनीकरण किया था। दक्षिण चीन सागर पर गतिरोध के कारण चीन और वियतनाम के बीच  शत्रुतापूर्ण  संबंध हैं। दक्षिण चीन सागर हाइड्रोकार्बन का बड़ा स्रोत है। भारत फिलहाल अपनी 'लुक ईस्ट' नीति की तरफ बढ़ रहा है। इसके तहत व्यापार और सैन्य साझेदारी को काफी महत्व दिया जा रहा है।
भारत-वियतनाम संबंध
भारत पहले से ही वियतनामी नौसेना के जवानों को प्रशिक्षण दे रहा है। उन्हें पनडुब्बियों का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उसने अब तक ऐसे 500 वियतनामी जवानों को प्रशिक्षित किया है। बताया जाता है कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) के द्वारा वियतनाम के हो ची मिन्ह शहर में स्थापित होने वाले केंद्र से जहां वियतनाम दक्षिणी चीन सागर पर निगाह रख सकेगा, वहीं भारत की तकनीक का भी विस्तार होगा। हालांकि, चीन की ओर से अभी इस संदर्भ  में कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि इस कदम से उसे परेशानी हो सकती है, क्योंकि वह काफी पहले से दक्षिण चीन सागर के पूरे क्षेत्र पर अपना हक जताते हुए कई देशों को इस क्षेत्र में दखल देने को लेकर चेतावनियां दे चुका है।
ज्ञातव्य है कि एशिया प्रशांत क्षेत्र में स्थित वियतनाम भारत का एक घनिष्ट मित्र राष्ट्र है। चीन, वियतनाम और भारत का पड़ोसी देश है, इस प्रकार चीनी राष्ट्रवादी आकांक्षाओं से निबटने में जटिलताओं के कारण दोनों देशों के बीच रणनीतिक सोच को लेकर समानता है। चीन की सैन्य शक्ति में उल्लेखनीय वृद्धि के कारण संयुक्त राज्य अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी सेना का पुनर्संतुलन कर रहा है। उल्लेखनीय है कि अमेरिका के आयात का अधिकांश भाग इस क्षेत्र से आता है और निर्यात की बात करें तो अमेरिका के लिए यह दूसरा सबसे बड़ा गंतव्य है। इस क्षेत्र में अमेरिका के लिए जापान और कोरिया गणराज्य में आधार हैं और अमेरिकी युद्धक जहाजों के लिए सिंगापुर, थाईलैंड और फिलीपींस में भी अनुकूल बंदरगाह सुविधाएं उपलब्ध हैं।
भारत और वियतनाम के आपसी संबंधों का आधार सांस्कृतिक है। बौद्ध धर्म इसकी नींव रहा है। मध्य और दक्षिण वियतनाम में स्थित चंपा मंदिरों से दोनों संस्कृतियों के बीच निकटता झलकती है। इसके अलावा द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान गैर-उपनिवेशवाद और गुट निरपेक्षता की साझा अवधारणा के कारण दोनों देशों के नेता एक-दूसरे के करीब आए और दोनों देशों ने मैत्री, सहयोग और समझ के आपसी संबंधों की ठोस नींव रखी। भारत ने वियतनाम को अंतरराष्ट्रीय शक्तियों के खिलाफ उसके राष्ट्रवादी संघर्ष में समर्थन दिया। उसके स्वतंत्रता आंदोलन में वियतनाम का समर्थन करने के लिए बड़ी रैलियां आयोजित की गईं। एकीकरण के लिए वियतनाम के संघर्ष के दौरान कोलकाता की गलियों में 'आमार नाम, तोमार नाम, वियतनाम, वियतनाम'' (मेरा नाम, तुम्हारा नाम, सभी का नाम वियतनाम) एक लोकप्रिय नारा था। इस प्रकार दो सदियों तक दोनों देशों के बीच समान विचार वाले संबंध थे।
चीन-वियतनाम संबंधों की चुनौतियां
राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीन सरकार अधिक मुखर हो गई है। मई 2014 में उसने दक्षिण चीन सागर में एक सचल तेल रिग स्थापित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने आपसी रक्षा संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए रक्षा उपकरणों की खरीद के लिए वियतनाम को दिए 500 मिलियन डॉलर की ऋण सीमा बढ़ा दी है। इस में कोई शक नहीं कि चीन का व्यापर वियतनाम से भारत की तुलना में 4 गुना ज्यादा है। आसियान देशों का व्यापर भी चीन से बहुत अधिक है। भारत अभी भी बहुत पीछे है। इसका कारण यह है कि भारत की 'लुक ईस्ट' नीति बहुत वषार्ें तक कागजों तक सीमित रही। प्रधानमंत्री मोदी की सोच ने 'एक्ट ईस्ट' नीति के तहत वियतनाम को सबसे महत्वपूर्ण देश का दर्जा दिया, क्योंकि वह ऐसे मुहाने पर है जहां से न केवल व्यापार आगे बढ़ेगा, बल्कि चीन की चाल को भी रोक जा सकता है। भारत की नई सोच ने चीन को विवश कर दिया है। उधर कई  लोग ऐसा मानते हैं कि भारत धीरे-धीरे अमेरिकी चंगुल में फंसता जा रहा है, लेकिन इस तर्क में कोई जान नहीं है। भारत की विदेश नीति की नयी आवाज उसके अपने दम पर है। 'मेड इन इंडिया' की सोच भारत को हथियारांे के आयातक देश से निर्यातक देश बनाने की है। वियतनाम और दक्षिण एशिया के देश भारत से हथियार खरीदने के इच्छुक हैं। अगर भारत अपनी मुहिम में निरंतर आगे बढ़ता है तो उसकी स्थिति काफी मजबूत होगी। ऐसे हालात में अमेरिका भारत के साथ कैसी भी जोर-जबरदस्ती नहीं कर सकता। 1950 से लेकर मोदी का कार्यकाल शुरू होने से पहले तक भारत हर मुकाम पर चीन को मदद देकर देख चुका है पर उसका कोई सार्थक हल नहीं निकला। प्रधानमंत्री मोदी ने शुरू से ही चीन के आगे निकलने की कोशिश की है। उन्होंने हिमालय के क्षेत्र में नेपाल, भूटान से बेहतर संबंध बनाकर और धुर सागर में वियतनाम, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड तक अपनी बिसात बिछाकर, भारत को एक मजबूत स्थिति में खड़ा करने की कोशिश की है। दरअसल दक्षिण पूर्व एशिया के देश भारत से काफी उम्मीद लगाए हुए हैं। अगर भारत को विश्व में एक मजबूत देश की पहचान बनानी है तो उसे दक्षिण एशिया में अपनी कारोबारी पैठ बनानी होगी बता दें कि 50 प्रतिशत से ज्यादा भारतीय कारोबार इसी समुद्री रास्ते से होता है।
निष्कर्ष
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि वियतनाम में भारत के अतिक्रमण से चीन चुप बैठने वाला नहीं है। अगर उसकी इस भूमिका को गंभीरता से भी लिया जाए तो अधिकतम क्या हो सकता है? चीन पहले से ही भारत विरोधी गतिविधियों को हवा देता आ रहा है। भारत के लाख कहने पर भी वह  पाकिस्तान के पक्ष में खड़ा होता रहा है। आतंकी मसूद अजहर के मुद्दे पर उसने पाकिस्तान की पीठ थपथपाई और सर्जिकल स्ट्राइक को लेेकर भारत की आलोचना से बाज नहीं आया। चीन भारत के विरोध में जो कुछ कर सकता था, वह कर चुका है। अब उसके पास अधिक कुछ नहीं है। आर्थिक व्यवस्था को ध्वस्त करना उसके हित में भी नहीं है। भारत भी नए समीकरण के तहत चीन के साथ व्यापारिक समीकरणों को छेड़ना नहीं चाहता। प्रधानमंत्री मोदी इस बात को अच्छी तरह समझ चुके हैं कि चीन को शांत किये बिना बात नहीं बनेगी। भारत इसी रणनीति के तहत वियतनाम के साथ काम कर रहा है।
 इस मुहिम में भारत के साथ जापान और ऑस्ट्रेलिया भी जुड़ गए हैं। यह भी सच है कि वियतनाम की राष्ट्रीयता चीन विरोध पर टिकी हुई है। कम्युनिस्ट पार्टी के नेता जनता की बातों को अनसुना नहीं कर सकते। 4 दशकों पुरानी दुश्मनी चुटकी बजाते गायब नहीं हो जाएगी, इसलिए आने वाला समय चीन के लिए मुश्किलों भरा होगा, विशेषकर दक्षिण एशिया महासागर में जहां वह अकेला राग अलापता रहा है। 
(लेखक केंद्रीय विश्वविद्यालय, महेंद्रगढ़, हरियाणा में राजनीति विज्ञान विभाग में प्रोफेसर हैं) 

Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

Prayagraj Crime News Student Assault Attempt Wahid Ali Arrested Police Action Panchjanya

Prayagraj Crime News: ट्यूशन से लौट रही छात्रा से लिफ्ट के बहाने दुष्कर्म का प्रयास, आरोपी वाहिद अली गिरफ्तार

‘भारतीय ज्ञान का श्रुति-संवाद’ : पारंपरिक ज्ञान बना आधुनिक शिक्षा का हिस्सा

Jharkhand के छात्रों ने क्यों कहा- हमसे नेहा बोरा के बारे में बात मत करिए?

Shantikunj Haridwar Yuva Jagran Shivir Shail Didi Shafaali Pandya Panchjanya

शांतिकुंज में युवा जागरण शिविर: शैलदीदी ने दिया महामंत्र- “व्यसन छोड़ सृजन में लगें युवा”

CM Dhami Mukhyamantri Yuva Vidyarthi Manthan Uttarakhand Students Dialogue Panchjanya

“कैसा हो अपना उत्तराखंड?”: 3 लाख छात्रों से सीधा संवाद करेंगे CM धामी, 150 श्रेष्ठ सुझावों पर बनेगी नई नीति!

Jharkhand Protest: Panchjanya के सिर्फ 5 सवाल… और AISA नेता हो गए कन्फ्यूज!

Load More

ताज़ा समाचार

Prayagraj Crime News Student Assault Attempt Wahid Ali Arrested Police Action Panchjanya

Prayagraj Crime News: ट्यूशन से लौट रही छात्रा से लिफ्ट के बहाने दुष्कर्म का प्रयास, आरोपी वाहिद अली गिरफ्तार

‘भारतीय ज्ञान का श्रुति-संवाद’ : पारंपरिक ज्ञान बना आधुनिक शिक्षा का हिस्सा

Jharkhand के छात्रों ने क्यों कहा- हमसे नेहा बोरा के बारे में बात मत करिए?

Shantikunj Haridwar Yuva Jagran Shivir Shail Didi Shafaali Pandya Panchjanya

शांतिकुंज में युवा जागरण शिविर: शैलदीदी ने दिया महामंत्र- “व्यसन छोड़ सृजन में लगें युवा”

CM Dhami Mukhyamantri Yuva Vidyarthi Manthan Uttarakhand Students Dialogue Panchjanya

“कैसा हो अपना उत्तराखंड?”: 3 लाख छात्रों से सीधा संवाद करेंगे CM धामी, 150 श्रेष्ठ सुझावों पर बनेगी नई नीति!

Jharkhand Protest: Panchjanya के सिर्फ 5 सवाल… और AISA नेता हो गए कन्फ्यूज!

रिटायरमेंट के बाद 36 बीघा में प्राकृतिक खेती, चंद्रमोहन जांगिड़ ने किसानों के सामने पेश की मिसाल

Gold Silver Price Today

Gold Silver Rate Today: सोना हुआ महंगा, चांदी के दाम गिरे; आज की ताज़ा कीमतें जानें

9 अगस्त का पंचांग

9 अगस्त पंचांग: श्रावण कृष्ण एकादशी कल, जानें तिथि, नक्षत्र, योग और ग्रहों की स्थिति

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत मुंबई में ‘इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस’ के कार्यक्रम में सवालों के जवाब देते हुए।

युवा संवाद-मुंबई : ‘पुरानी पीढ़ी की अपेक्षा नई पीढ़ी अधिक निष्ठावान’

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies