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पत्रकार स्वयं से संवाद करता है, तभी वह आस-पास घट रही घटनाओं को समाचार का रूप दे पाता है। घटनाओं को शब्द का रूप देने के लिए पत्रकार मन के अंदर संवेदना होना अनिवार्य है। आधुनिक बाजारवाद के दौर में भी पत्रकारिता एक पवित्र पेशे के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है।
पिछले दिनों पटना में विश्व संवाद केंद्र के 'स्नेह मिलन' कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने ये विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख श्री स्वांत रंजन उपस्थित थे। इस अवसर पर विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार रखे और कहा कि उपभोक्तावाद और बाजारवाद के दबाव में पत्रकारिता अपने कर्तव्य से विमुख हो रही है। इस पतन को रोकने के लिए एवं पत्रकारिता को उसकी आत्मा से जोड़े रखने के लिए यह आवश्यक है कि नई पीढ़ी को सरोकार आधारित पत्रकारिता के कौशल से परिचित कराया जाए। स्नेह मिलन कार्यक्रम के दौरान उपस्थित पूववर्ती छात्र-छात्राओं ने संस्था से जुड़े अपने अनुभव साझा किए और भविष्य में होने वाले कार्यक्रमों के संबंध में सुझाव दिए। कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार एवं हिन्दुस्थान समाचार की राज्य प्रमुख रजनी शंकर, स्वत्व के संपादक श्री कृष्णकांत ओझा एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र कार्यवाह डॉ़ मोहन सिंह सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।
-पटना (विसंकें)
'माता-पिता की सेवा से बड़ी कोई सेवा नहीं'
परिवार एवं मानवता की रक्षा के लिए माता-पिता का आदर-सम्मान और पूजन जरूरी है। लेकिन आज के आधुनिक युग में इन मान्यताओं और परंपराओं पर कुठाराघात हो रहा है। प्राचीन परंपरा की रक्षा के लिए पिछले दिनों आइएमसीटी फाउंडेशन की ओर से भुवनेश्वर के स्थानीय बरमुंडा मैदान में हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा मेला आयोजित किया गया, जिसमें माता-पिता पूजन उत्सव कार्यक्रम भी शामिल था। समारोह में 800 परिवारों ने अपने माता-पिता की आरती उतारी। इस अवसर पर मारवाड़ी समाज के अध्यक्ष महेंद्र गुप्ता ने अतिथि के रूप में भाग लिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ी को संस्कारवान बनाने में सहायक होंगे। – भुवनेश्वर (विसंकें)











