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गत दिनों उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय के संवाद भवन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तृतीय सरसंघचालक बालासाहब देवरस जी के 100वें तथा डॉ़ भीमराव आंबेडकर जी के 125वें जन्म वर्ष के शुभ अवसर पर 'एकात्म मानव चिंतन एवं सामाजिक समरसता' विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसके साथ ही 'पूर्वा संवाद' विशेषांक व ध्येयमार्ग का लोकार्पण हुआ। लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एसपी सिंह गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। श्री सिंह ने इस अवसर पर कहा कि सामाजिक समरसता एक क्रांतिकारी विचार है। किसी भी देश की एकता के लिए यह आवश्यक शर्त है। उन्होंने कहा कि सबका शरीर हाड़-मांस से ही बना है। लेकिन भाव, ज्ञान और कर्म से उसकी पहचान बनती है। इन्हीं गुणों की प्रमुखता से कुछ लोग महान बन जाते हैं। आप भी इन गुणों के जरिए अपनी अलग पहचान बना सकते हैं। संघ के तमाम स्वयंसेवक ऐसा कर रहे हैं। संगोष्ठी के अध्यक्ष गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो़ अशोक कुमार ने कहा कि समरसता समग्र तरक्की की अनिवार्य शर्त है। इसके लिए शिक्षा और प्रेरणा को हथियार बनाएं। ऐसी शिक्षा दें, जिससे लोग अच्छे इंसान बन सकें। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में रा.स्व.संघ पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचारक श्री शिवकुमार, प्रान्त संघचालक श्री विद्याभूषण पांडेय और भाग संघचालक डॉ़ महेन्द्र उपस्थित रहे।
अभाविप के नए अध्यक्ष व महासचिव
पिछले दिनों डॉ. नागेश ठाकुर एवं विनय बिद्रे को 2016-17 के लिए अभाविप का क्रमश: अध्यक्ष एवं महासचिव चुना गया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं महासचिव के रूप में दिसंबर में इंदौर में होने वाले परिषद के 62वें राष्ट्रीय सम्मेलन में वे सभी जिम्मेदारियां ग्रहण करेंगे। -प्रतिनिधि
उन्माद से परेशान भीलवाड़ा
राजस्थान का भीलवाड़ा लंबे समय से उपद्रवियों से परेशान है। इससे दुखी होकर हिंदू समाज को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा। नागरिक सुरक्षा मंच भीलवाड़ा के बैनर तले हुए मौन प्रदर्शन में संदिग्ध लोगों को बचाने और संरक्षण देने के आरोप प्रशासन पर लगाए गए। जिलाधिकारी कार्यालय में हजारों की संख्या में महिलाएं व बुजुर्ग धरने पर पहुंचे। धरने को विश्व हिंदू परिषद के प्रांत कार्यकारिणी सदस्य सुरेश गोयल ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज किसी के खिलाफ नहीं है, मगर एक समुदाय के असामाजिक तत्वों की आपत्तिजनक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। शहर के शांत वातावरण को बीते एक दशक से बिगाड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जिस पर तुरंत रोक लगाने की आवश्यकता है।
– भीलवाड़ा (विसंकें)











