अभिमत- मीडिया संघ के बारे में गलत फहमियां पाले है
June 18, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम Archive

अभिमत- मीडिया संघ के बारे में गलत फहमियां पाले है

Written byArchiveArchive
Dec 5, 2016, 12:00 am IST
in Archive

दिंनाक: 05 Dec 2016 16:29:08

बात 1992 की गर्मियों की है, जब मैं 9 वर्ष की थी और अपने पैतृक गांव में छुट्टियां बिता रही थी। अक्सर शाम के समय मेरे पिता मुझे निकटवर्ती अयोध्या शहर ले जाते। ऐसे ही एक रोज मेरी भेंट एक वृद्ध पुरुष से हुई जिनका नाम परशुराम था। वह सरयु नदी के किनारे चौकी पर बैठे थे- सफेद दाढ़ी, सफेद धोती, शरीर पर एक सूती कपड़ा लपेटे उनकी मुखमुद्रा बहुत सौम्य थी।
उनसे हुई बातचाीत मुझे ठीक से याद नहीं लेकिन उसे याद करने की मैं लगातार कोशिश करती रही हूं। नदी के उस पार लाडस्पीकर पर कारसेवा का संदेश निरंतर गूंज रहा था। मैंने उनसे उसका मतलब पूछा। उनका जवाब मेरे लिए अस्पष्ट सा था।
सात माह बाद उन्हीं लोगों ने ढांचा गिरा दिया था। वह ढांचा जहां अयोध्या के इष्ट रामलला का निवास था और इसके साथ भारतीय इतिहास की धारा में एक व्यापक मोड़ आया था। इसके एक माह बाद ही परशुराम जी का स्वर्गवास हो गया। वह पहले संघ के स्वंयसेवक थे जिनसे मेरी मुलाकात हुई थी यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वंयसेवक जिसकी संबद्ध संस्थाएं विश्व हिंदू परिषद एवं भाजपा राम मंदिर अभियान का नेतृत्व कर रही थीं।
1992 की उन सर्दियों में ढांचा ढहाए जाने के अलावा कई अन्य घटनाएं भी हुई थीं। मंदिरों वाले जिस छोटे से कस्बे में मैं पली-बढ़ी थी, वहां बौद्धिकों के कई विरोधी धड़े बन गए थे। गुलाबी सर्दियों, साधुओं, संन्यासियों, किस्से-कहानियों और बेसन के लड्डुओं वाला अयोध्या भारतवर्ष के संबंध में विरोधी विचारों का अखाड़ा बन गया था।
2014 के चुनावों के दौरान, जब विभाजन की राजनीतिक पहले से कहीं ज्यादा जोर पकड़ चुकी थी, उस दौरान मैं अक्सर उस प्रसन्नचित हुए वृद्ध व्यक्ति को याद करती, अपने पैतृक शहर अयोध्या और उस गुजरे जमाने को याद करती जब किसी व्यक्ति का अस्तित्व और उसकी सोच किसी वैचारिक धड़े या राजनीतिक खांचों में नहीं बंटी थी।
अपने अस्तित्व के भीतर इन्हीं कुछ विचारों के साथ मैं अपने आरामदेह वाम विचारों से बाहर आई और संघ के केंद्र नागपुर पहुंची। हिंदू, एक उदारवादी और एक राष्ट्रवादी के चल रहे द्वंद्व से उपजे कष्ट के कारण मैं वाम विभाजक रेखा को पार करना चाहती थी।  इससे पहले कि मैं उस रेखा को पार करने में असमर्थ हो जाती, उन लाखों महिलाओं और पुरुषों से मिलना चाहती थी जो किसी न किसी रूप से संघ से जुड़े हुए थे। इसके पीछे विचार केवल उस प्रतिबद्ध नेतृत्व और सांस्कृतिक पहचान, धर्म एवं राष्ट्रीयता भाव के उस रूप को समझने का था जिसे मैं अभी तक नहीं जान पाई थी। इसके अलावा, उन संदर्भों को भी समझना था जिनके आधार पर संगठन व्यापक सामाजिक कार्य करता है। पिछले आम चुनावों के दौरान शुरू हुई यह यात्रा उसके चकित कर देने वाले नतीजों के दो वर्ष बाद तक जारी रही। इस यात्रा के दौरान मैंने संघ स्वयंसेवकों,स्थानीय कार्यकर्ताओं और बौद्धिक धड़े को सुना और उनके साथ विमर्श किया। नए व पुराने, यह सभी कार्यकर्ता, देशभर में फैले थे और विभिन्न पृष्ठभूमियों से संबद्ध थे। मुझे संघ के बारे में उसके कार्यकर्ताओं द्वारा लिखित वह सामग्री भी पढ़ने को मिली, जिस तक पहुंच असंभव ही रहती है। स्थायी निष्कर्ष यही था कि देश के मुख्यधारा का मीडिया आज तक संघ के बारे में किसी न किसी रूप में गलतफहमियां ही पाले हुए हैं।
इसका अर्थ यह भी नहीं कि अपने सामने आए या सुने गए प्रत्येक विचार के साथ मैं एकमत रही, लेकिन उसको समझने में मुझे कभी कोई झिझक महसूस नहीं हुई। और यह भी सत्य है कि संघ के लक्ष्यों और मूल्यों से जुड़े विरोधाभासों, परशुराम जी के शाश्वत, वर्तमान एवं असाधारण समय के धर्म को समझने में बिताया गया समय मेरे लिए खासा मूल्यवान रहा। कुछ इसी तरह के पूर्वाग्रह संघ के भीतर मुख्यधारा 'वाम-उदारवादी' धड़े के बारे में विद्यमान हैं। परंतु बने-बनाए पुराने धड़े धराशायी भी हो रहे हैं और विमर्श व परिचर्चा की नई जमीन तैयार हो रही है। अपनी लेखनी के माध्यम से मैं कुछ पाठकों को इस नई जमीन पर आमंत्रित करना चाहती हूं। मैं चाहूंगी कि अपनी वैचारिक भिन्नताओं के बावजूद वह विचार-विनिमय की नई शुरुआत करें।
संघ द्वारा खुले दिल से अपनाए जाने के कारण ही मैं अपने इस कार्य को अंजाम दे सकी। अपनी यात्रा के दौरान मेरी मुलाकात ऐसी स्त्रियों व पुरुषों से हुई जिनके अंदर मैंने परशुराम जी की झलक देखी। सोशल मीडिया पर दिखने वाली वैमनस्यपूर्ण असहिष्णुता वहां सिरे से नदारद थी। समाज, इतिहास, नीति एवं राष्ट्र की वैकल्पिक प्रक्रिया को समझने के इस प्रयास में बनावटी ढांचे ढह गए और आपसी लेन-देन के अनेक नए मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद बंधी है।
अपने बचपन के अयोध्या को मैं वापस नहीं ला सकती, लेकिन उन मूल विचारों को खोजने का प्रयास जरूर कर सकती हूं जिनसे मेरी सोच-समझ निर्मित हुई थी। ताकि राष्ट्रीय गरिमा और न्याय से जुड़े विरोधी विचारों के बीच संवाद स्थापित हो सके। विभिन्न विभाजक रेखाओं से संबंधित पूर्वाग्रहों, विशेषाधिकारों और निश्चितताओं पर सवाल उठाए जा सकें, जिससे गहरी तार्किक सहभागिता अस्तित्व में आए। इसके बाद ही मैं समझूंगी कि मेरी यात्रा पूर्ण हुई। यूं भी इस दुनिया में यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा करने से बड़ा सुख और कोई नहीं होता।

                         (लेखक  वरिष्ठ पत्रकार हैं)

ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

बनाएं स्वामी विवेकानंद के सपनों का भारत

हरिद्वार में संत समाज की ऐतिहासिक बैठक

राष्ट्र, धर्म, संस्कृति एवं मानवता के कल्याण के लिए संत समाज की ऐतिहासिक बैठक

यूपी एटीएस ने शहजाद भट्टी गैंग के दो गुर्गों को दबोचा

आतंकी शहजाद भट्टी के नेटवर्क से जुड़े मोहम्मद उमर और फैजान गिरफ्तार

जामिया विश्वविद्यालय का पीड़ित कर्मचारी पहुंचा NCST, मारपीट, पनिशमेंट पोस्टिंग और काफिर बुलाने का लगाया आरोप

महाराणा प्रताप और इस्लामिक आक्रांता अकबर

हल्दीघाटी के मैदान में असल में हुआ क्या था, आखिर हल्दीघाटी किसके नाम रही? जानें सच

बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़की थी (फाइल फोटो)

बांग्लादेश में फिर से हिंसा की तैयारी? जुलाई चार्टर को लेकर जमात ने दी सरकार को धमकी

Load More

ताज़ा समाचार

बनाएं स्वामी विवेकानंद के सपनों का भारत

हरिद्वार में संत समाज की ऐतिहासिक बैठक

राष्ट्र, धर्म, संस्कृति एवं मानवता के कल्याण के लिए संत समाज की ऐतिहासिक बैठक

यूपी एटीएस ने शहजाद भट्टी गैंग के दो गुर्गों को दबोचा

आतंकी शहजाद भट्टी के नेटवर्क से जुड़े मोहम्मद उमर और फैजान गिरफ्तार

जामिया विश्वविद्यालय का पीड़ित कर्मचारी पहुंचा NCST, मारपीट, पनिशमेंट पोस्टिंग और काफिर बुलाने का लगाया आरोप

महाराणा प्रताप और इस्लामिक आक्रांता अकबर

हल्दीघाटी के मैदान में असल में हुआ क्या था, आखिर हल्दीघाटी किसके नाम रही? जानें सच

बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़की थी (फाइल फोटो)

बांग्लादेश में फिर से हिंसा की तैयारी? जुलाई चार्टर को लेकर जमात ने दी सरकार को धमकी

ग्वालियर की समाधि से राष्ट्र की स्मृति तक रानी लक्ष्मीबाई का अमर शौर्य

19 जून का पंचांग

19 जून का पंचांग: शुक्रवार को बन रहे हैं खास ग्रह योग, जानिए दिनभर का शुभ-अशुभ समय

Love Jihad: लव जिहाद का प्रयास विफल, विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने लड़की को परिवार को सौंपा- जानिये पूरा मामला

आज की ताजा खबरें

Today Latest News: पढ़िए 18 जून की बड़ी खबरें एक ही पेज पर

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies