उत्तर प्रदेश/चुनाव चर्चा- क्या हुआ तेरा वादा?
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उत्तर प्रदेश/चुनाव चर्चा- क्या हुआ तेरा वादा?

Written byArchiveArchive
Dec 26, 2016, 12:00 am IST
in Archive

दिंनाक: 26 Dec 2016 17:51:51

उत्तर प्रदेश में जब समाजवादी पार्टी की सरकार बनी तो कई बड़े-बड़े वादे किये गए थे। इसमंे एक वादा था प्रदेश से बिजली की किल्लत दूर करने का और प्रदेश को निर्बाध विद्युत आपूर्ति कराने का। मगर  सरकार बनने के बाद जैसे ही गर्मी आई प्रदेश की जनता को बिजली की भीषण समस्या से सामना करना पड़ा। उस समय सपा सरकार ने तर्क दिया था कि पिछली सरकार ने पर्याप्त बिजली नहीं खरीदी, जिसकी वजह से दिक्कत हुई। लेकिन आने वाले दिनों में यह समस्या दूर कर ली जाएगी। सपा सरकार के 4 वर्ष यही कहते हुए बीत गए और जनता वादों के पालने में झूलती रही। लेकिन अब जब चुनाव सिर पर हैं और सत्ता जाने के करीब है तो प्रदेश सरकार ने अपने इस वादे को पूरा करने का ऐलान तो कर दिया मगर बड़ी ही चालाकी से। इस समय राज्य के देहात क्षेत्रों में बिजली पहले से ठीक-ठाक आ रही है। मुलायम-अखिलेश चुनावी रैलियों में इस घोषणा का गुणगान करते नहीं थक रहे। वह इस समय का हाल बता रहे हैं लेकिन 4 साल में राज्य में बिजली की व्यवस्था कैसी रही, उस पर चुप्पी साधे हुए हैं। असल में इस समय सर्दी का मौसम है। तो ऐसे मौसम में बिजली की मांग वैसे भी आधी से भी कम रह जाती है।
चुनावी रंग में सराबोर प्रदेश में मुख्यमंत्री अखिलेेश यादव की जगह-जगह होर्डिंग लगाए गए हैं, जिन पर लिखा गया है-पूरे होते वादे। मगर हास्यास्पद यह है कि प्रदेश में बिजली जैसी मूलभूत आवश्यकता भी इन पांच वषोंर् में सपा से पूरी नहीं हो पाई। वर्ष 2012 में जब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने प्रदेश की जनता को कई ख्वाब दिखाए थे। उसमें एक ख्वाब बिजली का भी था। धीरे- धीरे दिन बीतते रहे। जब वर्ष 2014 में बिजली के लिए काफी हाहाकार मचा तब प्रदेश सरकार के बिजली विभाग के अभियंताओं ने एक नया तरीका निकाला। प्रदेश के पास बिजली की कमी तो चल ही रही थी, हर तरफ हाहाकार मचा  हुआ था। ऐसे ने जनता शोर ना मचाए, इसके लिए  बिजली चोरी के खिलाफ तेजी से अभियान चलाया गया और इसी कड़ी में पुराने मीटर बदलने का अभियान भी चला। बिजली विभाग के अधिकारियों का यह फार्मूला काफी कामयाब रहा। अधिकतर घरोें में कोई नई कमी निकाल कर उस उपभोक्ता के ऊपर राजस्व की  देनदारी निकाल दी गई। अब वह उपभोक्ता बिजली की आपूर्ति की बात भूल कर बिजली घर पर बिल संशोधन कराने के लिए चक्कर लगाने लगा। गर्मी का मौसम बीत जाने के बाद बिजली की मांग थोड़ी कम हो गई, मगर बिजली विभाग के अधिकारियों  ने उसके बाद भी इस अभियान को जारी रखा। इस इंतजार में कि  बिजली के दिन सुधरेंगे। साढ़े चार वर्ष से अधिक बीत गए, उसके बाद जब चुनाव सिर पर आ गए तब मुख्यमंत्री अखिलेेश यादव ने घोषणा की कि अक्तूबर महीने के बाद से शहरों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति की जाएगी और देहात  क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली मुहैया कराई जाएगी।
असल में बिजली का उत्पादन अपनी जगह है पर प्रदेश में तमाम जगहों पर विद्युत् आपूर्ति के उपकरण भी वषोंर् पुराने हैं। उन पुराने ट्रांसफार्मरांे और उपकरणों के जरिये यह दावा करना कि प्रदेश में चौबीस घंटे बिजली आएगी,  मात्र कल्पना है। जानकारों का मानना है कि प्रदेश सरकार बिजली चोरी का रोना तो रोती रहती है मगर विद्युत उपलब्धता और उसके उपकरणों में सुधार करने का कोई प्रभावी उपाय नहीं करती। प्रदेश में कुछ लोग दबी जुबान से यह भी सवाल उठाते हैं कि बिजली चोरी अगर कहीं पर हो रही है तो सरकार उन पर कार्रवाई क्यों नहीं करती।
उत्तर प्रदेश ही मात्र एक ऐसा प्रदेश है ज्यादा पर अन्य राज्यों की अपेक्षा बिजली सबसे जादा महंगी है। प्रदेश सरकार भले ही यह दावा करे कि शहरों में 24 घंटे और देहातांे में 18 घंटे बिजली दी जा रही है, मगर यह सचाई से परे है। पूरे पांच साल के आंकड़े सपा सरकार की पोल खोलने के लिए काफी हैं। पाञ्चजन्य ने जब इस संबंध में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में रह रहे लोगों से बात की तो उनका कहना था कि पांच साल में सपा सरकार ने सिर्फ वादों के सहारे ही काम चलाया है। जमीनी हकीकत पर कुछ नहीं बदला। हमीरपुर जिले के दिनेश सिंह बताते हैं,''विकास की दृष्टि से एक पिछड़ा हुआ जिला है। यहां पर 18 घंटे बिजली तो एक स्वप्न ही है। अगर एक बार देहात क्षेत्र में कोई खराबी हो गई तो उसे ठीक होने में कई-कई दिन लग जाते हैं।''
 इलाहाबाद के ग्रामीण क्षेत्र के निवासी एस. बी.गुप्ता कहते हैं,''बिजली विभाग के अधिकारियों का आदेश है कि ट्रांसफार्मर जलने की स्थिति में तुरंत बदला जाए। मगर जब भी ट्रांसफार्मर जल जाता है, स्थानीय लोग पहले चंदा लगा कर देते हैं तब जाकर कहीं ट्रांसफार्मर बदला जाता है। ये सपा सरकार की हकीकत है।'' ऐसे ही मुकुंद तिवारी अखिलेश के वादे से बेहद खफा हैं और कहते हैं कि उन्होंने जनता के साथ नाइंसाफी की है। वे कहते हैं, ''जाड़े के समय जब बिजली की  मांग कम हो गई तब सपा सकरार ने लोगों को बेवकूफ बनाने  के लिए घोषणा कर दी अब शहरांे और देहातों में पर्याप्त बिजली दी जाएगी। यह घोषणा मुख्यमंत्री को गर्मी के मौसम में करनी चाहिए थी। लेकिन हास्यास्पद यह है कि जाड़े के मौसम में भी 24 घंटे आपूर्ति नहीं हो पा रही है।''
गौरतलब है कि पिछले मार्च महीने में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल विद्युत उत्पादन  के संबंध में इलाहाबाद आए थे। यहां उन्होंने कहा था कि आजादी के 68 वषोंर् बाद भी  इस देश के लोग बिजली जैसी जरूरी चीज से वंचित हंै। यह बहुत  ही दुर्भाग्य का  विषय है। उत्तर प्रदेश में जब बिजली जाती है तो कब आएगी यह पता नहीं है। इलाहाबाद में बिजली बन तो रही है मगर इलाहाबाद  को ही कटौती की मार सबसे ज्यादा झेलनी पड़ रही है। राज्य सरकार कुछ खास शहरों को ही लगातार बिजली दे रही है। उन्होंने यह भी कहा कि  बिजली का शेड्यूल बनाना राज्य सरकार का काम है, मगर अब केंद्र सरकार एक ऐसा सिस्टम बनाने जा रही है जिससे  प्रदेश की जनता को यह पता लग सकेगा कि प्रदेश सरकार किस जिले को कितनी बिजली दे     रही है। श्री गोयल ने कहा कि भाजपा की सरकार  बनने से पहले दस वषांर्े तक केंद्र में कांग्रेस की सरकार रही और उस दौरान केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश में 87 हजार गांव तक बिजली पहंुचाने के काम स्वीकृत किए थे जिसमें 40 लाख लोगों को बिजली का लाभ पहुंचना था।  इसके लिए केंद्र सरकार ने 11 हजार 715 करोड़ रुपया दिए थे मगर अफसोस की बात है  कि प्रदेश की सरकारों ने उन दस वषांर्े में केवल 17 फीसद ही काम पूरा किया जिसकी वजह से मात्र 15 हजार गांव ही रोशन हो पाए। लेकिन भाजपा की सरकार बनने  के बाद  हमारी योजना है  कि  2022 तक भारत के हरेक गांव, हरेक घर में बिजली  पहुंचे। इसके लिए प्रदेश को हमने 4,721 करोड़ रुपए दिए है। भारत में 18,412 गांव ऐसे है जो जंगली इलाकांे में है वहां पर कभी भी बिजली  नहीं पहुंची है।  हमारा लक्ष्य है कि  इन सभी गांवों में भी बिजली पहुंचे और अब तक करीब 40  फीसद काम हो चुका है।
पाञ्चजन्य ने इस मसले पर उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के पूर्वांचल के प्रबंध निदेशक ए.के.सिंह से बात की तो उनका कहना था,''सरकार ने नवंबर महीने से बिजली की पर्याप्त व्यवस्था कर ली है। हम अपने लक्ष्य के अनुरूप शहरांे में 24 और देहातांे में 18 घंटे बिजली दे रहे हैं।''
सपा सरकार के पांच साल के आंकड़े उसकी विफलता बताने के लिए काफी हैं। अखिलेश वादों को पूरा करने का लाख      दावा करें पर जनता उनकी हकीकत समझ चुकी है।

इनका क्या कसूर
उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले में अप्रैल माह में आंख का ऑपरेशन करते समय बिजली चली गयी। ऑपरेशन कक्ष में अन्धेरा हो गया। उसके बाद सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों ने टार्च जला कर ऑपरेशन कर डाला। जब यह बात उनके परिजनों और खुद मरीज को पता चली तो उन्होंने इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से की और सरकारी डॉक्टरों पर आरोप  लगाया। मरीजों का कहना था कि डॉक्टरों ने जिला अस्पताल में मोतियाबिंद के आधा दर्जन ऑपरेशन किए थे। ऑपरेशन के समय बिजली गुल हुई तो डॉक्टरों ने आंखों का ऑपरेशन टार्च की रोशनी में ही कर दिया। अस्पताल के डॉक्टर अपने इस कारनामे को छिपाने के लिए ऑपरेशन के तुरंत बाद ही सभी मरीजों को घर जाने का दबाव बनाने लगे।
जब मामला काफी गंभीर हुआ तो उस समय के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यू. बी. सिंह ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है, ़इस प्रकरण की जांच कराई जायेगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यू बी सिंह ने इस संबंध में जांच कमेटी भी गठित की थी। -सुनील राय

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