|
जन्मस्थली श्री पटना साहिब
विश्व की बलिदानी परंपरा में अद्वितीय स्थान रखने वाले गुरु गोबिंद सिंह जी का समूचा जीवन साधना, त्याग व शौर्य की अनुपम मिसाल है। उनका बलिदान और आध्यात्मिक दर्शन भारतीय इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है। छह-सात साल की छोटी-सी आयुु में हजारों कश्मीरी पंडितों की रक्षा के लिए खुद अनाथ होना स्वीकार कर पिता को आत्मबलिदान के लिए प्रेरित करने वाले इस महान बालक ने अपने युग के आतंकवादी तत्वों के विनाश और धर्म और न्याय की प्रतिष्ठा के लिए शस्त्र उठाया और एक नए पंथ का सृजन कर सिख समाज को सैनिक परिवेश में ढाला। भारतीय धर्म, संस्कृति और राष्ट्रहित के लिए अपना समूचा वंश न्योछावर कर देने वाले सिख पंथ के अंतिम गुरु की ख्याति अप्रतिम योद्धा, अनुपम संगठनकर्ता और सैन्य नीतिकार के साथ महान् आध्यात्मिक चिंतक, मौलिक विचारक व उत्कृष्ट लेखक की भी है। वे बहुभाषाविद् थे। उन्होंने सिख कानून को सूत्रबद्ध किया था। गुरु गोबिंद सिंह को ही 'दसम ग्रंथ'(दसवां खंड) लिखकर 'गुरु ग्रंथ साहिब' को 'गुरु' रूप में स्थापित करने का श्रेय भी जाता है। इस महापुरुष के प्राकट्योत्सव पर उनके जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं और उपलब्धियों पर नजर डालता पूनम नेगी का आलेख
बिहार की राजधानी पटना शहर में स्थापित अकाल तख्त श्री पटना साहिब गुरु गोबिंद सिंह जी की पावन जन्मस्थली के रूप में समूची दुनिया में विख्यात है। आज से 350 साल पहले 1666 ई़ में पौष सुदी की सातवीं तिथि को यहीं पर नवें गुरु तेगबहादुर जी के पुत्र के रूप में उनका जन्म हुआ था। देश के पांच शीर्ष अकाल तख्तों में शामिल इस गुरुद्वारे में गोबिंद सिंह जी द्वारा हस्ताक्षर की हुई गुरु ग्रंथ साहिब, उनके बालपन का पालना (झूला), बचपन की तलवार, लोहे के तीर, चकरी, कंघा और पादुका आदि वस्तुएं रखी हैं। इस विख्यात तीर्थ की एक अन्य विशिष्टता यह है कि इस गुरुद्वारे की दीवारें पटना के नगर देवी पाटन के सुप्रसिद्ध मंदिर के साथ, काली मंदिर, दिगंबर जैन मंदिर तथा शाइस्ता खां और मीर जाफर की मस्जिद से सटी हुई हैं। इस दृष्टि से अकाल तख्त श्री पटना साहिब को सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल कहा जाए तो कोई अत्युक्ति नहीं होगी। लगभग 108 फुट ऊंचा यह भव्य सतमंजिला गुरुद्वारा सिख मतावलंबियों की आस्था का प्रमुख केन्द्र है। इस पवित्र तीर्थ पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में हर मत-पंथ के अनुयायी जुटते हैं। गुरुओं के प्रकाश पर्व और शहीदी दिवस के साथ बैसाखी पर यहां की रौनक देखते ही बनती है। इन दिनों पटना शहर में खालसा के संस्थापक गुरु गोबिंद सिंह के 350वें जयंती समारोह की तैयारियां खूब जोर-शोर से चल रही हैं।











