पूरब के लिए सीखपश्चिम के प्रयोग
September 23, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम Archive

पूरब के लिए सीखपश्चिम के प्रयोग

Written byArchiveArchive
Jul 25, 2016, 12:00 am IST
inArchive

दिंनाक: 25 Jul 2016 15:45:01

-अरुण कुमार सिंह –

यह धारणा दुनियाभर में जोर पकड़ रही है कि यदि वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा नहीं दिया गया तो आने वाला समय समस्त मानव जाति के लिए मुश्किलों भरा हो सकता है, क्योंकि ऊर्जा के सभी स्रोतों और भंडारों का अंधाधंुध दोहन हो रहा है। आज ऊर्जा खपत की जो दर है, उसे देखकर लगता है कि ऊर्जा के स्रोत आज नहीं तो कल समाप्त हो ही जाएंगे। एक अनुमान है कि पूरे यूरोप में ऊर्जा की जितनी खपत होती है, उसका 54 प्रतिशत अरब देशों से तेल के रूप में आयात करना पड़ता है। भारत भी प्रतिवर्ष लगभग 60 अरब रुपए का तेल आयात कर रहा है। सवाल उठता है कि जब तेल के भंडार खत्म हो जाएंगे तब दुनिया की क्या स्थिति होगी, इसकी कल्पना ही लोगों को डरा देती है। इसलिए आज भारत सहित विश्व के अनेक देशों में वैकल्पिक ऊर्जा के लिए नए-नए शोध और प्रयोग हो रहे हैं। अमेरिका, इंग्लैण्ड, कनाडा, जर्मनी, जापान, स्वीडन जैसे देश वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा देने में लगे हैं। इन देशों में कूड़ा-कचरे से ऊर्जा प्राप्त करने की दिशा में  अनेक प्रयोग हो रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इन देशों में हर व्यक्ति प्रतिवर्ष लगभग पांच टन कूड़ा-कचरा पैदा होता है। इसका निस्तारण वहां की सरकारों के लिए बहुत बड़ी समस्या है। इसलिए इन देशों की सरकारों ने कचरे से ऊर्जा प्राप्त करने के लिए अनेक प्रयोगों को हरी झंडी दिखाई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि सारे विश्व के कूड़े को जलाया जाए तो उससे प्राप्त ऊर्जा 4 लाख घनमीटर तेल से प्राप्त ऊर्जा के बराबर होगी।
इंग्लैण्ड की एक कंपनी फ्लेमलेस फनेर्सेज ने एक ऐसा संयंत्र विकसित किया है, जिसमें कूड़े-कचरे को डालकर उसे 900 डिग्री सेण्टीग्रेड पर जलाकर ऊर्जा प्राप्त की जाती है। इसे जमा कर विभिन्न उपयोगों में लिया जाता है। यह अन्य ऊर्जा की तुलना में बहुत ही सस्ती है। और इसको तैयार करने से वायु प्रदूषण भी नहीं  होता है।
स्वीडन ने 'ब्रिनी' नाम से एक संयंत्र तैयार किया है। इस संयंत्र में कूड़े को छोटी-छोटी गोलियां बनाकर डाला जाता है और इसके जलने से ऊर्जा प्राप्त होती है। स्वीडन की एक तिहाई ऊर्जा की पूर्ति कूड़े को जलाकर प्राप्त की जा रही ऊर्जा से ही होती है।
लकड़ी के बुरादे को परिष्कृत रूप में इस्तेमाल कर न्यूजीलैण्ड ने ईंधन के खर्च में 80 प्रतिशत की कमी की है।
 अमेरिका, इटली, जापान, जर्मनी और फ्रांस में ज्वालामुखियों से बिजली उत्पादन करने के अनेक प्रयोग हो रहे हैं। उल्लेखनीय है कि ज्वालामुखियों के आसपास जमीन की तलहटी में 150 से 300 डिग्री सेण्टीग्रेड का तापमान मौजूद रहता है। इस तापमान के जरिए टर्बाइन चलाकर बिजली पैदा की जाती है। इसे 'भू-गर्मी' ऊर्जा कहते हैं। एक अनुमान के अनुसार पूरे विश्व में 850 ज्वालामुखी हैं। इनमें 615 सक्रिय हैं और शेष सुप्त। इसके बावजूद इन सभी के आसपास मीलों तक 1000 मीटर की तलहटी तक गर्म खौलता पानी उपलब्ध रहता है।  तकनीक के सहारे विद्युतीय जेनरेटर का संपर्क खौलते हुए पानी से कर दिया जाता है और ताप के दबाव से जेनरेटर चल पड़ता है।  यह कभी न समाप्त होने वाली भाप बिना किसी वायु प्रदूषण के सतत विद्युत उत्पन्न करती रह सकती है। वैज्ञानिकों ने भू-गर्भीय जल का अधिकतम तापमान 358 डिग्री सेण्टीग्रेड पाया है जो भविष्य में 590 मेगावट की विद्युत शक्ति का उत्पादन कर सकता है।  
कैम्ब्रन स्कूल ऑफ माइन्स ने पृथ्वी से हजारों फुट नीचे गर्म चट्टानों की ऊष्मा को एकत्रित कर उससे बिजली पैदा करने में सफलता प्राप्त की है। पृथ्वी के भीतर ग्रेनाइट की जो परत विद्यमान है, उसके विषय में ज्ञात हुआ है कि यह एक-तिहाई पृथ्वी के अन्दर समाहित है। माना जा रहा है कि यदि इसकी ऊष्मा का सही इस्तेमाल किया गया तो आगामी 50 वर्ष के लिए मात्र इसी स्रोत से ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है।
यूरोप के कई देशों में अरसे से पवन चक्की से विद्युत उत्पादन हो रहा है। हॉलैण्ड और इंग्लैण्ड के ग्रामीण क्षेत्रों में खपत की जाने वाली ऊर्जा का अधिकांश भाग पवन चक्की से मिलता है। हॉलैण्ड में एक मेगावाट तक की क्षमता वाली कई पवन चक्कियां लगी हैं, जिनसे छोटे-छोटे उद्योग चलाए जा रहे हैं ।
 अमेरिका में बड़े पंखों वाली कई पवन चक्कियों से विद्युत उत्पादन हो रहा है। इसको विस्तार देने का काम चल रहा है। लरेंस (फ्रांस) और किसलाया ग्यूबा (रूस) में ज्वार-भाटों से बिजली बनाई जा रही है। इन दोनों स्थानों पर 240 मेगावाट के संयंत्र सफलतापूर्वक चल रहे हैं। अमेरिका और कनाडा में पशुओं के गोबर से ऊर्जा प्राप्त करने के लिए काम हो रहा है। यह भारत के लिए भी जरूरी है। नई दिल्ली स्थित पूसा संस्थान के वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के गोबर और कृषि के कचरे, जो सामान्यत: गन्दगी एवं प्रदूषण पैदा करता है। को मीथेन गैस में परिवर्तित किया जा सकता है। अनुमान है कि एक लाख पशु 15 लाख टन गोबर प्रतिवर्ष देते हैं। एक पौंड गोबर से 10 घनफुट मीथेन गैस बनती है। इस प्रकार इतने गोबर से 3 अरब घन फुट मीथेन गैस बन सकती है। इन प्रयोगों और प्रयासों से लोगों को एक दिन जरूर पेट्रोल, डीजल का विकल्प मिलेगा। इससे मानव की रक्षा तो होगी ही, पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा।     ल्ल

Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

president droupadi murmu 72nd national film awards

कलाकार स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थों का समर्थन न करें: 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में बोलीं राष्ट्रपति मुर्मू

nanda sunanda mahotsav nainital cm dhami 2026

नैनीताल में नंदा-सुनंदा महोत्सव में पहुंचे CM धामी, बोले- ‘विकास भी और विरासत भी’ के मंत्र से आगे बढ़ रहा उत्तराखंड

nitin nabin saharanpur visit bjp mission 2027

जो यूपी कभी माफिया के लिए बदनाम था, वो आज वैश्विक पहचान बना रहा है : नितिन नबीन

Dehradun Pachhwa Doon Government Land Illegal Religious Structures Encroachment DM Ashish Chauhan Panchjanya

UNGA में पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ का बेतुका बयान, बोले- ‘अगर हमने न रोका होता, तो न्यूयॉर्क-लंदन में घूमते आतंकी’

Dehradun Pachhwa Doon Government Land Illegal Religious Structures Encroachment DM Ashish Chauhan Panchjanya

उत्तराखंड : सरकारी जमीनों पर कब्जे कर बने मस्जिद-मदरसे और ईदगाह, खामोश रहा प्रशासन

RSS Prabhat Gram Workshop Chittorgarh Sah Sarkaryavah Alok Kumar Panchjanya

“गांवों का विकास और जैविक खेती समय की मांग”: चित्तौड़गढ़ में सह सरकार्यवाह आलोक कुमार जी ने दिया विशेष मंत्र

Load More

ताज़ा समाचार

president droupadi murmu 72nd national film awards

कलाकार स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थों का समर्थन न करें: 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में बोलीं राष्ट्रपति मुर्मू

nanda sunanda mahotsav nainital cm dhami 2026

नैनीताल में नंदा-सुनंदा महोत्सव में पहुंचे CM धामी, बोले- ‘विकास भी और विरासत भी’ के मंत्र से आगे बढ़ रहा उत्तराखंड

nitin nabin saharanpur visit bjp mission 2027

जो यूपी कभी माफिया के लिए बदनाम था, वो आज वैश्विक पहचान बना रहा है : नितिन नबीन

Dehradun Pachhwa Doon Government Land Illegal Religious Structures Encroachment DM Ashish Chauhan Panchjanya

UNGA में पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ का बेतुका बयान, बोले- ‘अगर हमने न रोका होता, तो न्यूयॉर्क-लंदन में घूमते आतंकी’

Dehradun Pachhwa Doon Government Land Illegal Religious Structures Encroachment DM Ashish Chauhan Panchjanya

उत्तराखंड : सरकारी जमीनों पर कब्जे कर बने मस्जिद-मदरसे और ईदगाह, खामोश रहा प्रशासन

RSS Prabhat Gram Workshop Chittorgarh Sah Sarkaryavah Alok Kumar Panchjanya

“गांवों का विकास और जैविक खेती समय की मांग”: चित्तौड़गढ़ में सह सरकार्यवाह आलोक कुमार जी ने दिया विशेष मंत्र

वारेन में बढ़ रही मुस्लिमों की संख्या

मिशिगन को क्यों डरा रहा Dearborn का जिन्न?

साबरमती संवाद में क्रीड़ा भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री प्रसाद महानकर से खेल के आयामों पर पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर बातचीत करते हुए

‘जिससे हारे, उसे गले लगाना ही खेल-धर्म है’

Dehradun MBBS Admission Fake Certificate Fraud SIT Arrests Rupesh Pandit Arvind Kumar Panchjanya

देहरादून MBBS एडमिशन फर्जीवाड़ा: SIT ने 2 मुख्य आरोपियों को किया गिरफ्तार, 20-20 लाख में दिलाया दाखिला!

कल का मौसम: 23 सितंबर को 17 राज्यों में भारी बारिश, 70 की रफ्तार से चलेगी हवा; IMD का अलर्ट

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies